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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-दक्षिण कोरिया: मैत्री पार्क

  • 31 Mar 2021
  • 10 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारतीय रक्षा मंत्री और उनके दक्षिण कोरियाई समकक्ष ने दिल्ली छावनी में आयोजित एक समारोह में  भारत-दक्षिण कोरिया मैत्री पार्क का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया।

North-Korea

प्रमुख बिंदु:

परिचय:

  • छह एकड़ के हरित क्षेत्र में फैले इस पार्क में कोरियाई शैली का एक प्रवेश द्वार, जॉगिंग ट्रैक, प्राकृतिक उद्यान और रंगभूमि (Amphitheatre) मुख्य आकर्षण के  केंद्र हैं।
  • इस पार्क के प्रवेश द्वार पर निर्मित हाथ मिलाती हुई एक बड़ी कलाकृति है, जिस पर भारत और दक्षिण कोरिया के ध्वज बने हैं।
  • पार्क में प्रतिष्ठित सैनिक जनरल के.एस. थिमैया की भी एक विशाल प्रतिमा लगी है, उन्होंने कोरिया में भारत की अध्यक्षता वाले तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग (NNRC) के चेयरमैन के रूप में भारतीय सैन्य दल का नेतृत्व किया था।
  • तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग (NNRC) 
    • कोरियाई युद्ध में युद्धविराम समझौते की अनुवर्ती कार्रवाई को  अपनाते हुए एक NNRC की स्थापना की गई थी, जिसे दोनों पक्षों के युद्ध में शामिल 20,000 से अधिक कैदियों के बारे में फैसला करना था।
    • भारत को NNRC के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था, जिसमें पोलैंड एवं चेकोस्लोवाकिया कम्युनिस्ट ब्लॉक का प्रतिनिधित्व करते थे तथा स्वीडन और स्विट्ज़रलैंड ने पश्चिमी दुनिया का प्रतिनिधित्व किया ।
  • जनरल थिमैया की प्रतिमा के पीछे स्थापित पाँच स्तंभों पर कोरियाई युद्ध के दौरान 60 पैराशूट फील्ड एंबुलेंस (भारत द्वारा तैनात) द्वारा चलाए गए उन अभियानों का विवरण है जिसमें 1,95,000 घायलों का इलाज किया था और 2,300 घायलों की फील्ड सर्जरी की गई थी।
    • एक स्तंभ को नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के कोरिया पर कहे गए कथन ‘द लैंप ऑफ द ईस्ट’ के रूप में शामिल किया गया है, जो 1929 में कोरियाई दैनिक समाचार पत्र  "डोंग-ए-इल्बो" में प्रकाशित हुआ था।

विकास रणनीति :

  • इस पार्क का विकास भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय, भारतीय सेना, दिल्ली छावनी बोर्ड, कोरियाई दूतावास और भारत के कोरियन वॉर वेटेरन्स एसोसिएशन के संयुक्त परामर्श से किया गया है।

महत्व:

  • दिल्ली छावनी में स्थित इस पार्क की महत्ता केवल भारत-दक्षिण कोरिया के मज़बूत मित्रता संबंधों के प्रतीक के रूप में ही नहीं है बल्कि संयुक्त राष्ट्र के तत्त्वावधान में 1950-53 के बीच हुए कोरियाई युद्ध में हिस्सा लेने वाले 21 देशों में से एक भारत के योगदान को दर्शाना भी है।

बैठक के चर्चित मुद्दे:

  • भारत-प्रशांत रणनीति के हिस्से के रूप में समुद्री सहयोग और रक्षा उद्योग एवं भविष्य की प्रौद्योगिकियों में सहयोग हेतु चर्चा की गई।
    • दोनों देशों ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में काम करते हुए भारतीय नौसेना की मदद के लिये एक रसद समझौते (Logistics Agreement) पर हस्ताक्षर किये।

भारत-दक्षिण कोरिया संबंध:

राजनीतिक:

