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भारत की जनसंख्या वृद्धि दर को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है : अध्ययन

  • 02 Aug 2018
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

ऑस्ट्रिया में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एप्लाइड सिस्टम्स एनालिसिस के विश्व जनसंख्या कार्यक्रम के वैज्ञानिकों के मुताबिक भारत की जनसंख्या वृद्धि दर उतनी भी ज़्यादा नहीं है जितनी कि मौजूदा मॉडलों से आँकी जाती है| वैज्ञानिकों का कहना है कि लोगों के बीच विविधता और शिक्षा के स्तर में अंतर से अधिक सटीक आँकड़े प्राप्त करने में मदद मिल सकती है|

प्रमुख बिंदु

  • शोधकर्त्ताओं ने कहा कि सटीक जनसंख्या अनुमान भारत और उसके कार्यबल को प्रति व्यक्ति उच्च जीडीपी वाले अधिक विकसित एशियाई देशों की बराबरी करने में मदद कर सकता है। 
  • भारत एक अत्यंत विविधतापूर्ण उपमहाद्वीप है। एक देश होने के कारण इसे यूरोप के समान इकाई नहीं माना जाना चाहिये|
  • आने वाले दशकों में भारत का पूर्वानुमान काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि विविधता के किन स्रोतों को मॉडल में शामिल किया जाएगा।

पाँच आयामी मॉडल 

  • 2025 तक  भारत उच्च प्रजनन दर और युवा आबादी के कारण चीन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बनने की ओर अग्रसर है।
  • भारत के विभिन्न क्षेत्रों के बीच विविधता के संबंध में शोधकर्त्ताओं ने एक अध्ययन तैयार किया है। इसमें भारत की जनसंख्या विविधता को समझने के लिये पाँच आयामी मॉडल को शामिल किया गया। 
  • इन आयामों में निवास, राज्य, आयु, लिंग और शिक्षा स्तर के ग्रामीण या शहरी क्षेत्र शामिल हैं। इस मॉडल का इस्तेमाल जनसंख्या अनुमान परिवर्तन को दिखाने के लिये किया गया जो इन कारकों के विभिन्न स्तरों को जोड़ती है|
  • उदाहरण के लिये, एक मॉडल के बहुत अधिक जनसंख्या अनुमान जो समग्र राष्ट्रीय अनुमान की तुलना में अलग-अलग राज्यों से प्राप्त डेटा को जोड़ता है, क्योंकि उच्च प्रजनन दर वाले राज्य अंततः उच्च राष्ट्रीय आबादी अनुमान में शामिल होते हैं।
  • यदि अनुमान (projection) केवल उम्र और लिंग के आधार पर किया जाता तो प्रभावशाली कारक जैसे-उच्च शिक्षा, कम प्रजनन क्षमता से जुड़े कारक  छूट जाते।
  • इस प्रकार  अशिक्षा और ग्रामीण महिलाओं की वर्तमान में उच्च प्रजनन दर के आधार पर एक अनुमान भविष्य में वृहद् रूप से बड़ी आबादी की भविष्यवाणी करता है।
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