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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-कतर

  • 29 Dec 2020
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के विदेश मंत्री ने कतर के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की और दोनों देशों के मध्य आर्थिक तथा सुरक्षा सहयोग को मज़बूत करने पर चर्चा की।

  • यह यात्रा भारत की पश्चिम एशिया के लिये जारी आउटरीच का हिस्सा है, जिसे देश अपने विस्तारित पड़ोस के हिस्से के रूप में देखता है।
  • कतर खाड़ी सहयोग परिषद का सदस्य है।

Qatar

प्रमुख बिंदु:

  • भारत और कतर बहुपक्षीय मंचों पर पारस्परिक हित के सभी मुद्दों पर नियमित परामर्श और समन्वय बनाए रखने के लिये सहमत हुए।
    • आपसी हित के मुद्दों में ऊर्जा, बिजली, पेट्रोकेमिकल, निवेश, बुनियादी ढाँचा, विकास, परियोजना निर्यात और शिक्षा शामिल हैं।
  • इसके अलावा ऊर्जा, व्यापार, निवेश, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, संस्कृति, रक्षा और सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में बहुपक्षीय व द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने के तरीकों पर चर्चा की गई।
    • दोनों देशों के मध्य द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2019-20 में 10.95 बिलियन अमेरिकी डॉलर का था।
  • भारत ने COVID-19 महामारी के दौरान भारतीय समुदाय के लोगों की देखभाल करने के लिये कतर को धन्यवाद दिया।
    • भारत और कतर ने महामारी के दौरान उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखा।
  • भारत ने अपने साथ व्यापारिक साझेदारी के लिये कतरी व्यवसायी संघ (QBA) की प्रतिबद्धता की सराहना की और उन्हें आत्मनिर्भर भारत अभियान से मिलने वाले अवसरों के संबंध में जानकारी दी।

हाल ही में हुए परिवर्तन:

  • दोनों देशों ने COVID-19 महामारी के आर्थिक प्रभाव को दूर करने के लिये प्रमुख पश्चिम एशियाई राज्यों में भारत के आउटरीच के हिस्से, कतर निवेश प्राधिकरण (Qatar Investment Authority) द्वारा निवेश की सुविधा के लिये एक विशेष टास्क फोर्स का गठन करने का निर्णय लिया है।
  • दोनों पक्षों ने श्रमिकों के अधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी सुरक्षा के लिये संस्थागत उपायों पर सहमति व्यक्त की है, जिसमें श्रम संबंधी मुद्दों से निपटना और दोनों देशों के मध्य लोगों की सुरक्षित आवाजाही की सुविधा शामिल है।

भारत-कतर संबंध:

आर्थिक संबंध:

  • व्यापार 
    • पिछले कुछ वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में गैस और तेल की दरों में गिरावट के कारण दोनों देशों के मध्य व्यापार में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई।
    • भारत को क़तर के लिये चौथा सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य माना जाता है।
    • भारत और कतर दोनों के मध्य बैंकिंग क्षेत्र में भी अच्छे संबंध है।
  • निर्यात:
    • भारत में कतर से निर्यात होने वाले प्रमुख वस्तुओं में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG), LPG, रसायन और पेट्रोकेमिकल्स, प्लास्टिक तथा एल्युमीनियम आदि शामिल हैं।
    • कतर को भारत से होने वाले प्रमुख निर्यात में अनाज, तांबा, लोहा और इस्पात, सब्जियाँ, प्लास्टिक उत्पाद, निर्माण सामग्री, वस्त्र और गारमेंट्स आदि शामिल हैं।

ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग:

  • कतर, भारत में LNG का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्त्ता है।
  • भारत अपनी ज़रूरतों के लिये प्राकृतिक गैस का लगभग 70% कतर से आयात करता है।

रक्षा क्षेत्र:

  • कतर के साथ भारत का रक्षा सहयोग अब तक प्रशिक्षण, एक-दूसरे के सम्मेलनों/कार्यक्रमों में भाग लेना और भारतीय नौसेना तथा तटरक्षक जहाज़ों द्वारा यात्रा तक सीमित रहा है
  • ज़ाएर-अल-बहर (Zair-Al-Bahr) भारतीय और कतर नौसेना के मध्य द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास है।

सांस्कृतिक संबंध

  • सांस्कृतिक आदान - प्रदान: 
    • भारतीय सांस्कृतिक केंद्र (Indian Cultural Centre- ICC) से जुड़े सामुदायिक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों में कतर में प्रदर्शन कर रहे भारतीय कलाकारों का एक नियमित प्रयास है।
    • ICC, भारतीय दूतावास, दोहा, और निजी प्रायोजकों के तत्त्वाधान में भारतीय समुदाय के कामकाज से संबंधी संघों का एक शीर्ष निकाय है।
  • योग
    • भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में लाए गए अपने प्रस्ताव पर कतर के समर्थन की एक सह-प्रायोजक के रूप में सराहना की। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा एकमत से रिकॉर्ड 177 सह-प्रायोजकों के साथ अपनाया गया था। इसी प्रस्ताव के आधार पर 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया गया।
  • शिक्षा
    • कतर में 14 भारतीय स्कूल हैं, जो 30,000 से अधिक छात्रों को सीबीएसई पाठ्यक्रम में शिक्षा प्रदान करते हैं, जिनमें से अधिकांश स्कूलों में कतर में काम कर रहे भारतीय नागरिकों के बच्चे पढ़ते हैं।

भारतीय समुदाय:

  • भारतीय समुदाय कतर में सबसे बड़ा प्रवासी समूह है, यह जनसंख्या अनुमानतः लगभग 700 मिलियन है।
  • ये लोग विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। कतर में भारतीयों को उनकी ईमानदारी, कड़ी मेहनत, तकनीकी विशेषज्ञता और कानून का पालन करने वाले स्वभाव के लिये सम्मान दिया जाता है।
  • भारतीयों को लगभग हर स्थानीय प्रतिष्ठान, सरकारी या निजी, विभिन्न क्षमताओं में नियोजित किया जाता है।
  • प्रेषित धन:
    • कतर में रहने वाले प्रवासी भारतीयों द्वारा भारत में प्रतिवर्ष अनुमानतः 750 मिलियन डॉलर की राशि भेजी जाती है।

आगे की राह:

  • कतर, भारत में बुनियादी ढाँचे के क्षेत्र में निवेश करना चाहता है, जिसमें सड़क, राजमार्ग, आर्थिक गलियारे, हवाई अड्डे, बंदरगाह, पर्यटन और होटल उद्योग के अलावा गैस एवं उर्वरक से संबंधित परियोजनाएँ शामिल हैं।
  • भारत, कतर में तरलीकृत प्राकृतिक गैस, रासायनिक उद्योगों, यूरिया, पेट्रोकेमिकल्स और विशेष रूप से उर्वरकों के निर्माण और उत्पादन में प्रत्यक्ष निवेश के लिये तत्पर है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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