  • कोरिया युद्ध (वर्ष 1950-53) के दौरान युद्धरत दोनों पक्षों (उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया) के मध्य भारत ने युद्धविराम समझौता कराने में एक प्रमुख भूमिका निभाई। भारत द्वारा प्रायोजित इस संकल्प को स्वीकार कर लिया गया और 27 जुलाई, 1953 को युद्ध विराम की घोषणा हुई, जो भारत की एक बड़ी उपलब्धि थी।
  • मई 2015 में द्विपक्षीय संबंधों को  'विशेष सामरिक भागीदारी’ हेतु उन्नत किया गया।
  • भारत ने दक्षिण कोरिया की दक्षिणी नीति में एक अहम भूमिका निभाई है, जिसके तहत कोरिया अपने प्रभावी क्षेत्र के अतिरिक्त अन्य क्षेत्रों में भी संबंधों का विस्तार करना चाहता है।
  • भारत जहाँ एक ओर अपनी लुक ईस्ट पॉलिसी (Look East Policy) के माध्यम से संबंधों को बढ़ावा दे रहा है, वहीं दक्षिण कोरिया नई दक्षिणी नीति (New Sauthern Policy) के माध्यम से भारत के साथ बेहतर संबंध स्थापित करना चाहता है। दक्षिण कोरिया भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी( Act East Policy) का एक प्रमुख सहयोगी है जिसके अंतर्गत भारत का उद्देश्यों आर्थिक सहयोग, सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देना और एशिया-प्रशांत देशों के साथ रणनीतिक संबंधों को विकसित करना है।

आर्थिक:

  • भारत और दक्षिण कोरिया के बीच वर्तमान द्विपक्षीय व्यापार 21 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है, जबकि वर्ष 2030 तक 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
  • भारत और दक्षिण कोरिया ने व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA), 2010 पर हस्ताक्षर किये हैं। यह समझौता व्यापार संबंधों के विकास को सुविधाजनक बनाता है।
  • कोरिया से निवेश सुविधा के लिये भारत ने 'इन्वेस्ट इंडिया' के अंतर्गत एक ‘कोरिया प्लस’ पहल को शुरू किया है जो निवेशकों का मार्गदर्शन, सहायता करने और   संवर्द्धित  करने की सुविधा प्रदान करेगी।
  • कोरिया के वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी वर्ष 2020 में 1.72% थी तथा कोरिया के वैश्विक आयात में भारत का योगदान  वर्ष 2001 में 0.78% से बढ़कर वर्ष 2020 में 1.05% हो गया है।

सांस्कृतिक:

  • कोरियाई बौद्ध भिक्षु हाइको या होंग जिआओ ने 723 से 729 ईस्वी के दौरान भारत की यात्रा की और उन्होंने ‘भारत के पाँच साम्राज्यों की तीर्थयात्रा’ नामक यात्रा वृतांत लिखा। यह यात्रा वृतांत भारतीय संस्कृति, राजनीति और समाज का ज्वलंत वर्णन करता है।
  • नोबेल पुरस्कार विजेता रवींद्रनाथ टैगोर ने 1929 में कोरिया के गौरवशाली अतीत और इसके उज्ज्वल भविष्य के बारे में एक छोटी लेकिन विचारोत्तेजक कविता ‘लैंप ऑफ द ईस्ट’ की रचना की थी।
  • भारत तथा कोरिया गणराज्य के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने के लिये अप्रैल 2011 में सियोल में तथा दिसंबर 2013 में बूसान में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र (ICC) का गठन किया गया।

दोनों देशों द्वारा साझा किये गए बहुपक्षीय मंच:

आगे की राह

  • भारत-कोरिया गणराज्य (Republic of Korea) संबंधों ने हाल के वर्षों में गति पकड़ी है। वर्तमान में ये संबंध बहुआयामी हो गए हैं, जो हितों के पर्याप्त अभिसरण, आपसी सद्भाव और  उच्च स्तरीय आदान-प्रदान से प्रोत्साहित हुए हैं। 
  • हालाँकि इससे भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों के विस्तार के साथ-साथ एशिया में एक अद्वितीय संबंध बनाने की काफी संभावनाएँ व्यक्त की गई हैं। इसके लिये एक ऐसी राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है जो विविध क्षेत्रों (जैसे- सांस्कृतिक संबंधों, लोगों  के मध्य संपर्क बनाने, लोकतंत्र और उदार मूल्यों का उपयोग करने तथा सभ्यतागत संबंधों) को मजबूत करने की कल्पना करता हो।

स्रोत: पीआईबी

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