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जीव विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय वैज्ञानिकों की एक नई खोज

  • 15 Sep 2017
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

त्वचा पर पाए जाने वाले जीवाणुओं (Bacteria) में बड़ी संख्या में रोगाणुरोधी एजेंट (antimicrobial agents) पाए जाते हैं। दिल्ली के सी.एस.आई.आर. जीनोमिक्स एवं एकीकृत जीवविज्ञान संस्थान (CSIR-Institute of Genomics and Integrative Biology (CSIR-IGIB) के वैज्ञानिकों द्वारा स्टेफायलोकोक्कस कैपिटिस (Staphylococcus Capitis) नामक एक नए बैक्टीरिया स्ट्रेन (bacterial strain) की पहचान की गई है। 

  • इस बैक्टीरिया में ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया (Gram-positive bacteria) के विरुद्ध एक मज़बूत बैक्टीरियारोधी गतिविधि की क्षमता पाई गई है।
  • ज्ञात हो कि ग्राम पॉजिटिव जीवाणुओं में स्टेफायलोकोक्कस ऑरियस (Staphylococcus Aureus) भी शामिल होते हैं।
  • इस अध्ययन को ‘साइंटिफिक रिपोर्ट’ (Scientific Reports) नामक पत्रिका द्वारा प्रकाशित किया गया है।

प्रमुख बिंदु

  • इस शोध के लिये सर्वप्रथम जीवाणुओं को स्वस्थ मानव के पैर की त्वचा से पृथक किया गया। ये बैक्टीरिया मुख्यतः मानव की पैर की उँगलियों के पास पाए जाते हैं।
  • त्वचा के विभिन्न भागों पर भिन्न-भिन्न प्रकार के बैक्टीरिया पाए जाते हैं। उदाहरण के लिये, बाँह की त्वचा पर पाए जाने वाले बैक्टीरिया पैर पर पाए जाने वाले जीवाणुओं से भिन्न होते हैं।
  • इस शोध के अंतर्गत वैज्ञानिकों द्वारा नए बैक्टीरिया स्ट्रेन (Strain) की खोज की गई, जो कि एस. आॉरेयस से नज़दीकी रूप से संबंधित हैं। ये त्वचा के उसी भाग में पनप सकते हैं।
  • जिसके कारण दो जीवाणुओं के मध्य प्रतियोगिता का संचालन होता है।
  • स्टेफायलोकोक्की (Staphylococci), मानव की त्वचा के कॉमन कॉलनाईज़्र्स (Common Colonizers) बैक्टीरिया हैं तथा ये मानवीय त्वचा के माइक्रोबायोम (microbiome) में पाए जाने वाले तीसरे सबसे बड़े वर्ग के बैक्टीरिया होते हैं।

सात नए पेप्टाइड (Peptides)

  • वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा बैक्टीरिया के जीनोम का अनुक्रमण किया गया तथा उन सभी संभावित पेप्टाइडों की पहचान की गई, जिनमें बैक्टीरियारोधी गतिविधियाँ (Antibacterial Activity) होती हैं।
  • बैक्टीरिया के नए स्ट्रेन में नौ रोगाणुरोधी पेप्टाइड पाए गए, जिनमें से दो पेप्टाइडों एपिडरमिसिन और गैल्लीडरमीन (Epidermicin and Gallidermin) की विशेषताएँ अन्य बैक्टीरिया के ही समान पाई गईं।  
  • अन्य सात नए पेप्टाइडों में रोगाणुरोधी गतिविधियाँ पाई गईं।
  • शोधकर्ताओं द्वारा प्रदत्त जानकारी के अनुसार, जीवाणओं में पाई गई रोगाणुरोधी गतिविधियाँ पेप्टाइड के कारण होती हैं न कि किसी अन्य जैवीय पदार्थ जैसे कि संदूषण (contamination) के परिणामस्वरूप होती हैं।

संश्लेषित पेप्टाइड (Synthetic Peptides)

  • इसके पश्चात् वैज्ञानिकों द्वारा पेप्टाइडों को जीवाणुओं से पृथक कर उन्हें संश्लेषित किया गया। अनुक्रमण युक्त ये संश्लेषित पेप्टाइड प्राकृतिक पेप्टाइडों के समान ही पाए गए।
  • संश्लेषित पेप्टाइडों में रोगाणुरोधी गतिविधियों होती हैं, जिससे नए रोगाणुरोधी यौगिकों को विकसित किया जा सकता है।
  • उल्लेखनीय है कि शोधकर्त्ताओं द्वारा इसके पश्चात् पेप्टाइडों के लिये अनिवार्य न्यूनतम निरोधात्मक सांद्रण (किसी रोगाणुरोधी का न्यूनतम सांद्रण जो सूक्ष्मजीवों के दृश्य विकास को रोक देता है) का अध्ययन किया जाएगा ।
  • तत्पश्चात् इसकी ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया की अधिक से अधिक प्रजातियों एवं दवा प्रतिरोधक एस. ऑरेअस के विरुद्ध जाँच की जाएगी।
  • रोगाणुरोधी गतिविधि के लिये ज़िम्मेदार पेप्टाइड को अलग करने के अलावा शोधकर्त्ताओं द्वारा अन्य कार्यों जैसे- आसंजन (adhesion), एसिड तनाव सहिष्णुता (Acid Stress Tolerance), उपनिवेशीकरण (Colonisation) और मानव त्वचा को जीवित रखने के लिये ज़िम्मेदार गुणसूत्रों के विषय में भी पता लगाया जाएगा।
  • इसके अतिरिक्त वैज्ञानिकों द्वारा त्वचा से बैक्टीरिया को अलग करके इनकी अन्य भूमिकाओं के विषय में भी अध्ययन किया गया।
  • ध्यातव्य है कि इससे पहले भी शोधकर्त्ताओं द्वारा मानव त्वचा में रोगाणुरोधी गतिविधि युक्त अन्य जीवाणुओं के विषय में पता लगाया गया है।
  • गौरतलब है कि कुछ समय पहले मई 2017 में एक नए ग्राम पॉजिटिव बैक्टीरिया ऑरीकोक्कस इन्डिकस (Auricoccus Indicus) की खोज के संबंध में एक लेख प्रकाशित किया गया था।
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