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झारखंड में ICDS सर्वेक्षण

  • 08 Jul 2021
  • 9 min read

प्रिलिम्स के लिये 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्याह्न भोजन योजना, राष्ट्रीय पोषण रणनीति, सतत् विकास लक्ष्य, आँगनवाड़ी सेवा योजना, नीति आयोग, एकीकृत बाल विकास योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, पोषण अभियान, बाल संरक्षण योजना, राष्ट्रीय शिशु गृह योजना

मेन्स के लिये 

बच्चों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य से संबंधित चिंताएँ तथा इस दिशा में किये जा रहे सरकारी प्रयास 

चर्चा में क्यों?

हाल के एक सर्वेक्षण के अनुसार, झारखंड में एकीकृत बाल विकास योजना (Integrated Child Development Scheme- ICDS) के अंतर्गत वर्ष 2021 के पहले छः महीनों में एक बार भी 55% से अधिक को पूरक पोषण नहीं मिला।

प्रमुख बिंदु 

झारखंड की भेद्यता:

  • इस राज्य में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (National Family Health Survey)-4 के आँकड़ों के अनुसार, प्रत्येक दूसरा बच्चा अविकसित और कम वज़न का है तथा प्रत्येक तीसरा बच्चा कम वृद्धि (Stunting) से प्रभावित है एवं प्रत्येक 10वाँ बच्चा गंभीर रूप से कृशता (Wasting) से प्रभावित है व लगभग 70% बच्चे रक्तहीनता (Anemic) से पीड़ित हैं।

एकीकृत बाल विकास योजना:

एकीकृत बाल विकास योजना के विषय में: 

  • यह योजना महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) द्वारा कार्यान्वित एक केंद्र प्रायोजित योजना है। इसे वर्ष 1975 में लॉन्च किया गया था।

आईसीडीएस के अंतर्गत छह योजनाएँ:

  • आँगनवाड़ी सेवा योजना:
    • यह बचपन की देखभाल और विकास के लिये एक अनूठा कार्यक्रम है।
    • इस योजना के लाभार्थी 0-6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे, गर्भवती महिलाएँ और स्तनपान कराने वाली माताएँ हैं।
    • यह छः सेवाओं का एक पैकेज प्रदान करता है जैसे- पूरक पोषण, स्कूल पूर्व अनौपचारिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा, टीकाकरण, स्वास्थ्य जाँच  तथा संप्रेषण सेवाएँ।
    • पूरक पोषण में टेक होम राशन (Take Home Ration), गर्म पका हुआ भोजन और सुबह का नाश्ता शामिल है। अतः यह योजना गरीब परिवारों के लिये अत्यधिक लाभदायक है क्योंकि यह बच्चों के पोषण संबंधी परिणाम को प्रभावित करता है।
  • प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना:
    • इस योजना के अंतर्गत मातृत्‍व और बाल स्‍वास्‍थ्‍य से संबंधित विशिष्‍ट शर्तों को पूरा करने वाले परिवारों के पहले जीवित बच्‍चे के जनन पर गर्भवती महिलाओं तथा स्तनपान कराने वाली माताओं के बैंक/पोस्‍ट ऑफिस खाते में 5,000 रुपए की नकद प्रोत्‍साहन राशि प्रदान की जाती है।
  • राष्ट्रीय शिशु गृह योजना:
    • इस योजना का उद्देश्य कामकाजी महिलाओं/माताओं के बच्चों (6 महीने से 6 वर्ष तक की आयु) को दिन में देखभाल की सुविधा प्रदान करना है।
    • यह सुविधा एक माह में 26 दिन (प्रतिदिन साढ़े सात घंटे) दी जाती है।
    • बच्चों को पूरक पोषण, प्रारंभिक शिशु देखभाल शिक्षा एवं स्वास्थ्य तथा बच्चों को सुलाने की  सुविधा प्रदान की जाती है।
  • किशोरियों के लिये योजना:
    • इसका उद्देश्य 11-14 आयु वर्ग में स्कूल के अतिरिक्त किशोरियों को पोषण, जीवन कौशल एवं घरेलू कौशल प्रदान कर उनकी सामाजिक स्थिति को सशक्त बनाना और सुधारना है। 
    • इस योजना में पोषक और गैर-पोषक तत्त्व शामिल हैं जो इस प्रकार हैं; लौह और फोलिक एसिड पूरकता; स्वास्थ्य जाँच और रेफरल सेवा;  स्‍वास्‍थ्‍य, स्‍वच्‍छता, पोषण के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना, स्‍कूल के अलावा अन्य बाह्य किशारियों को औपचारिक/अनौपचारिक शिक्षा में शा‍मिल करना तथा विद्यमान सरकारी सेवाओं के बारे में सूचना/मार्गदर्शन प्रदान करना है।  
  • बाल संरक्षण योजना:
    •  इसका उद्देश्य कठिन परिस्थितियों में बच्चों के सुधार और कल्याण हेतु योगदान देना है, साथ ही बच्चों के दुरुपयोग, उपेक्षा, शोषण, परित्याग तथा परिवार आदि से अलगाव का मार्ग प्रशस्त करने वाली कार्यवाहियों को रोकना।
  • पोषण अभियान:
    • इसका उद्देश्य छोटे बच्चों में कुपोषण/अल्पपोषण, एनीमिया को कम करके, किशोर लड़कियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं पर ध्यान केंद्रित करके स्टंटिंग, अल्पपोषण, एनीमिया की रोकथाम के साथ जन्म के समय कम वज़न वाले बच्चों के स्तर में सुधार करना है।

