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नाइजीरिया में उच्च श्रेणी के लिथियम की खोज

  • 29 Jun 2022
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये:

उच्च श्रेणी के लिथियम, स्पोड्यूमिन और लेपिडोलाइट, इलेक्ट्रिक वाहन

मेन्स के लिये:

भारत में लिथियम, लिथियम के अनुप्रयोग, लिथियम के आयात को कम करने के लिये भारत द्वारा उठाए गए कदम

चर्चा में क्यों?

हाल ही में नाइजीरिया में उच्च श्रेणी के लिथियम की खोज की गई है।

  • पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में ग्रीनबुश खदान विश्व की सबसे बड़ी हार्ड-रॉक लिथियम खदान है।
  • लिथियम के सबसे बड़े आयातक दक्षिण कोरिया, चीन, जापान, अमेरिका और बेल्जियम हैं।

लिथियम:

  • परिचय:
    • लिथियम एक तत्त्व है और प्रकृति में दो खनिजों, स्पोड्यूमिन एवं लेपिडोलाइट में पर्याप्त रूप में सांद्रित होता है।
    • वे आमतौर पर विशेष चट्टानों में पाए जाते हैं जिन्हें दुर्लभ और ग्रीसेन्स कहा जाता है
    • भूवैज्ञानिक एजेंसी ने लिथियम को उच्च श्रेणी के रूप में वर्णित किया क्योंकि यह 1-13% ऑक्साइड सामग्री के साथ पाया जाता है। आमतौर पर अन्वेषण 0.4% के निचले स्तर पर शुरू होता है।
      • श्रेणी/ग्रेड (प्रतिशत में) खनिजों और या चट्टानों (जिसमें यह पाया जाता है) में लिथियम की सांद्रता का माप है।
      • इसलिये श्रेणी जितनी उच्च होगी, आर्थिक व्यवहार्यता उतनी ही अधिक होगी। लिथियम जैसी धातुओं के लिये उच्च ग्रेड बहुत दुर्लभ हैं।
  • अनुप्रयोग:
    • विशेष काँच और चीनी मिट्टी की वस्तुएंँ:
      • लिथियम डिसिलिकेट (Li2Si2O5) एक रासायनिक यौगिक है जिससे काँच और चीनी मिट्टी की वस्तुएँ बनती हैं।
      • इसकी मज़बूती, यांत्रिकता और अर्द्ध-पारदर्शिताा के कारण इसे व्यापक रूप से दंत सिरेमिक के रूप में उपयोग किया जाता है।
    • मिश्र धातु बनाना:
      • लिथियम धातु का प्रयोग उपयोगी मिश्र धातुओं को बनाने के लिये किया जाता है
        • उदाहरणतः मोटर इंजन के 'व्हाइट मेटल' बियरिंग बनाने के लिये लेड के साथ, एयरक्राफ्ट के पुर्जे बनाने के लिये एल्युमीनियम के साथ और आर्मर प्लेट बनाने के लिये मैग्नीशियम के साथ।
    • रिचार्जेबल बैटरी:
      • लिथियम का उपयोग मोबाइल फोन, लैपटॉप, डिजिटल कैमरा और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिये रिचार्जेबल बैटरी में किया जाता है। लिथियम का उपयोग कुछ गैर-रिचार्जेबल बैटरियों में हृदय पेसमेकर, खिलौने और घड़ियों जैसी चीज़ों के लिये भी किया जाता है। बैटरी के विभिन्न प्रकार हैं:
        • लिथियम-कोबाल्ट ऑक्साइड बैटरी: इसका उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है और इसे इलेक्ट्रिक वाहनों में लगाया जा रहा है। यह अपेक्षाकृत सस्ती है।
        • लिथियम-निकल-मैंगनीज़-कोबाल्ट: यह बैटरी रसायन विज्ञान की एक नई, उच्च प्रदर्शन करने वाली श्रेणी है। यह मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वाहन बाज़ार के लिये विकसित की गई है, लेकिन इसकी बढ़ती लागत प्रभावशीलता के कारण इसका व्यापक उपयोग हो रहा है।
        • लिथियम आयरन फॉस्फेट: यह अपेक्षाकृत उच्च प्रदर्शन के साथ सबसे सुरक्षित तकनीक है लेकिन अपेक्षाकृत महंगी है। यह चीन में बहुत लोकप्रिय है।
        • लिथियम-निकल-कोबाल्ट-एल्युमीनियम ऑक्साइड: इसे कोबाल्ट की खपत को कम करने के लिये विकसित किया गया है और इसे एक ठोस प्रदर्शनकर्त्ता व उचित लागत के लिये जाना जाता है। यह चीन के बाहर भी लोकप्रिय हो रही है।
  • अत्यधिक मांग:
    • स्वच्छ ऊर्जा के प्रति बढ़ते रुझान के कारण लिथियम की मांग आसमान काफी बढ़ गई है क्योंकि अधिकांश देश जीवाश्म ईंधन को समाप्त करने और शून्य उत्सर्जन वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर स्विच करने की योजना बना रहे हैं।
      • वैश्विक स्तर पर लिथियम का उत्पादन वर्ष 2010 के 28,100 मीट्रिक टन से बढ़कर वर्ष 2019 में 86,000 मीट्रिक टन हो गया है। चुनौती बाज़ार में पर्याप्त लिथियम की आपूर्ति करने की होगी।
  • भारत में लिथियम:
    • परमाणु खनिज निदेशालय (भारत के परमाणु ऊर्जा आयोग के तहत) के शोधकर्त्ताओं ने हालिया सर्वेक्षणों से दक्षिणी कर्नाटक के मांड्या ज़िले में भूमि के एक छोटे से हिस्से में 14,100 टन के लिथियम भंडार की उपस्थिति का अनुमान लगाया है।
      • साथ ही भारत की पहली लीथियम भंडार साइट भी मिली।

