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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत द्वारा श्रीलंका की मदद

  • 07 Jan 2021
  • 8 min read

चर्चा में क्यों?

भारत द्वारा वित्तपोषित एक निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा श्रीलंका में कोविड-19 के खिलाफ महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

Sri-Lanka

प्रमुख बिंदु:

पृष्ठभूमि:

  • भारत ने सुवा सेरिया (अच्छे स्वास्थ्य के लिये वाहन या यात्रा) सेवा के लिये 7.56 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान प्रदान किया है। सुवा सेरिया की शुरुआत वर्ष 2016 में पायलट आधार पर  की गई थी तथा बाद में भारत से प्राप्त अतिरिक्त अनुदान के साथ इसका विस्तार पूरे देश में किया गया।
  •  श्रीलंका के क्षमता निर्माण में भी भारत ने मदद की है।
    • क्षमता निर्माण के तहत श्रीलंका के आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियनों हेतु प्रशिक्षण एवं पुनश्चर्या कार्यक्रमों (Training and Refresher Programmes) की व्यवस्था की गई जिसने आगे चलकर स्थानीय आबादी के लिये रोज़गार का सृजन किया।
  • लगभग 400 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान के साथ 60,000 से अधिक घरों की आवासीय परियोजना के बाद यह श्रीलंका के लिये भारत की दूसरी सबसे बड़ी अनुदान परियोजना है।

भारत-श्रीलंका संबंध:

श्रीलंका का भू राजनीतिक महत्त्व:

  • हिंद महासागर क्षेत्र में श्रीलंका की स्थिति कई प्रमुख शक्तियों के लिये रणनीतिक भू- राजनीतिक प्रासंगिकता की रही है।
    • चीन ग्वादर (पाकिस्तान), चटगाँव (बांग्लादेश), क्युक फलू (म्याँमार) और हम्बनटोटा (श्रीलंका) में हिंद महासागर के साथ-साथ तथा इसके दक्षिण में आधुनिक बंदरगाहों का निर्माण कर रहा है। इस प्रकार चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स की रणनीति श्रीलंका के लिये महत्त्वपूर्ण है।
      • चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (String of Pearls) की रणनीति का उद्देश्य हिंद महासागर में प्रभुत्व स्थापित करने के लिये भारत को घेरना है।
    • श्रीलंका में सामरिक दृष्टि से कई महत्त्वपूर्ण बंदरगाह स्थित हैं।

राजनीतिक संबंध:

  • भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने कोविड-19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित श्रीलंका में  विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और देश की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के लिये उसे 400 मिलियन डॉलर की मुद्रा विनिमय सुविधा प्रदान करने हेतु एक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं।
    • नियमित अंतराल पर दोनों देशों के नेताओं की यात्राओं के चलते दोनों देशों के बीच राजनैतिक संबंध मज़बूत हुए हैं।
    • भारत और श्रीलंका सार्क (SAARC) और बिम्सटेक (BIMSTEC) के सदस्य हैं और सार्क देशों में भारत का व्यापार श्रीलंका के साथ सबसे अधिक है। 
    • दोनों देशों की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मित्र शक्ति’ (Mitra Shakti) और संयुक्त नौसैनिक अभ्यास ‘स्लिनेक्स’ (SLINEX) का आयोजन किया जाता है।

वाणिज्यिक संबंध 

  • सार्क (SAARC) देशों के बीच श्रीलंका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। साथ ही भारत विश्व स्तर पर श्रीलंका का सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है।
  • वर्ष 2015-17 के बीच श्रीलंका में भारत का निर्यात तकरीबन 5.3 बिलियन डॉलर का था, जबकि श्रीलंका से भारत का आयात लगभग 743 मिलियन डॉलर का था।
  • मार्च 2000 में लागू हुए भारत-श्रीलंका मुक्त व्यापार समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार में काफी तेज़ी से बढ़ोतरी देखने को मिली है।

सांस्कृतिक और शैक्षिक संबंध

  • कोलंबो में स्थित भारतीय सांस्कृतिक केंद्र सक्रिय रूप से भारतीय संगीत, नृत्य, हिंदी और योग की कक्षाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति के बारे में जागरूकता बढ़ाता है। प्रतिवर्ष दोनों देशों के सांस्कृतिक समूहों द्वारा एक-दूसरे के देश में यात्राएँ की जाती हैं।
  • इसके अलावा दिसंबर 1998 में एक अंतर-सरकारी पहल के रूप में भारत-श्रीलंका फाउंडेशन की स्थापना की गई थी जिसका उद्देश्य दोनों देशों के नागरिकों के मध्य वैज्ञानिक, तकनीकी, शैक्षिक और सांस्कृतिक सहयोग तथा दोनों देशों की युवा पीढ़ी के बीच संपर्क को बढ़ाना है।
  • भारतीय मूल के कई लोग जिसमें सिंधी, बोराह, गुजराती, मेमन, पारसी, मलयाली और तेलुगू भाषी व्यक्ति शामिल हैं, अधिकांशतः विभाजन के बाद श्रीलंका में ही बस गए और वहाँ विभिन्न व्यापारिक क्षेत्रों में कार्यरत हैं।
  • अप्रैल 2019 में भारत और श्रीलंका ने ड्रग तथा मानव तस्करी का मुकाबला करने के लिये समझौता किया।

विवाद और संघर्ष 

चीन की चुनौती

  • श्रीलंका ने रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण हंबनटोटा बंदरगाह को 99 वर्ष की लीज़ पर चीन को सौंप दिया है। अनुमान के मुताबिक, श्रीलंका का यह बंदरगाह चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) में महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।
  • चीन ने श्रीलंका को हथियारों की आपूर्ति के साथ-साथ उसके आर्थिक और सामाजिक विकास के लिये भारी ऋण भी प्रदान किया है।
  • दोनों देशों ने सिविल परमाणु सहयोग समझौते पर भी हस्ताक्षर किये हैं, जो किसी भी देश के साथ श्रीलंका की पहली परमाणु साझेदारी है।

मछुआरों का मुद्दा

  • दोनों देशों के क्षेत्रीय जल, विशेष रूप से पाक जलडमरूमध्य और मन्नार की खाड़ी में निकटता को देखते हुए मछुआरों के भटकने की घटनाएँ काफी आम हैं।
  • अक्सर खाली हाथ लौटने के बजाय मछुआरे अपनी जान जोखिम डालकर श्रीलंका के क्षेत्र में चले जाते हैं, इसके कारण श्रीलंकाई नौसेना द्वारा या तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है या उनके जाल को नष्ट कर दिया जाता है।
  • ज्ञात हो कि मछुआरों के मुद्दे का स्थायी हल खोजने के लिये हाल ही में मत्स्य पालन पर भारत-श्रीलंका संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group- JWG) की चौथी बैठक वर्चुअल माध्यम में आयोजित की गई, जिसमें भारत की ओर से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा श्रीलंका की ओर से मत्स्य एवं जलीय संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा हिस्सा लिया गया। 

स्रोत: द हिंदू

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