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भारतीय अर्थव्यवस्था

दालों की कीमतों में वृद्धि

  • 15 Oct 2020
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये

नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया

मेन्स के लिये

भारत में दालों की बढ़ती कीमत 

चर्चा में क्यों?

दालों की कीमतों में हालिया वृद्धि को रोकने के लिये केंद्र सरकार ने अपने बफर स्टॉक से 40,000 टन तुअर दाल की छोटी-छोटी खेप को खुदरा बाज़ार में भेजने की योजना बनाई है।

प्रमुख बिंदु:

  • कीमतों में वृद्धि: 
    • उड़द और तुअर दाल के प्रमुख खपत केंद्रों (आंध्र प्रदेश, केरल, महाराष्ट्र, बिहार और तमिलनाडु) में पिछले दो हफ्तों में कीमतों में 20% की बढ़ोतरी हुई है।
      • इन राज्यों ने रियायती मूल्य पर दालों को बेचने के लिये केंद्रीय बफर स्टॉक (Central Buffer Stock) से MSP दरों पर एक लाख टन दाल खरीदने में रुचि व्यक्त की है। 
    • अखिल भारतीय स्तर पर उड़द की औसत खुदरा कीमतों में वर्ष 2019 की तुलना में लगभग 40% की वृद्धि हुई है, जबकि तुअर दाल की औसत खुदरा कीमतों में लगभग 24% की वृद्धि हुई है।
  • खुदरा हस्तक्षेप: 
    • उपभोक्ता मामलों के विभाग (Department of Consumer Affairs- DoCA) ने खुदरा हस्तक्षेप अर्थात् ‘नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (National Agricultural Cooperative Marketing Federation of India- NAFED) के बफर स्टॉक का उपयोग करने के लिये एक प्रणाली की शुरुआत की है।
      • NAFED राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दालों की आपूर्ति करने के लिये  किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की दर से मध्यम खुदरा कीमतों पर दालों की खरीद करता है।
      • राज्यों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (Public Distribution System) की राशन दुकानों के माध्यम से या सरकारी/सहकारी समितियों द्वारा संचालित दूध एवं सब्जी दुकानों के माध्यम से आपूर्ति के लिये थोक या खुदरा तरीके से दालों की आपूर्ति की जाती है।
  • ऐसे खुदरा हस्तक्षेप के लिये कीमतें MSP के आधार पर ही तय की जाती हैं।
  • भारत सरकार के इस निर्णय से NAFED के मौजूदा स्टॉक के वितरण में मदद मिलेगी ताकि इस सीजन में होने वाले फसल उत्पादन को खरीदने का मार्ग प्रशस्त हो सके।

ओपन मार्केट सेल (Open Market Sale) का उपयोग करना:

  • खुदरा हस्तक्षेप के अतिरिक्त DoCA ने ‘ओपन मार्केट सेल (OMS) स्कीम’ के तहत बफर स्टॉक से 40,000 मीट्रिक टन तुअर दाल को छोटी-छोटी खेप में भेजने का निर्णय लिया है, ताकि बढ़ती कीमतों को रोका जा सके।

पूर्व में किये गए उपाय:

  • केंद्र सरकार ने प्रत्येक राज्य में योजना शुरू होने की तारीख से अपनी मूल्य समर्थन योजना (Price Support Scheme- PSS) के लिये खरीद की अवधि 90 दिनों तक बढ़ा दी।
    • जब कीमतें MSP से नीचे हो जाती हैं, तो राज्य सरकारों के अनुरोध पर PSS का संचालन किया जाता है।
  • केंद्र सरकार ने COVID-19 राहत पैकेज (प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना) के हिस्से के रूप में तीन महीने के लिये राशन कार्डधारक सभी परिवारों को प्रतिमाह एक किलो दाल प्रदान करने का वादा किया था।

आगे की राह: 

  • यदि किसी राष्ट्र के सभी नागरिकों के पास पर्याप्त पौष्टिक भोजन उपलब्ध है और उन सभी के पास स्वीकार्य गुणवत्ता का भोजन खरीदने की क्षमता है तथा भोजन तक पहुँच में कोई बाधा नहीं है तो उस राष्ट्र की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • पौष्टिक भोजन का अधिकार अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का एक सुस्थापित सिद्धांत है। यह खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में अपने नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा एवं अधिकारों की पूर्ति के लिये राज्यों के दायित्व के रूप में विकसित हुआ है।

स्रोत-द हिंदू

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