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भारत में मानवाधिकार रिपोर्ट: अमेरिका

  • 15 Apr 2022
  • 10 min read

प्रिलिम्स के लिये:

भारत में मानवाधिकार रिपोर्ट 2021, मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा, मौलिक अधिकार, DPSP, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग।

मेन्स के लिये:

भारत में मानवाधिकार एवं मानवाधिकार संबंधी प्रावधान, भारत में मानवाधिकारों की वर्तमान स्थिति।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अमेरिकी विदेश विभाग ने वर्ष 2021 में भारत में मानवाधिकारों से संबंधित एक आलोचनात्मक रिपोर्ट जारी की है।

  • यह रिपोर्ट प्रतिवर्ष पूर्वव्यापी आधार पर अमेरिकी काॅन्ग्रेस को प्रस्तुत की जाती है, जिसमें नागरिक, राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्त्ता अधिकारों की स्थिति पर देश-वार चर्चा शामिल होती है।
  • दिसंबर 2021 में गृह मंत्रालय द्वारा राज्यों में मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित आँकड़े राज्यसभा में उपलब्ध कराए गए थे।

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएँ:

  • मनमानी गिरफ्तारी और नज़रबंदी:
    • भारतीय कानून ‘मनमाने ढंग से गिरफ्तारी और नज़रबंदी’ पर रोक लगाते हैं, लेकिन ऐसी कई घटनाएँ सामने आईं, जिसमें पुलिस ने ‘गिरफ्तारी की न्यायिक समीक्षा को स्थगित करने के लिये विशेष सुरक्षा कानूनों’ का उपयोग किया।
    • पूर्व-परीक्षण निरोध मनमाना और काफी लंबी अवधि का था, जो कभी-कभी दोषियों को दी गई सज़ा की अवधि से भी अधिक था।
  • गोपनीयता का उल्लंघन:
    • पेगासस मैलवेयर के माध्यम से पत्रकारों को लक्षित किये जाने संबंधी मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए इस रिपोर्ट ने सरकारी अधिकारियों पर गोपनीयता के उल्लंघन का आरोप लगाया, जिसमें मनमाने ढंग से या गैरकानूनी रूप से निगरानी करने या व्यक्तियों की गोपनीयता में हस्तक्षेप करने के लिये प्रौद्योगिकी का उपयोग शामिल है।
  • स्वतंत्र अभिव्यक्ति और मीडिया पर प्रतिबंध:
    • रिपोर्ट में ऐसे उदाहरणों पर प्रकाश डाला गया है जिनमें सरकार या सरकार के करीबी माने जाने वाले लोगों ने कथित तौर पर सरकार की आलोचना करने वाले मीडिया आउटलेट्स पर दबाव डाला या उन्हें परेशान किया, जिसमें ऑनलाइन ट्रोलिंग भी शामिल है।
    • इसमें फरवरी 2021 के सरकार के आदेश का भी विस्तृत विश्लेषण किया गया है, जिसमें ट्विटर को तीन कृषि कानूनों (बाद में निरस्त) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन को कवर करने वाले पत्रकारों के खातों को ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया था।
  • संघ की स्वतंत्रता:

मानवाधिकार का अर्थ:

