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आवश्यक दवाओं की कीमत में वृद्धि

  • 14 Dec 2019
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण, एपीआई क्या है?

मेन्स के लिये

दवाओं की कीमतों में वृद्धि का स्वास्थ्य योजनाओं पर प्रभाव

चर्चा में क्यों?

हाल ही में राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (National Pharmaceuticals Pricing Authority-NPPA) द्वारा 12 आवश्यक दवाओं (Essential Medicines) की कीमतों में 50 प्रतिशत की वृद्धि की गई।

मुख्य बिंदु:

  • NPPA द्वारा पहली बार दवाओं की कीमतों में वृद्धि की गई है, जबकि यह दवाओं की कीमतों में नियंत्रण के लिये जानी जाती है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organisation-WHO) के अनुसार, आवश्यक दवा उन दवाओं को कहा जाता है जो लोगों की प्राथमिक स्वास्थ्य आवश्यकतों की पूर्ति करती हैं तथा लोगों के स्वास्थ्य के लिये इन दवाओं का पर्याप्त मात्रा में मौजूद होना आवश्यक है।
  • ये दवाएँ पहली पंक्ति के उपचार (First Line of Treatment) के तौर पर प्रयोग की जाती हैं तथा देश के स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिये अतिमहत्त्वपूर्ण हैं।
  • कीमतों में वृद्धि का यह निर्णय टी.बी. (Tuberculosis) के इलाज के लिये बी.सी.जी. वैक्सीन, विटामिन C, एंटीबायोटिक दवा मेट्रोनिडाज़ोल (Metronidazole) तथा बेंजाइलपेनिसिलिन (Benzylpenicillin), मलेरिया के उपचार की दवा क्लोरोक्वीन (Chloroquine) और लेप्रोसी की दवा डेस्पोन (Dapsone) आदि पर लागू होगा।

मूल्य वृद्धि का कारण:

  • इन दवाओं की सही कीमत न मिल पाने की वजह से निर्माता कंपनियों ने इनका उत्पादन करने से मना कर दिया था।
  • NPPA के अनुसार, ड्रग्स मूल्य नियंत्रण आदेश (Drug Price Control Order-DPCO) के पैरा-19 के तहत पिछले दो वर्षों से कंपनियों की तरफ से दवाओं के मूल्य में वृद्धि हेतु प्रार्थना-पत्र भेजे जा रहे थे।
  • इन दवाओं की निर्माता कंपनियों का कहना है कि दवा बाज़ार में एपीआई (Active Pharmaceutical Ingredient-API) की बढ़ती कीमतों, लागत मूल्य तथा विनिमय दर (exchange rates) में वृद्धि की वजह से इनके उत्पादन को जारी रखना नामुमकिन था।

भारतीय दवा कंपनियाँ दवाओं के निर्माण के लिये आवश्यक 60 प्रतिशत API के लिये चीन पर निर्भर हैं।

  • NPPA ने इस मामले की पूरी जाँच के लिये एक समिति का गठन किया जिसने इन दवाओं की आवश्यकता, प्रार्थी कंपनियों का मार्केट शेयर तथा इन दवाओं के अन्य विकल्पों का अध्ययन किया।
  • समिति की रिपोर्ट को पुनर्वीक्षण हेतु नीति आयोग की वहनीय दवाओं तथा स्वास्थ्य उत्पादों पर स्थायी समिति (Standing Committee on Affordable Medicines and Health Products-SCAMHP) को सौंपा गया। जिसने 12 दवाओं की कीमतों में 50 प्रतिशत की वृद्धि का सुझाव दिया।
  • NPPA के अनुसार, इन आवश्यक दवाओं की वहनीयता (Affordability) सुनिश्चित करने के लिये इनकी उपलब्धता (Access) से समझौता नहीं किया जा सकता तथा लोगों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए इनकी कीमतों में वृद्धि करना जरूरी है।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA):

यह एक स्वायत्त निकाय है तथा देश के लिये स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक दवाओं (National List of Essential Medicines-NLEM) एवं उत्पादों की कीमतों को नियंत्रित करता है।

NPPA के कार्य:

  • विनियंत्रित थोक औषधियों व फॉर्मूलों का मूल्य निर्धारित व संशोधित करना।
  • निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप औषधियों के समावेशन व बहिर्वेशन के माध्यम से समय-समय पर मूल्य नियंत्रण सूची को अद्यतन करना।
  • दवा कंपनियों के उत्पादन, आयात-निर्यात और बाज़ार हिस्सेदारी से जुड़े डेटा का रखरखाव।
  • दवाओं के मूल्य निर्धारण से संबंधित मुद्दों पर संसद को सूचनाएँ प्रेषित करने के साथ-साथ दवाओं की उपलब्धता का अनुपालन व निगरानी करना।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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