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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत और डेनमार्क

  • 05 May 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य भागीदारी, विश्व व्यापार संगठन, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आर्कटिक परिषद।

मेन्स के लिये:

हरित रणनीतिक साझेदारी, भारत-डेनमार्क संबंध, रोगाणुरोधी प्रतिरोध, वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य भागीदारी।

चर्चा में क्यों?

भारतीय प्रधानमंत्री की डेनमार्क यात्रा के दौरान भारत और डेनमार्क हरित हाइड्रोजन , नवीकरणीय ऊर्जा और अपशिष्ट जल प्रबंधन पर ध्यान देने के साथ हरित रणनीतिक साझेदारी को और मज़बूत करने पर सहमत हुए हैं।

  • इसके अलावा भारत ने मिशन पार्टनर के रूप में समाधान हेतु अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (ICARS) में शामिल होने के लिये डेनमार्क के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है।
  • डेनमार्क के प्रधानमंत्री ने साक्ष्य-आधारित डिजिटल प्रौद्योगिकियों के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार हेतु भारत के निमंत्रण पर में डेनमार्क के प्रवेश की पुष्टि की है।

Denmark

भारत-डेनमार्क संबंध:

  • पृष्ठभूमि: भारत और डेनमार्क के बीच राजनयिक संबंध सितंबर 1949 में स्थापित हुए जो नियमित उच्च-स्तरीय आदान-प्रदान (Regular high-level Exchanges) को चिह्नित करते हैं।
    • दोनों देशों की इच्छा क्षेत्रीय और ऐतिहासिक लोकतांत्रिक परंपराओं के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय शांति एवं स्थिरता के लिये कार्य करना है।
    • वर्ष 2020 में आयोजित वर्चुअल समिट के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को "हरित रणनीतिक साझेदारी" के स्तर तक बढ़ा दिया गया था।

हरित रणनीतिक साझेदारी:

  • हरित रणनीतिक साझेदारी राजनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने, आर्थिक संबंधों और हरित विकास का विस्तार, रोज़गार का सृजन, पेरिस समझौते और संयुक्त राष्ट्र के सतत् विकास लक्ष्यों के महत्त्वाकांक्षी कार्यान्वयन पर ध्यान देने के साथ-साथ वैश्विक चुनौतियों संबोधित करना एवं अवसरों को मज़बूती प्रदान करने हेतु एक पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यवस्था है।
  • जलवायु एजेंडे में भारत और डेनमार्क दोनों के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य हैं।
  • भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा CO2 उत्सर्जक देश है और वर्ष 2030 तक देश के कार्बन उत्सर्जन के दोगुना होने की उम्मीद है।
  • वर्ष 2030 तक डेनमार्क सरकार द्वारा CO2 उत्सर्जन को 70% तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसका उद्देश्य सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा के साथ सतत् विकास लक्ष्य-7 (SDG- 7) को प्राप्त करते हुए अंतर्राष्ट्रीय नेतृत्व प्रदान करना है।
  • भारत और डेनमार्क आपसी साझेदारी द्वारा वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करेंगे कि महत्त्वाकांक्षी जलवायु और सतत् ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करना संभव है।
  • वाणिज्यिक और आर्थिक संबंध: भारत-डेनमार्क के बीच वस्तुओं एवं सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार वर्ष 2016 में 2.8 बिलियन अमेरिकी डाॅलर था जो वर्ष 2021 में बढ़कर 5 बिलियन अमेरिकी डाॅलर हो गया है।
    • भारत से डेनमार्क को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में कपड़ा, परिधान और कच्चे धागे से संबंधित वस्तुएंँ, वाहन तथा उनके घटक, धातु के सामान, लोहा व इस्पात, जूते एवं यात्रा संबंधी सामान हैं।
    • डेनमार्क से भारत को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में डेनिश निर्यात औषधीय/दवाएँ, बिजली उत्पन्न करने वाली मशीनरी, औद्योगिक मशीनरी, धातु अपशिष्ट और अयस्क एवं जैविक रसायन शामिल हैं।
  • सांस्कृतिक आदान-प्रदान: भारत का 75वांँ स्वतंत्रता दिवस कोपेनहेगन में ध्वजारोहण समारोह और जीवंत आज़ादी के अमृत महोत्सव समारोह के साथ बड़े उत्साह के साथ मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय शामिल हुए।
    • डेनमार्क के नागरिकों में भारतीय समुदाय के आईटी पेशेवर, डॉक्टर और इंजीनियर शामिल हैं।
    • डेनमार्क में महत्त्वपूर्ण सड़कों और सार्वजनिक स्थानों का नाम भारतीय नेताओं के नाम पर रखा गया है जिनमें गांधी मैदान (गांधी पार्क), कोपेनहेगन और आरहू विश्वविद्यालय के पास एक नेहरू रोड शामिल है।

इंटरनेशनल सेंटर फॉर एंटीमाइक्रोबियल रेज़िस्टेंस सलूशन (ICARS)

  • वर्ष 2017 और वर्ष 2018 के दौरान डेनमार्क और विश्व बैंक के बीच बातचीत के माध्यम से निम्न और मध्यम आय वाले देशों के सहयोग तथा कार्यान्वयन से अनुसंधान पर ध्यान केंद्रित करने वाले एक इंटरनेशनल इंडिपेंडेंट रिसर्च एंड नाॅलिज सेंटर (International Independent Research and Knowledge Centre ) के विचार को बढ़ावा दिया गया था।
  • मार्च 2018 में एक बैठक में इस बात पर सहमति हुई थी कि इस क्षेत्र में यह पता लगाने के लिये इस विचार को आगे बढ़ाना महत्त्वपूर्ण है कि क्या डेनमार्क इस तरह के केंद्र की शुरुआत व मेज़बानी कर सकता है, क्योंकि वन हेल्थ में काम करने का अपना लंबा इतिहास है।
  • नवंबर 2018 में डेनमार्क सरकार ने औपचारिक रूप से ICARS स्थापित करने की अपनी महत्त्वाकांक्षा की घोषणा की।

वैश्विक डिजिटल स्वास्थ्य भागीदारी:

  • ग्लोबल डिजिटल हेल्थ पार्टनरशिप सरकारों, सरकारी एजेंसियों और बहुराष्ट्रीय संगठनों का एक अंतर्राष्ट्रीय सहयोग है जो साक्ष्य-आधारित डिजिटल तकनीकों के सर्वोत्तम उपयोग के माध्यम से अपने नागरिकों के स्वास्थ्य एवं कल्याण में सुधार के प्रति समर्पित है।
  • यह अपने प्रतिभागियों के बीच परिवर्तनकारी जुड़ाव का अवसर प्रदान करने के लिये फरवरी 2018 में स्थापित किया गया था।
  • ऑस्ट्रेलिया 2018 में इस उद्घाटन शिखर सम्मेलन का मेज़बान देश था।
  • 'चौथा ग्लोबल डिजिटल हेल्थ पार्टनरशिप समिट' फरवरी 2019 में नई दिल्ली में आयोजित किया गया था।

आगे की राह

  • बहुपक्षीय मंच पर सहयोग: भारत और डेनमार्क ने मानवाधिकार, लोकतंत्र तथा कानून के शासन के मूल्यों को साझा किया है एवं दोनों को लोकतंत्र और मानवाधिकारों को आगे बढ़ाने व बहुपक्षीय प्रणाली आधारित एक नियम को बढ़ावा देने के लिये विश्व व्यापार संगठन, अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आर्कटिक परिषद जैसे बहुपक्षीय मंचों में सहयोग करना चाहिये।

स्रोत: द हिंदू

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