  • परिचय:
    • सरल शब्दों में कहें तो मानवाधिकार का आशय ऐसे अधिकारों से है जो जाति, लिंग, राष्ट्रीयता, भाषा, धर्म या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किये बिना सभी को प्राप्त होते हैं।
    • मानवाधिकारों में मुख्यतः जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार, गुलामी और यातना से मुक्ति का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार तथा काम एवं शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार आदि शामिल हैं।
    • मानवाधिकारों के संबंध में नेल्सन मंडेला ने कहा था, “लोगों को उनके मानवाधिकारों से वंचित करना उनकी मानवता को चुनौती देना है।”
  • भारत में मानवधिकारों से संबंधित प्रावधान:
    • संवैधानिक प्रावधान:
      • मौलिक अधिकार: संविधान के अनुच्छेद 12 से अनुच्छेद 35 तक। इसमें समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार तथा संवैधानिक उपचारों का अधिकार आदि शामिल हैं।
      • राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत: संविधान के अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 तक। इसमें सामाजिक सुरक्षा का अधिकार, काम का अधिकार, रोज़गार चयन का अधिकार, बेरोज़गारी के विरुद्ध सुरक्षा, समान काम तथा समान वेतन का अधिकार, मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार एवं मुफ्त कानूनी सलाह का अधिकार आदि शामिल हैं।
    • सांविधिक प्रावधान:
      • मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम (PHRA), 1993 (वर्ष 2019 में संशोधित) में केंद्रीय स्तर पर एक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के गठन की बात कही गई है, जो संविधान में प्रदान किये गए मौलिक अधिकारों के संरक्षण और उससे संबंधित मुद्दों के लिये राज्य मानवाधिकार आयोगों और मानवाधिकार न्यायालयों का मार्गदर्शन करेगा।
        • PHRA की धारा 2(1)(d) मानव अधिकारों को संविधान द्वारा गारंटीकृत, व्यक्ति के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा से संबंधित अधिकारों के रूप में परिभाषित करती है, जो अंतर्राष्ट्रीय प्रसंविदाओं में सन्निहित एवं भारत में न्यायालयों द्वारा प्रवर्तनीय हैं।
    • भारत ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) के प्रारूपण में सक्रिय रूप से भाग लिया।
      • इसके अंतर्गत अधिकारों और स्वतंत्रताओं से संबंधित कुल 30 अनुच्छेदों को सम्मिलित किया गया है, जिसमें जीवन, स्वतंत्रता व गोपनीयता जैसे नागरिक और राजनीतिक अधिकार तथा सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसे आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकार शामिल हैं।

प्रश्न. मौलिक अधिकारों के अलावा भारत के संविधान का निम्नलिखित में से कौन-सा भाग मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (1948) के सिद्धांतों और प्रावधानों को दर्शाता है या प्रतिबिंबित करता है? (2020)

  1. प्रस्तावना
  2. राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांत
  3. मौलिक कर्तव्य

नीचे दिये गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिये:

(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर: (d) 

  • वर्ष 1948 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा घोषित मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा (UDHR) प्रत्येक मनुष्य की समानता और गरिमा को स्थापित करती है तथा सभी लोगों को उनके समस्त अधिकारों और स्वतंत्रताओं का निर्वहन करने में सक्षम बनाने हेतु प्रत्येक सरकार के मुख्य कर्तव्य को निर्धारित करती है।
  • प्रस्तावना: प्रस्तावना का उद्देश्य जैसे- न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक), समानता और स्वतंत्रता भी UDHR के सिद्धांतों को दर्शाते हैं।
  • राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांत (DPSP): अनुच्छेद 36 से अनुच्छेद 51 के तहत प्रदान किये गए DPSP ऐसे सिद्धांत हैं जिनका उद्देश्य सामाजिक और आर्थिक न्याय प्रदान करना तथा कल्याणकारी राज्य की दिशा निर्धारित करना है। ये DPSP राज्य पर दायित्व के रूप में कार्य करते हैं जो मानवाधिकारों के अनुरूप हैं। कुछ डीपीएसपी जो मानव अधिकारों के साथ तालमेल बिठाते हैं, वे इस प्रकार हैं:
    • अनुच्छेद 38: कल्याणकारी राज्य को बढ़ावा देना।
    • अनुच्छेद 39: असमानताओं को कम करना।
    • अनुच्छेद 39A: मुफ्त कानूनी सहायता।
    • अनुच्छेद 41: बेरोज़गार, बीमार, विकलांग और वृद्ध व्यक्तियों जैसे समाज के कमज़ोर वर्गों का समर्थन करना।
    • अनुच्छेद 43: निर्वाह मज़दूरी सुनिश्चित करना।
  • मौलिक कर्तव्य (अनुच्छेद 51A): ये मूल कर्तव्य भारत के सभी नागरिकों के नागरिक और नैतिक दायित्व हैं। वर्तमान में 11 मौलिक कर्तव्य हैं, जो संविधान के भाग IV A में वर्णित हैं। अनुच्छेद 51A (K) माता-पिता या अभिभावक द्वारा 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चे को शिक्षा के अवसर प्रदान करने की बात करता है। यह पहलू किसी तरह गरिमा सुनिश्चित करने से संबंधित है।

स्रोत: द हिंदू

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