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डेटा स्थानीयकरण से संबंधित मुद्दे

  • 26 Feb 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019

मेन्स के लिये:

डेटा स्थानीयकरण से संबंधित मुद्दे, डेटा संरक्षण से संबंधित मुद्दे

चर्चा में क्यों?

डेटा स्थानीयकरण वर्तमान समय में सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है, इसी संदर्भ में भारत सरकार ने भी व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक, 2019 (Personal Data Protection Bill, 2019) को शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में पेश किया था।

  • विधेयक को व्यापक विचार-विमर्श के लिये संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है जहाँ विधेयक में शामिल बिंदुओं पर व्यापक चर्चा की जाएगी।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून एक व्यापक कानून है जो व्यक्तियों को इस बात पर अधिक नियंत्रण देने का प्रयास करता है कि उनका व्यक्तिगत डेटा कैसे एकत्रित, संग्रहीत और उपयोग किया जाता है।
  • एक बार पारित होने के बाद यह कानून वर्तमान भारतीय गोपनीयता कानून में भारी सुधार का वादा करता है जो कि अपर्याप्त और अनुचित रूप से लागू किया गया है।

विधेयक में डेटा स्थानीयकरण संबंधी प्रावधान

  • विधेयक में स्पष्ट उल्लेख है कि व्यक्तियों द्वारा स्पष्ट सहमति देने और विशेष शर्तों पर ही संवेदनशील पर्सनल डेटा को भारत से बाहर ट्रांसफर किया जा सकता है। हालाँकि ऐसे संवेदनशील पर्सनल डेटा को भारत में भी स्टोर किया जाना चाहिये।
  • जिस संवेदनशील डेटा को सरकार महत्त्वपूर्ण डेटा के तौर पर अधिसूचित करेगी, उसे केवल भारत में ही प्रोसेस किया जा सकता है।

डेटा स्थानीयकरण के पक्ष में तर्क

डेटा स्थानीयकरण के संदर्भ में मूलतः 3 तर्क दिये जाते हैं:

  • डेटा स्थानीयकरण के पक्ष में एक महत्त्वपूर्ण तर्क यह दिया जाता है कि स्थानीय स्तर पर डेटा संग्रहीत करने से कानून प्रवर्तन एजेंसियों को किसी अपराध का पता लगाने या साक्ष्य इकट्ठा करने के लिये आवश्यक जानकारी का उपयोग करने में मदद मिलती है।
    • गौरतलब है कि जहाँ डेटा का स्थानीयकरण नहीं होता है वहाँ जाँच एजेंसियों को जानकारी प्राप्त करने के लिये पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों (Mutual Legal Assistance Treaties-MLATs) पर निर्भर रहना पड़ता है जिसके परिणामस्वरूप जाँच-पड़ताल में विलंब होता है।
  • डेटा स्थानीयकरण से स्थानीय अवसंरचना, रोज़गार और AI पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान के मामले में स्थानीय उद्योग को आर्थिक लाभ प्राप्त होगा।
  • नागरिक स्वतंत्रता के संरक्षण के संबंध में तर्क यह है कि डेटा की स्थानीय होस्टिंग भारतीय कानून को डेटा पर लागू करने और उपयोगकर्त्ताओं को स्थानीय उपचार तक पहुँच प्रदान कर डेटा की गोपनीयता और सुरक्षा में वृद्धि करेगा।

विपक्ष में तर्क

  • विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी देश डेटा के संरक्षण पर बल देने लगे तो यह भारत की उन कंपनियों के लिये बेहद हानिकारक हो सकता है, जो वैश्विक विस्तार की आकांक्षी हैं।
  • जहाँ एक ओर भारत और चीन डेटा स्थानीयकरण के पक्ष में हैं, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सरकार तथा कंपनियाँ निर्बाध डेटा प्रवाह को ज़रूरी समझते हैं।
  • आलोचकों का मानना है कि डेटा स्थानीयकरण की संकल्पना वैश्वीकरण की संकल्पना के विपरीत है तथा यह संरक्षणवाद को बढ़ावा देता है।

कंपनियाँ डेटा भंडारण और स्थानीयकरण में असमर्थ क्यों हैं?

  • उच्च लागत- डेटा के स्थानीयकरण का कार्य कंपनियों के लिये उच्च लागत वाला है क्योंकि इसके लिये उन्हें सर्वर, यू.पी.एस., जनरेटर, भवन और कर्मियों सहित बहुत सी अन्य भौतिक एवं अवसंरचनात्मक लागतों को वहन करना पड़ेगा।
  • सूचना प्रौद्योगिकी के लिये आधारिक संरचना: कंपनियों को लगता है कि भारत में अभी तक सूचना प्रौद्योगिकी के लिये अनुकूल परिस्थितियों तथा आधारिक अवसंरचना का अभाव है। भारत में किसी भी बड़े ई-कॉमर्स व्यापारी हेतु कानूनी प्रावधानों के तहत यह लागत 10% से 50% के बीच हो सकती है।
  • भारत में सेवाएँ प्रदान करने वाली छोटी कंपनियों के लिये मानदंडों का अनुपालन कर पाना मुश्किल होगा। वास्तव में डेटा स्थानीयकरण के प्रमुख उद्देश्यों में से एक उद्देश्य भारत में स्टार्ट-अप क्षेत्र को बढ़ावा देना भी है। लेकिन भारत सरकार द्वारा निर्धारित सख्त मानदंड छोटी कंपनियों के लिये इसे काफी महँगा बना सकते हैं जिससे सरकार के उद्देश्य को पूरा करना संभव नहीं होगा।

आगे की राह

  • देश में डेटा स्थानीयकरण के साथ-साथ डेटा की सुरक्षा पर भी व्यापक प्रयास किये जाने की आवश्यकता है, साथ ही साइबर सुरक्षा को भी सुदृढ़ किया जाना चाहिये।
  • भारत को नागरिकों के निजता के अधिकार की रक्षा के लिये डेटा के दुरुपयोग को रोकने की दिशा में कदम उठाना चाहिये।
  • नीति निर्माताओं को विश्व स्तर पर सफल होने के लिये भारतीय उद्यमियों की परिवर्तनकारी शक्ति पर विश्वास करना चाहिये और इन उद्यमियों को गोपनीयता और डेटा प्रवाह के बारे में निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने का प्रयास करना चाहिये।
  • भारतीय नीतियों में यूरोपीय संघ के डेटा स्थानांतरण मॉडल (EU’s Data Transfer Model) और CLOUD अधिनियम से भी कुछ प्रावधानों का समावेश किया जाना चाहिये।

स्रोत: द हिंदू

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