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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

यूनाइटेड किंगडम में भारतीय प्रवासियों की भूमिका

  • 18 Dec 2020
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ब्रिटिश विदेश सचिव ने कहा है कि यूनाइटेड किंगडम (United Kingdom) में भारतीय प्रवासियों (Indian Diaspora) की वजह से "भारत की राजनीति" कुछ अर्थों में "ब्रिटेन की राजनीति" जैसी है।

  • उनका यह बयान भारत के विदेश मंत्री के साथ किसानों के विरोध-प्रदर्शन से उत्पन्न स्थिति पर चर्चा के दौरान आया।
  • ब्रिटिश प्रधानमंत्री 2021 के गणतंत्र दिवस (Republic Day) समारोह में मुख्य अतिथि होंगे।
  • उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री को वर्ष 2021 में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन के लिये आमंत्रित किया है।

प्रमुख बिंदु:

भारतीय प्रवासी:

  • भारतीय प्रवासी एक सामान्य शब्द है, इसे उन लोगों को संबोधित करने के लिये उपयोग किया जाता है जो उन क्षेत्रों से चले गए हैं जो वर्तमान में भारत की सीमाओं के भीतर हैं।
  • शब्द "डायस्पोरा" ग्रीक शब्द डायस्पेयरिन से लिया गया है, जिसका अर्थ है "फैलाव"। यह उन लोगों के संदर्भ में प्रयुक्त‍ होता है जो रोज़गार, व्‍यापार या किसी अन्‍य प्रयोजन से अपनी जन्‍मभूमि छोड़ देते और विश्‍व के दूसरे भागों में निवास करते हैं।

ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों:

  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: 
    • भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के समावेश को पूरे विश्व में आधुनिक भारतीय प्रवासियों के अस्तित्व से जोड़ा जा सकता है।
    • उन्नीसवीं सदी में भारतीय गिरमिटिया श्रमिकों को दुनिया के विभिन्न हिस्सों में ब्रिटिश उपनिवेशों में ले जाया गया था।
  • जनसंख्या:
    • ब्रिटेन में भारतीय प्रवासी सबसे बड़े जातीय अल्पसंख्यक समुदायों में से एक है। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार ब्रिटेन में भारतीय मूल के लगभग 1.5 मिलियन लोग रहते हैं जो ब्रिटेन की कुल जनसंख्या के लगभग 1.8% है।
  • अर्थव्यवस्था: ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद में भारतीयों का 6% तक का योगदान है।
    • ब्रिटेन में भारतीय प्रवासियों के स्वामित्व वाली कंपनियाँ 36.84 बिलियन पाउंड के संयुक्त राजस्व के साथ  1,74,000 से अधिक लोगों को रोज़गार देती हैं और कॉर्पोरेशन टैक्स के रूप में 1 बिलियन पाउंड से भी अधिक का भुगतान करती हैं।
  • संस्कृति:
    • ब्रिटेन की मुख्यधारा में धीरे-धीरे भारतीय संस्कृति, व्यंजनों, सिनेमा, भाषाओं, धर्म, दर्शन, प्रदर्शन कला आदि का समावेशन हो गया है।
    • ब्रिटेन में नेहरू केंद्र (Nehru Centre) भारतीय उच्चायोग की सांस्कृतिक शाखा है, जिसे वर्ष 1992 में स्थापित किया गया था।
    • भारतीय स्वतंत्रता की 70वीं वर्षगाँठ को चिह्नित करने के लिये वर्ष 2017 को भारत-ब्रिटेन संस्कृति का वर्ष के रूप में मनाया गया।
  • राजनीति:
    • वर्ष 2019 में ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कॉमन्स में भारतीय मूल के 15 सदस्य थे।

भारतीय प्रवासियों का महत्त्व

  • विशाल संख्या:
    • वैश्विक प्रवास रिपोर्ट (Global Migration Report) 2020 के अनुसार, भारत के 17.5 मिलियन (1 करोड़ 75 लाख) प्रवासी दुनिया के विभिन्न देशों में रह रहे हैं। इनके द्वारा प्रेषित धन (Remittance) को प्राप्त करने के मामले में भारत (78.6 बिलियन डॉलर) विश्व में पहले स्थान पर है।
  • भारतीय प्रवासियों अपने प्रेषण, निवेश, भारत के लिये लॉबिंग, विदेशों में भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने और अपनी बुद्धिमत्ता तथा उद्यम द्वारा भारत की एक अच्छी छवि बनाने में योगदान देते हैं।
  • आर्थिक मोर्चा:
    • भारतीय प्रवासियों कई विकसित देशों में सबसे अमीर अल्पसंख्यकों में से एक है, इससे उन्हें भारत के हितों की पैरवी करने में मदद मिलती है।
    • भारत में प्रच्छन्न बेरोज़गारी (Disguised Unemployment) को कम करने में कम-कुशल श्रमिकों (विशेषकर पश्चिम एशिया) के प्रवास ने भी मदद की है।
    • प्रवासियों द्वारा प्रेषित धन भुगतान संतुलन पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
      • व्‍यापार घाटे को 70-80 बिलियन अमरिकी डॉलर के विप्रेषण से कम करने में मदद मिलती है।
    • प्रवासी श्रमिकों ने क्रॉस-नेशनल नेटवर्क के सहयोग से भारत में सूचना, वाणिज्यिक और व्यावसायिक विचारों तथा प्रौद्योगिकियों के प्रवाह को सुगम बनाया है।
  • राजनीतिक मोर्चा:
    • भारतीय मूल के अनेक लोग कई देशों में शीर्ष राजनीतिक पदों पर हैं। वे संयुक्त राज्य अमेरिका में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के एक महत्त्वपूर्ण भाग होने के साथ ही सरकार में भी भागीदार हैं।
    • भारतीय प्रवासी न केवल भारत की सॉफ्ट पॉवर का हिस्सा है, बल्कि पूरी तरह से स्थानांतरणीय एक राजनीतिक वोट बैंक भी है।

भारतीय प्रवासियों से संबंधित सरकारी पहल

प्रवासी भारतीय दिवस:

  • यह भारत सरकार के साथ विदेशी भारतीय समुदाय के जुड़ाव को मज़बूती प्रदान करने और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने के लिये हर दो साल में एक बार मनाया जाता है।

उमंग अंतर्राष्ट्रीय एप:

  • इसका उद्देश्य विदेशों में भारत सरकार की सेवाओं का लाभ उठाने के लिये भारतीय छात्रों, NRI और भारतीय पर्यटकों की  मदद करना है।
  • इसके अलावा यह अंतर्राष्ट्रीय संस्करण उमंग पर मौजूद भारतीय संस्कृति संबंधी सेवाओं की मदद से विदेशी पर्यटकों को भी आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाएगा।  

वज्रा फैकल्टी स्कीम:

  • यह स्कीम प्रवासी भारतीयों और विदेशी वैज्ञानिक समुदाय को भारत में अनुसंधान तथा विकास में भाग लेने व योगदान करने में सक्षम बनाती है।

भारत को जानें कार्यक्रम:

  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य 18 से 26 आयु वर्ग के प्रवासी युवाओं को देश के विकास और उपलब्धियों से परिचित कराना और उन्हें उनके मूल देश से भावनात्मक रूप से जोड़ना है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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