ICDS का उद्देश्य :

  • 0-6 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार करना।
  •  बच्चे के उचित मनोवैज्ञानिक, शारीरिक और सामाजिक विकास की नींव रखना।
  • मृत्यु दर, रुग्णता, कुपोषण और स्कूल छोड़ने की घटनाओं को कम करना।
  • बाल विकास को बढ़ावा देने हेतु विभिन्न विभागों के बीच नीति और कार्यान्वयन का प्रभावी समन्वय स्थापित करना।
  • माता में उचित पोषण और स्वास्थ्य शिक्षा के माध्यम से बच्चों के सामान्य स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं की देखभाल करने की क्षमता बढ़ाना। 
  • किशोर लड़कियों (AGs) को सुविधा प्रदान करना,  उन्हें शिक्षित और सशक्त बनाना ताकि वे आत्मनिर्भर और जागरूक नागरिक बन सकें।

अन्य समान सरकारी योजनाएँ 

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM):

  • राष्‍ट्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मिशन (NHM) को वर्ष 2013 में शुरू किया गया था, जिसके उप-मिशन के रूप में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन को सम्मिलित किया गया था। 
  • इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।
  • कार्यक्रम के मुख्य घटकों में प्रजनन-मातृ-नवजात-बाल एवं किशोर स्वास्थ्य (RMNCH+A) और संचारी व गैर-संचारी रोगों के लिये ग्रामीण तथा शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत करना शामिल है।

मध्याह्न भोजन योजना:

  • मध्याह्न भोजन योजना एक केंद्र प्रायोजित योजना है जो वर्ष 1995 में शुरू की गई थी।
  • इस कार्यक्रम के तहत विद्यालय में नामांकित I से VIII तक की कक्षाओं में अध्ययन करने वाले छह से चौदह वर्ष की आयु के हर बच्चे को पका हुआ भोजन प्रदान किया जाता है।
  • यह शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के अंतर्गत आता है।

राष्ट्रीय पोषण रणनीति:

  • इस रणनीति का उद्देश्य सबसे कमज़ोर और महत्त्वपूर्ण आयु समूहों पर ध्यान केंद्रित करते हुए वर्ष 2030 तक सभी प्रकार के कुपोषण को कम करना है।
  • इसका उद्देश्य पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित सतत् विकास लक्ष्यों के हिस्से के रूप में पहचाने गए लक्ष्यों को प्राप्त करने में सहायता करना भी है।
  • इसे नीति आयोग द्वारा जारी किया जाता है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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