लिथियम के आयात को कम करने हेतु भारत द्वारा उठाए गए कदम:

  • भारत ने आयातित लिथियम पर अपनी निर्भरता को कम करने और स्थानीय इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के उद्योग के विकास को गति देने के लिये एक मल्टी-मोडल रणनीति (Multi-Modal strategy) अपनाई है।
  • राज्य द्वारा संचालित खनिज बिदेश इंडिया लिमिटेड (Khanij Bidesh India Ltd- KABIL) विदेशों में लिथियम और कोबाल्ट खदानों के अधिग्रहण के लिये अर्जेंटीना, चिली, ऑस्ट्रेलिया एवं बोलीविया मेंं प्रशासन के साथ मिलकर कार्य कर रही है।
  • इन देशों में लिथियम के समृद्ध भंडार हैं।
  • भारत द्वारा शहरी खनन (Urban Mining) पर भी कार्य किया जा रहा है जहांँ पुनर्नवीनीकरण सामग्री का उपयोग किया जाता है, इससे ताज़ा लिथियम इनपुट पर निर्भरता कम होगी तथा आयात में और कमी आएगी।

विगत वर्षों के प्रश्न:

प्रश्न. निम्नलिखित में से धातुओं का कौन-सा युग्म क्रमशः सबसे हल्की और सबसे भारी धातु का वर्णन करता है? (2008)

(a) लिथियम और पारा
(b) लिथियम और ऑस्मियम
(c) एल्युमीनियम और ऑस्मियम
(d) एल्युमीनियम और पारा

उत्तर: (b)

  • हल्की धातुएँ कम परमाणु भार वाली धातुएँ होती हैं, जबकि भारी तत्त्वों का आमतौर पर उच्च परमाणु भार होता है।
  • ऑस्मियम एक कठोर धत्त्विक तत्त्व है जिसमें सभी ज्ञात तत्त्वों का घनत्व सबसे अधिक होता है। ऑस्मियम का परमाणु भार 190.2 u है और इसका परमाणु क्रमांक 76 है।
  • लिथियम का परमाणु क्रमांक 3 और परमाणु भार 6.941u सबसे हल्का ज्ञात धातु है।
  • अतः विकल्प (b) सही उत्तर है।

स्रोत: डाउन टू अर्थ

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