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भारतीय राजनीति

इनर लाइन परमिट तथा नागरिकता संशोधन अधिनियम

  • 05 Jun 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

इनर लाइन परमिट, नागरिकता संशोधन अधिनियम

मेन्स के लिये:

इनर लाइन परमिट की प्रासंगिकता 

चर्चा में क्यों?

सर्वोच्च न्यायालय ने ‘बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन’ (Bengal Eastern Frontier Regulation- BEFR), 1873 में संशोधन करने वाले राष्ट्रपति के आदेश; जो असम के ज़िलों को ‘इनर लाइन परमिट’ (Inner Line Permit) से बाहर रखता है, पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

प्रमुख बिंदु:

  • याचिकाकर्ता ने BEFR का हवाला देते हुए कहा है कि असम के अधिकांश ज़िले मूलत: ILP प्रणाली के भाग थे, अत: राज्य में CAA को लागू नहीं किया जाना चाहिये।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर मामले पर दो सप्ताह में प्रतिक्रिया मांगी है।

इनर लाइन परमिट (Inner Line Permit):

  • भारत में यह अवधारणा औपनिवेशिक शासकों द्वारा अपनाई गई थी जिसका उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में जनजातीय आबादी वाले पहाड़ी क्षेत्रों को मैदानी भागों से अलग करना था। इस अवधारणा की उत्पति 'बंगाल ईस्टर्न फ्रंटियर रेगुलेशन एक्ट (BEFR), 1873 से हुई है।
  • ILP वाले पहाड़ी क्षेत्रों में प्रवेश करने तथा निवास करने के लिये अन्य क्षेत्रों के भारतीय नागरिकों को इनर लाइन परमिट (ILP) की आवश्यकता होती है।
  • इस अवधारणा के तहत अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और मिज़ोरम को संरक्षण प्रदान किया गया था जिसमें हाल ही में मणिपुर को जोड़ा गया है।
  • BEFR बाहरी नागरिकों (ब्रिटिश विषयों) के न केवल ILP क्षेत्रों में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाता है अपितु यह उनके वहाँ ज़मीन खरीदने पर भी प्रतिबंध लगाता है। 
  • ILP प्रणाली के माध्यम से अंग्रेजों द्वारा आदिवासी समुदायों से साथ की जाने वाले व्यावसाय हितों को भी संरक्षित किया गया था।
  • स्वतंत्रता के बाद 'इनर लाइन परमिट' प्रणाली में भारत सरकार द्वारा संशोधन किया गया था 'ब्रिटिश विषयों' पद को 'भारत के नागरिक' से प्रतिस्थापित कर दिया गया।
  • वर्तमान में ILP प्रणाली का मुख्य उद्देश्य, ILP के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में अन्य भारतीय नागरिकों को बसने से रोकना है ताकि स्थानीय आदिवासी समुदायों की रक्षा की जा सके।

ILP तथा नागरिकता संशोधन अधिनियम:

  • नागरिकता संशोधन अधिनियम (Citizenship Amendment Act- CAA) में 'इनर लाइन प्रणाली' सहित कुछ अन्य श्रेणियों में छूट प्रदान की गई है।
  • नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA), संविधान की 6वीं अनुसूची में शामिल असम, मेघालय, मिज़ोरम और त्रिपुरा के जनजातीय क्षेत्रों तथा इनर लाइन परमिट (ILP) प्रणाली के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों पर लागू नहीं होगा।
  • CAA अधिनियम के पूर्वोत्तर भारत में विरोध के बाद राष्ट्रपति द्वारा कानून में (संशोधन) आदेश, 2019 जारी किया गया जो BEFR, 1873 में संशोधन का प्रावधान करता है। राष्ट्रपति के आदेश के माध्यम से ILP को मणिपुर तथा नगालैंड के कुछ हिस्सों में विस्तारित किया गया था।

याचिका में की गई मांग:

  • मूल BEFR में असम के कामरूप, दारंग, नोगोंग (अब नागांव), सिबसागर, लखीमपुर और कछार ज़िले शामिल थे।
  • याचिका में कहा गया है राष्ट्रपति के आदेश के बाद ILP को लागू करने की असम सरकार की शक्ति समाप्त हो गई है। 
  • अगर ‘इनर लाइन परमिट’ को असम राज्य में विस्तारित किया  जाता है तो नागरिकता (संशोधन) अधिनियम (Citizenship Amendment Act- CAA) राज्य में प्रभावी नहीं होगा। जिससे असम के लोगों के हितों का बेहतर तरीके से संरक्षण किया जा सकेगा। 

असम पर प्रभाव:

  • यदि असम में यदि ILP को लागू किया जाता है तो असम के अवैध आप्रवासियों को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत नागरिकता नहीं मिलेगी।
  • अवैध आप्रवासियों को असम में प्रवेश करने से प्रतिबंधित किया जा सकेगा।

आगे की राह:

  • असम राज्य कई वर्षों से अवैध प्रवास का सामना कर रहा है। केंद्र तथा राज्य सरकार के राजनीतिक स्वार्थों के कारण अभी तक असम में अभी अवैध प्रवास की समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। अत: केंद्र सरकार  को चाहिये कि वह असम के संबंध में केंद्र सरकर की ILP नीति को स्पष्ट करे ताकि राज्य के हितों का बेहतर तरीके से समाधान किया जा सके। 

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस 

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