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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

COVID-19 दवा के मानवीय परीक्षण को मंज़ूरी

  • 30 Jun 2020
  • 3 min read

प्रीलिम्स के लिये:

कोवाक्सिन वैक्सीन, COVID-19

मेन्स के लिये:

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, भारत बायोटेक का चिकित्सा क्षेत्र में महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में ‘भारत बायोटेक’ द्वारा भारत में विकसित की जा रही पहली COVID-19 वैक्सीन 'कोवाक्सिन' (COVAXIN), के मानव क्लीनिकल परीक्षण के लिये ‘ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ (Drug Controller General of India- DCGI) द्वारा अनुमति दे दी गई है।

प्रमुख बिंदु:

  • भारत बायोटेक कंपनी द्वारा इस वैक्सीन को ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद’ (Indian Council of Medical Research- ICMR) तथा ‘राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान’ (National Institute of Virology- NIV) के सहयोग से विकसित किया गया है।
  • ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया’ तथा ‘स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय’ द्वारा इस वैक्सीन के फेज़-1 एवं फेज़-2 के लिये मानव क्लीनिकल परीक्षण की मंज़ूरी प्रदान की है।
  • अगले महीने अर्थात जुलाई से इस वैक्‍सीन का इंसानों पर परीक्षण शुरू किया जाएगा।
  • इस वैक्सीन को हैदराबाद जीनोम वैली में स्थित भारत बायोटेक कंपनी की बीएसएल-3 (बायो-सेफ्टी लेवल 3) हाई कंटेनमेंट फैसिलिटी के माध्यम से कोरोना वायरस स्ट्रेन से अलग किया गया है जिसे बाद में भारत बायोटेक कंपनी को भेजा गया जहाँ इस स्वदेशी वैक्सीन को विकसित किया गया है।

‘भारत बायोटेक’ का राष्ट्रीय महत्त्व’

  • भारत बायोटेक कंपनी देश में महामारियों से निपटने के लिये राष्ट्रीय महत्त्व के विषय के रूप में टीका विकास को आगे बढ़ाने के लिये प्रतिबद्ध है।
  • भारत बायोटेक अपने सेल कल्चर प्लेटफॉर्म (Cell Culture Platform) प्रौद्योगिकी द्वारा पोलियो, रेबीज़, रोटावायरस, जापानी एन्सेफलाइटिस, चिकनगुनिया और ज़ीका रोगों के लिये भी टीका विकसित करने के लिये भी प्रतिबद्ध है।
  • भारत में COVID-19 वैक्सीन का निर्माण करने वाली भारत बायोटेक कंपनी ‘भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद’ तथा ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी’ के सहयोग से कॉवोफ्लू टीका तैयार करने के प्रयासों में लगी है।

स्रोत: द हिंदू

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