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भारतीय अर्थव्यवस्था

जीआई प्रमाणित भालिया गेहूँ: गुजरात

  • 08 Jul 2021
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये

भालिया गेहूँ, भौगोलिक संकेत (GI) प्रमाणीकरण

मेन्स के लिये

भौगोलिक संकेत प्रमाणीकरण का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भौगोलिक संकेत (GI) प्रमाणित भालिया किस्म के गेहूँ की पहली खेप गुजरात से केन्या और श्रीलंका को निर्यात की गई है।

प्रमुख बिंदु

गेहूँ की भालिया किस्म 

  • गेहूँ की भालिया किस्म को जुलाई 2011 में भौगोलिक संकेत (GI) प्रमाणीकरण प्राप्त हुआ था।
  • गेहूँ की इस किस्म में प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है और यह स्वाद में मीठा होता है।
  • यह फसल मुख्य तौर पर गुजरात के भाल क्षेत्र में उगाई जाती है जिसमें अहमदाबाद, आनंद, खेड़ा, भावनगर, सुरेंद्रनगर, भरूच ज़िले शामिल हैं।
  • यह किस्म बिना सिंचाई के रेनशेड परिस्थितियों में उगाई जाती है।

गुजरात के अन्य GI उत्पाद हैं

  • इस श्रेणी में नवीनतम उत्पाद पेठापुर की लकड़ी के प्रिंटिंग ब्लॉक शामिल हैं, वहीं अन्य उत्पादों में सांखेड़ा में बने फर्नीचर, खंभात से एगेट, कच्छ की कढ़ाई, सूरत से ज़री शिल्प, पाटन से पटोला साड़ी, जामनगर से बंधनी और गिर से केसर आम शामिल हैं।

भौगोलिक संकेत

  • भौगोलिक संकेत (GI) एक प्रकार का विशिष्ट संकेतक है जिसका उपयोग एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र से उत्पन्न किसी विशिष्ट विशेषताओं वाले सामानों की पहचान करने हेतु किया जाता है।
    • इसका उपयोग कृषि, प्राकृतिक और विनिर्मित वस्तुओं के लिये किया जाता है।
  • ‘माल का भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ भारत में माल से संबंधित भौगोलिक संकेतों के पंजीकरण और बेहतर सुरक्षा प्रदान करने का प्रयास करता है।
    • अधिनियम का संचालन पेटेंट, डिज़ाइन और ट्रेडमार्क महानियंत्रक द्वारा किया जाता है, जो कि भौगोलिक संकेतकों का रजिस्ट्रार है।
    • भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री का मुख्यालय चेन्नई में स्थित है।
  • भौगोलिक संकेत का पंजीकरण 10 वर्षों की अवधि के लिये वैध होता है, हालाँकि इसे समय-समय पर 10-10 वर्षों की अतिरिक्त अवधि के लिये नवीनीकृत किया जा सकता है।
  • यह विश्व व्यापार संगठन के बौद्धिक संपदा अधिकारों के व्यापार-संबंधी पहलुओं (TRIPS) का भी एक हिस्सा है।
  • हाल के उदाहरण: झारखंड की सोहराई खोवर पेंटिंग, तेलंगाना की तेलिया रुमाल, तिरूर वेटिला (केरल), डिंडीगुल लॉक और कंडांगी साड़ी (तमिलनाडु), ओडिशा रसगुल्ला, शाही लीची (बिहार) आदि।
  • कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय) का ध्यान GI उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर है।
    • हाल ही में महाराष्ट्र के पालघर ज़िले से दहानु घोलवड़ सपोटा की एक खेप का निर्यात किया गया था।

गेहूँ:

  • यह रबी की फसल है जो अक्तूबर-दिसंबर में बोई जाती है और अप्रैल-जून में काटी जाती है।
  • तापमान: तेज़ धूप के साथ 10-15 डिग्री सेल्सियस (बुवाई के समय) और 21-26 डिग्री सेल्सियस (पकने और कटाई के समय) के बीच।
  • वर्षा: लगभग 75-100 सेमी।
  • मृदा का प्रकार: अच्छी तरह से सूखी उपजाऊ दोमट और चिकनी दोमट (गंगा-सतलुज मैदान तथा दक्कन का काली मिट्टी क्षेत्र)।
  • भारत में प्रमुख गेहूँ उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और गुजरात हैं।
    • चीन के बाद भारत दूसरा सबसे बड़ा गेहूँ उत्पादक है।
    • हरित क्रांति की सफलता ने रबी फसलों विशेषकर गेहूँ के विकास में योगदान दिया।
  • कृषि हेतु मैक्रो प्रबंधन मोड, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन और राष्ट्रीय कृषि विकास योजना गेहूँ की खेती का समर्थन करने के लिये कुछ सरकारी पहलें हैं।
  • वित्त वर्ष 2020-21 में भारत से गेहूँ के निर्यात मूल्य में 808% की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई।
    • भारत ने वर्ष 2020-21 के दौरान सात नए देशों - यमन, इंडोनेशिया, भूटान, फिलीपींस, ईरान, कंबोडिया और म्याँमार को पर्याप्त मात्रा में अनाज का निर्यात किया।

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स्रोत: पी.आई.बी.

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