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पीएसबी द्वारा जब्त संपत्तियों के लिये प्रस्तावित एक साझा ई-नीलामी मंच

  • 14 Sep 2018
  • 4 min read

चर्चा में क्यों?

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) से कहा है कि वे विभिन्न चूककर्त्ताओं से जब्त संपत्तियों की नीलामी हेतु एक साझा मंच स्थापित करें। जब्त की गई संपत्तियों के लिये साझा ई-नीलामी प्लेटफॉर्म के इस वर्ष परिचालित होने की उम्मीद है।

क्या है योजना?

  • ऐसी संपत्तियों हेतु वित्त मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित एक "ई-नीलामी बाज़ार" बोली लगाने वालों के लिये एक अच्छा आधार और बेहतर मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित करेगा।
  • मंत्रालय ने राज्य द्वारा संचालित बैंकों से भारतीय बैंक एसोसिएशन के साथ मिलकर इस मंच को सुविधाजनक बनाने के लिये अपनी वेबसाइटों को फिर से डिज़ाइन करने के लिये कहा है।
  • योजना के अनुसार, संपत्तियों का विवरण, उनकी तस्वीरें, संपत्ति शीर्षक, नीलामी राशि और अन्य सूचनाएँ इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी और इसका उपयोग संभावित बोली लगाने वालों द्वारा किया जा सकेगा।

क्यों है एक साझा मंच की आवश्यकता?

  • वर्तमान में कई राज्य संचालित बैंक सरफेसी अधिनियम के तहत देश भर में जब्त की गई संपत्तियों की नीलामी करते हैं। हालाँकि, नीलामी के समय बैंक अधिक संख्या में बोली लगाने वालों को आमंत्रित नहीं कर पाते हैं और बोली लगाने वालों के बीच व्यावसायिक समूहन होने के जोखिम का भी सामना करते हैं, जो कि जान-बूझकर कीमतें कम करवाने का प्रयास करते हैं।
  • बिक्री योग्य संपत्तियों के डेटाबेस डिज़ाइन में कोई समानता नहीं है और नीलामी की जानकारी राज्य संचालित बैंकों की वेबसाइटों पर आसानी से उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा, प्रत्येक राज्य संचालित बैंक नीलामी के लिये अपनी लागत स्वयं वहन करता है।

बैंक कैसे लाभान्वित होंगे?

  • इस मंच के द्वारा संपत्तियों के लिये बैंकों को बेहतर मूल्य मिलेगा। बोली लगाने वालों के द्वारा इन संपत्तियों की जानकारी एक ही स्थान पर प्राप्त होने के कारण यह ऐसी संपत्तियों की नीलामी में बोली लगाने वालों की निम्न स्तर की रुचि में सुधार करेगा।
  • इस मंच के माध्यम से बैंक संभावित बोली लगाने वालों की बड़ी संख्या तक पहुँच प्राप्त कर सकेंगे। यह बड़े पैमाने पर मितव्ययता के माध्यम से नीलामी वाली संपत्तियों की लागत में कटौती कर सकता है।
  • वर्तमान में यदि नीलामी की घोषणा पर कमज़ोर प्रतिक्रिया प्रदर्शित होती है, तो बैंकों को नीलामी की हर बोली के साथ आरक्षित मूल्य में कटौती करने के लिये मजबूर होना पड़ता है। साझा मंच उपलब्ध होने से इसका समाधान हो जाएगा।

कौन से अन्य उपाय वसूली में सुधार कर सकते हैं?

  • कई बैंकों ने तनावग्रस्त संपत्तियों के लिये कार्यक्षेत्र स्थापित किये हैं। दिवालिया अदालतों में ऐसे मामलों की सुनवाई के बावजूद, अपनी फर्मों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिये ऋण चुकाने का प्रयास कर रहे प्रमोटरों के प्रति बैंक आशान्वित रहते हैं।
  • ऋण वसूली ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में दायर मामलों के लिये न्यूनतम ऋण डिफ़ॉल्ट सीमा 20 लाख रुपए तक बढ़ाने का केंद्र का प्रयास और डीआरटी प्रक्रिया को ऑनलाइन स्थानांतरित करने से संबंधित मसले को हल करने से इसमें मदद मिलेगी। यह बैंकों के लिये उच्च मूल्य वाले मामलों में त्वरित निर्णय सुनिश्चित करेगा।
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