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ई-सिगरेट को प्रतिबंधित करने के लिये कानून की मांग

  • 11 Apr 2019
  • 6 min read

चर्चा में क्यों?

वाणिज्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय से देश में ई-सिगरेट के विनिर्माण और बिक्री पर प्रतिबंध लगाने हेतु एक कानून बनाने के लिये कहा है क्योंकि देश में ऐसे कानून की अनुपस्थिति में इसके आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना संभव नहीं होगा।

प्रमुख बिंदु

  • गौरतलब है कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने वाणिज्य मंत्रालय को इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) के आयात पर प्रतिबंध लगाने हेतु एक अधिसूचना जारी करने को कहा था, जिसमें ई-सिगरेट के साथ ही फ्लेवर्ड हुक्का पर प्रतिबंध लगाना भी शामिल हैं।
  • वैधानिक तरीके से देश में इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम (ENDS) की बिक्री और विनिर्माण पर प्रतिबंध लगाए बिना, आयात पर प्रतिबंध लगाना वैश्विक व्यापार मानदंडों का उल्लंघन होगा जिससे बचने हेतु वाणिज्य मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय से कानून बनाने के लिये कहा है।

पृष्ठभूमि

  • अगस्त 2018 में स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों (UT) को इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम के विनिर्माण, बिक्री और आयात को रोकने के लिये एक एडवाइज़री जारी की थी, क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने ‘देश में ई-सिगरेट के उभरते नए खतरे से निपटने’ में देरी करने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की थी।
  • केंद्रीय ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइज़ेशन ने राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में सभी ड्रग्स कंट्रोलर्स को अपने अधिकार क्षेत्र में ई-सिगरेट और फ्लेवर्ड हुक्का सहित इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम के विनिर्माण, बिक्री, आयात और विज्ञापन की अनुमति नहीं देने का निर्देश दिया था।
  • इस साल अप्रैल में 24 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों के 1,000 से अधिक डॉक्टरों ने भारत में इसके महामारी (खासकर युवाओं में) बनने से पहले प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया था।
  • अगस्त 2018 में जनता के लिये अपनी सामान्य सलाह में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि वैश्विक तंबाकू महामारी 2017 पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, मॉरीशस, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, कोरिया (डेमोक्रेटिक पीपुल्स रिपब्लिक), श्रीलंका, थाईलैंड, ब्राज़ील, मेक्सिको, उरुग्वे, बहरीन, ईरान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे 30 देशों की सरकारों ने पहले ही ENDS पर प्रतिबंध लगा दिया है।

क्या है ई-सिगरेट?

  • ई-सिगरेट या इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम (ENDS) एक बैटरी संचालित डिवाइस है, जो तरल निकोटीन, प्रोपलीन, ग्लाइकॉल, पानी, ग्लिसरीन के मिश्रण को गर्म करके एक एयरोसोल बनाता है, जो एक असली सिगरेट जैसा अनुभव देता है।
  • यह डिवाइस पहली बार 2004 में चीनी बाज़ारों में "तंबाकू के स्वस्थ विकल्प" के रूप में बेची गई थी। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, 2005 से ही ई-सिगरेट उद्योग एक वैश्विक व्यवसाय बन चुका है और आज इसका बाज़ार लगभग 3 अरब डॉलर का हो गया है।
  • ई-सिगरेट ने अधिक लोगों को धूम्रपान शुरू करने के लिये प्रेरित किया है, क्योंकि इसका प्रचार-प्रसार ‘हानिरहित उत्पाद’ के रूप में किया जा रहा है। किशोरों के लिये ई-सिगरेट धूम्रपान शुरू करने का एक प्रमुख साधन बन गया है।
  • भारत में 30-50% ई-सिगरेट्स ऑनलाइन बिकती हैं और चीन इसका सबसे बड़ा आपूर्तिकर्त्ता देश है। भारत में ई-सिगरेट की बिक्री को अभी तक उचित तरीके से विनियमित नहीं किया गया है। यही कारण है कि इसे बच्चे और किशोर इसे आसानी से ऑनलाइन खरीद सकते हैं।
  • पंजाब राज्य ने ई-सिगरेट को अवैध घोषित किया है। राज्य का कहना है कि इसमें तरल निकोटीन का प्रयोग किया जाता है, जो वर्तमान में भारत में अपंजीकृत ड्रग के रूप में वर्गीकृत है।
  • इसके चलते पंजाब सरकार ने ई-सिगरेट के विक्रेताओं के खिलाफ मामले भी दर्ज़ किये हैं।
  • अप्रैल 2016 में पंजाब की सत्र अदालत ने मोहाली के विक्रेता को अवैध ड्रग बेचने के ज़ुर्म में तीन साल की सज़ा सुनाई थी।
  • यह भारत में अपनी तरह का पहला मामला था। स्वास्थ्य पर प्रभाव के कई अध्ययनों से पता चला है कि ई-सिगरेट बच्चों, किशोरों और गर्भवती महिलाओं के लिये बहुत हानिकारक है।
  • रिपोर्ट में पाया गया कि ई-सिगरेट पीने वाले लोगों में श्वसन और जठरांत्र संबंधी रोग पाए गए।

स्रोत- बिज़नेसलाइन

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