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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

परमाणु हथियारों में वृद्धि

  • 17 Jun 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये-  

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट, SIPRI ईयरबुक 2020, न्यू स्टार्ट संधि

मेन्स के लिये-

परमाणु शस्त्रों की निगरानी और परमाणु हथियारों एवं सामग्रियों के प्रसार को रोकने की आवश्यकता

चर्चा में क्यों?

हाल ही में प्रकाशित SIPRI ईयर बुक (SIPRI Yearbook) 2020 के अनुसार, भारत, पाकिस्तान और चीन ने विगत वर्ष में अपने परमाणु हथियार संग्रहण में वृद्धि की है साथ ही जिन देशों के पास पहले से ही परमाणु हथियार उपलब्ध हैं वे उनका आधुनिकीकरण कर रहे हैं।

प्रमुख बिंदु:

  • SIPRI ईयर बुक स्वीडिश थिंक टैंक स्टॉकहोम इंटरनेशनल पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट (Stockholm International Peace Research Institute (SIPRI) द्वारा जारी की जाती है। 
    • SIPRI एक स्वतंत्र अंतर्राष्ट्रीय संस्थान है जो संघर्ष, आयुध, हथियार नियंत्रण और निशस्त्रीकरण में अनुसंधान के लिये समर्पित है। इसकी स्थापना वर्ष 1966 में की गई थी। 
    • SIPRI ईयर बुक का प्रथम संस्करण वर्ष 1969 में जारी किया गया था।
    • SIPRI ट्रेंड्स इन वर्ल्ड मिलिट्री एक्सपेंडिचर (Trends in World Military Expenditure) नामक वार्षिक रिपोर्ट भी जारी करता है और वर्ष 2019 में, भारत सैन्य खर्च करने वाले शीर्ष तीन देशों में शामिल था।

  • डेटा विश्लेषण
    • अमेरिका, रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्राँस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इज़राइल तथा उत्तरी अमेरिका विश्व के 9 परमाणु हथियार संपन्न देश हैं। 
      • परमाणु हथियारों की ’अत्यधिक अनिश्चित’ संख्या के कारण रिपोर्ट में उत्तर कोरिया के पास उपलब्ध परमाणु हथियारों की संख्या को गणना में शामिल नहीं किया गया है।

Nuclear-Forces

  • इन देशों में परमाणु हथियारों की कुल संख्या वर्ष 2019 के 13,865 से घटकर वर्ष 2020 में 13,400 हो गई है।
    • समग्र संख्या में गिरावट रूस और संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा न्यू स्टार्ट (New START) संधि के तहत पुराने परमाणु हथियारों का विघटन किये जाने के कारण हुई है। उल्लेखनीय है कि इन देशों देशों के पास उपलब्ध परमाणु हथियारों की संख्या (संयुक्त रूप से) विश्व भर में उपलब्ध कुल परमाणु हथियारों के 90% से अधिक है।
    • रूस और अमेरिका द्वारा पहले ही अपने परमाणु हथियारों और डिलीवरी सिस्टम को बदलने तथा आधुनिक बनाने के लिये व्यापक योजनाओं की घोषणा भी की गई है।
  • भारत, पाकिस्तान और चीन ने अपने परमाणु भंडार में वृद्धि की है तथा अपने शस्त्रागार का आधुनिकीकरण कर रहे हैं।
    • चीन और पाकिस्तान दोनों के पास परमाणु हथियारों का संग्रहण भारत की तुलना में अधिक है।
    • भारत और पाकिस्तान अपने परमाणु बलों के आकार और विविधता में धीरे-धीरे वृद्धि कर रहे हैं।
    • चीन पहली बार एक तथाकथित परमाणु त्रयी (Neclear Triad) विकसित कर रहा है, जो भूमि और समुद्र-आधारित नई मिसाइलों तथा परमाणु-सक्षम विमानों से मिलकर बना है।

  • कम पारदर्शिता:
    • रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि परमाणु-हथियारों की स्थिति और परमाणु-सशस्त्र राज्यों की क्षमताओं पर विश्वसनीय जानकारी की उपलब्धता में व्यापक भिन्नता होती है क्योंकि सरकारें अपने शस्त्रागार से संबंधित जानकारी का पूरी तरह से खुलासा करने में संकोच करती हैं।
      • रिपोर्ट के अनुसार, भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने अपने कुछ मिसाइल परीक्षणों के बारे में बताया लेकिन अपने शस्त्रागार की स्थिति या आकार के बारे में बहुत कम जानकारी प्रदान की।
      • वर्ष 2019 में, संयुक्त राज्य अमेरिका ने भी सार्वजनिक रूप से अपने शस्त्र भंडार के आकार का खुलासा करने की प्रथा को समाप्त कर दिया था।
  • न्यू स्टार्ट (New START)
    • संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस ने नई सामरिक शस्त्र न्यूनीकरण संधि (Strategic Arms Reduction Treaty-START) 2010 के तहत अपने परमाणु शस्त्रागार में कमी की है लेकिन यह संधि फरवरी 2021 में व्यपगत (Lapse) होगी यदि दोनों पक्ष इसकी अवधि को बढ़ाने के लिये सहमत नहीं होते।
    • लेकिन इसके विस्तार पर चर्चा ने अब तक कोई प्रगति नहीं की है क्योंकि संयुक्त राज्य अमेरिका का मानना है कि चीन को भविष्य में परमाणु हथियार कटौती वार्ता में शामिल होना चाहिये और चीन ने स्पष्ट रूप से इस प्रकार की वार्ता में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
    • न्यू स्टार्ट पर गतिरोध और वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज और शॉर्टर-रेंज मिसाइलों के उन्मूलन पर सोवियत संघ और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच संधि (INF संधि 1987) की समाप्ति इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में द्विपक्षीय परमाणु हथियार नियंत्रण समझौते समाप्त हो सकते हैं।
    • दोनों देशों ने अपनी सैन्य योजनाओं और सिद्धांतों में परमाणु हथियारों को नई या विस्तारित भूमिकाएँ प्रदान की हैं, जो कि परमाणु हथियारों के क्रमिक सीमांकन की दिशा में शीत युद्ध के बाद की प्रवृत्ति में एक महत्त्वपूर्ण व्युत्क्रमण को दर्शाता है।

निष्कर्ष

बढ़ते हुए भू-राजनीतिक तनावों के समय में परमाणु शस्त्रों की निगरानी और परमाणु हथियारों एवं सामग्रियों के प्रसार को रोकने के लिये पर्याप्त उपाय किये जाने की आवश्यकता है।

स्रोत: द हिंदू

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