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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

मालाबार नौसैनिक अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने पर विचार

  • 05 Jun 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

मालाबार नौसैनिक अभ्यास

मेन्स के लिये:

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति हेतु भारत के प्रयास, भारत-ऑस्ट्रेलिया द्विपक्षीय सहयोग 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत सरकार द्वारा ऑस्ट्रेलिया को  ‘मालाबार नौसैनिक अभ्यास’ में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

प्रमुख बिंदु:

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया हमेशा से ही एक मुक्त, खुले, समावेशी और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र  के समर्थक रहे हैं। 
  • गौरतलब है कि वर्ष 2016 से ही ऑस्ट्रेलिया ने मालाबार नौसैनिक अभ्यास में शामिल होने की इच्छा ज़ाहिर की है, परंतु भारत अभी तक ऑस्ट्रेलिया को इस नौसैनिक अभ्यास शामिल करने से बचता रहा है।
  • इस मुद्दे पर भारतीय पक्ष का यह मत रहा है कि इस नौसैनिक अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने से यह चीन के खिलाफ एक ‘चतुष्पक्षीय सैन्य गठबंधन’ के समान प्रतीत होगा जो क्षेत्र में भारत और चीन के बीच तनाव को और अधिक बढ़ा सकता है। 
    • हालाँकि इस बात की भी उम्मीद है कि हाल के दिनों में ‘वास्तविक नियंत्रण रेखा' (Line of Actual Control- LAC) पर चीन और भारत के बीच तनाव बढ़ने से यह निर्णय बदल भी सकता है।   

मालाबार नौसैनिक अभ्यास:

  • मालाबार नौसैनिक अभ्यास भारत-अमेरिका-जापान की नौसेनाओं के बीच वार्षिक रूप से आयोजित किया जाने वाला एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास है।   
  • मालाबार नौसैनिक अभ्यास की शुरुआत भारत और अमेरिका के बीच वर्ष 1992 में एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में हुई थी।
  • वर्ष 2015 में इस अभ्यास में जापान के शामिल होने के बाद से यह एक त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास बन गया।  

भारत-ऑस्ट्रेलिया रक्षा सहयोग:  

  • ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त के अनुसार, मालाबार नौसैनिक अभ्यास के संदर्भ में अंतिम निर्णय लेने का अधिकार समूह के सदस्यों को ही है, परंतु ऑस्ट्रेलिया के लिये इस समूह में शामिल होना प्रसन्नता की बात होगी। 
  • पिछले 6 वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच द्विपक्षीय सैन्य सहयोग में चार गुना वृद्धि हुई है। 
  • दोनों देशों ने ‘भारत-ऑस्ट्रेलिया संयुक्त नौसैनिक अभ्यास’ (AUSINDEX) और युद्ध अभ्यास 'पिच ब्लैक' (Pitch Black) के माध्यम से रक्षा क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा दिया है।  

म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट:  

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ‘म्यूचुअल लॉजिस्टिक्स सपोर्ट एग्रीमेंट’  (Mutual Logistics Support Agreement- MLSA) की घोषणा द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण निर्णय है।
  • इस समझौते के तहत दोनों देश एक दूसरे के सैन्य अड्डों का उपयोग कर सकेंगे।
  • यह समझौता दोनों देशों के लिये सैन्य आपूर्ति को आसान बनाने के साथ परिचालन सुधार में सहायक होगा।
  • वर्ष 2016 में भारत और अमेरिका के बीच 'लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज मेमोरैंडम ऑफ एग्रीमेंट' (Logistics Exchange Memorandum of Agreement- LEMOA) पर हस्ताक्षर होने के बाद ऑस्ट्रेलिया पहला देश बना जिसने भारत के समक्ष MLSA का मसौदा प्रस्तुत किया था।
  • इस समझौते पर पिछले वर्ष भारतीय रक्षा मंत्री की कैनबरा (Canberra) यात्रा के दौरान हस्ताक्षर किया जाना प्रस्तावित था परंतु यह यात्रा रद्द होने और इसके बाद जनवरी 2020 में ऑस्ट्रेलिया की वनाग्नि तथा मई 2020 में COVID-19 के कारण इसे विलंबित कर दिया गया था।

समुद्री क्षेत्र जागरूकता

(Maritime Domain Awareness- MDA):    

  • भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच समुद्री क्षेत्र जागरूकता को ध्यान में रखते हुए एक व्यापक ‘समुद्री सहयोग समझौते’ (Maritime Cooperation Agreement) पर कार्य किया जा रहा है।
  • ऑस्ट्रेलिया ने भारतीय नौसेना के गुरुग्राम स्थित ‘सूचना संलयन केंद्र – हिंद महासागर क्षेत्र’ (Information Fusion Centre - Indian Ocean Region or IFC-IOR) पर अपने एक संपर्क अधिकारी को तैनात करने पर सहमति ज़ाहिर की है।

आगे की राह:  

  • समान विचारधारा होने के कारण  पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग की दिशा में महत्त्वपूर्ण प्रगति हुई है।  
  • हाल के वर्षों में दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता से क्षेत्र के देशों के साथ विश्व भर में चीन के व्यवहार पर प्रश्न उठने लगे हैं। 
  • भारत और ऑस्ट्रेलिया पहले से ही ‘क्वाड’ (Quad) के माध्यम से एक ‘मुक्त, खुले और समावेशी’ ‘हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र’ के लिये अपनी प्रतिबद्धता दिखा चुके हैं ऐसे में मालाबार नौसैनिक अभ्यास में ऑस्ट्रेलिया को शामिल करने से क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रति दोनों देशों की विचारधारा को मज़बूती प्रदान करने में सहायता प्राप्त होगी। 

स्रोत: द हिंदू

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