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भारतीय अर्थव्यवस्था

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण विधेयक, 2019

  • 08 Feb 2019
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण विधेयक, 2019 (International Financial Srvices Centres Authority Bill, 2019) के अंतर्गत भारत में अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्रों (International Financial Services Centres-IFSCs) के तहत सभी वित्तीय सेवाओं को विनियमित करने के लिये एक एकीकृत प्राधिकरण की स्थापना को मंज़ूरी दी है।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • भारत का पहला अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSC) गुजरात के गांधीनगर में स्थापित किया गया है।
  • IFSC उन वित्तीय सेवाओं और निवेश को भारत में वापस लाने में सक्षम बनाता है जो वर्तमान में भारतीय कॉर्पोरेट संस्थाओं और विदेशी शाखाओं/वित्तीय संस्थानों की सहायक कंपनियों द्वारा भारत में व्यावसायिक और विनियामक स्थिति प्रदान करके प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान की तुलना में विश्व के अन्य वित्तीय केंद्रों जैसे - लंदन और सिंगापुर में किये जाते हैं।

एकीकृत प्राधिकरण की आवश्यकता

  • वर्तमान में IFSC में बैंकिंग, पूंजी बाज़ार और बीमा क्षेत्रों को कई नियामकों, अर्थात् RBI, SEBI और IRDAI द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • IFSCs में व्यवसाय की गतिशील प्रकृति को देखते हुए अंतर-नियामक समन्वय तथा इनकी वित्तीय गतिविधियों को नियंत्रित करने वाले मौज़ूदा नियमों में नियमित स्पष्टीकरण एवं संशोधन किये जाने की भी आवश्यकता है।
  • IFSCs में वित्तीय सेवाओं और उत्पादों के विकास के लिये संकेंद्रित और समर्पित विनियामक हस्तक्षेप की आवश्यकता होगी। इसलिये, वित्तीय बाज़ार सहभागियों को विश्व स्तरीय नियामक वातावरण प्रदान करने के लिये भारत में IFSCs के लिये एकीकृत वित्तीय नियामक होने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
  • इसके अलावा, यह व्यावसायिक दृष्टिकोण को आसान बनाना भी आवश्यक होगा। एकीकृत प्राधिकरण वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ भारत में IFSC के विकास के लिये आवश्यक प्रोत्साहन भी प्रदान करेगा।

एकीकृत नियामक स्थापित करने हेतु मसौदा विधेयक

IFSCs की नियामक आवश्यकताओं और वित्तीय क्षेत्र के मौज़ूदा कानूनों के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए आर्थिक मामलों के विभाग (DEA), वित्त मंत्रालय (MoF) ने IFSCs के लिये एक अलग एकीकृत नियामक स्थापित करने के लिये मसौदा विधेयक तैयार किया है। विधेयक की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:

प्राधिकरण का प्रबंधन :

प्राधिकरण में एक अध्यक्ष, भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI), भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड (Securities Exchange Board of India-SEBI), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (Insurance Regulatory and Development Authority of India-IRDAI) द्वारा नामित एक-एक सदस्य,केंद्र सरकार द्वारा नामित दो सदस्य और दो अन्य पूर्णकालिक या पूर्ण या अंशकालिक सदस्य होंगे

प्राधिकरण के कार्य:

इसके अंतर्गत IFSC में ऐसी सभी वित्तीय सेवाओं, उत्पादों और संस्थाओं को विनियमित किया जाएगा, जिन्हें वित्तीय क्षेत्र के नियामकों द्वारा IFSCs के लिये पहले ही अनुमति दी जा चुकी है। प्राधिकरण ऐसे अन्य वित्तीय उत्पादों, सेवाओं को भी विनियमित करेगा जो समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किये जा सकते हैं। यह केंद्र सरकार को ऐसे अन्य वित्तीय उत्पादों, वित्तीय सेवाओं और वित्तीय संस्थानों की भी सिफारिश कर सकता है जिन्हें आईएफएससी में अनुमति दी जा सकती है।

प्राधिकरण की शक्तियाँ:

अधिनियमों के तहत संबंधित वित्तीय क्षेत्र नियामक (RBI, SEBI, IRDAI, और PFRDA आदि) द्वारा प्रयोग की जाने वाली सभी शक्तियाँ प्राधिकरण द्वारा IFSCs में अब तक वित्तीय रूप से नियमन के अनुसार पूरी तरह से प्रयोग की जाएंगी।

प्राधिकरण की प्रक्रिया

प्राधिकरण द्वारा अपनाई जाने वाली और प्रक्रियाएँ वित्तीय उत्पादों, सेवाओं या संस्थानों पर लागू भारत की संसद के संबंधित अधिनियमों के प्रावधानों के अनुसार शासित होंगी।

केंद्रीय सरकार द्वारा अनुदान

केंद्रीय सरकार को इस संबंध में संसद द्वारा कानून के उचित विनियोजन के बाद, प्राधिकरण को इस तरह के धन को अनुदान के रूप में देना होगा क्योंकि केंद्र सरकार प्राधिकरण के प्रयोजनों के लिये इसके उपयोग को समझती है।

विदेशी मुद्रा में लेन-देन:

IFSCs के ज़रिये विदेशी मुद्रा में वित्तीय सेवाओं का लेन-देन प्राधिकरण द्वारा केंद्रीय सरकार के परामर्श से किया जाएगा।

IFSCs के लिये एकीकृत वित्तीय नियामक की स्थापना से बाज़ार के प्रतिभागियों को व्यापार की दृष्टि से उचित विश्व स्तरीय नियामक वातावरण प्रदान किया जा सकेगा। यह भारत में IFSCs के विकास को प्रोत्साहित करेगा और उन वित्तीय सेवाओं तथा लेन-देन को वापस लाने में सक्षम बनाएगा जो वर्तमान में भारत से बाहर के वित्तीय केंद्रों में किये जाते हैं। यह विशेष रूप से भारत में IFSCs के साथ-साथ वित्तीय क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण रोज़गार सृजित करेगा।

स्रोत – PIB

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