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हानिकारक और अन्य अपशिष्ट नियम, 2016 संशोधन

  • 08 Mar 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना के ज़रिये हानिकारक और अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन एवं निपटान) नियम, 2016 में संशोधन किया है। गौरतलब है कि इस संशोधन का उद्देश्य देश के अपशिष्ट प्रबंधन और निपटान को मज़बूती प्रदान करना है।

प्रमुख बिंदु

  • निम्नलिखित पहलुओं को ध्यान में रखते हुए यह संशोधन किया गया है-

♦ नियमों के तहत प्रक्रियाओं को सरल बनाने के साथ-साथ सतत् विकास के सिद्धांतों को कायम रखना।
♦ पर्यावरण पर न्यूनतम प्रभाव को सुनिश्चित करते हुए, ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ और ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बढ़ावा देना।

  • संशोधन की प्रमुख विशेषताएँ:

विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) और निर्यातौन्मुख इकाइयों (EOU) द्वारा ठोस प्लास्टिक अपशिष्ट के आयात पर प्रतिबंध।
♦ रेशम अपशिष्ट के निर्यातकों को अब पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से अनुमति लेने से छूट दी गई है।
♦ इसके साथ ही सतत् विकास के सिद्धांतों को बरकरार रखा गया है और यह भी ध्यान रखा गया है कि पर्यावरण पर न्यूनतम असर हो।
♦ भारत में निर्मित इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को निर्यात के एक वर्ष के अंदर किसी खराबी की स्थिति में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की अनुमति के बगैर वापस लाया जा सकता है।
♦ जिन उद्योगों को जल (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और वायु (प्रदूषण रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के तहत अनुमति की आवश्यकता नहीं है, उन्हें अब हानिकारक और अन्य अपशिष्ट (प्रबंधन एवं निपटान) नियम, 2016 के नियमों के तहत भी किसी प्राधिकरण की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, बशर्ते कि ऐसे उद्योगों द्वारा उत्पन्न हानिकारक और अन्य अपशिष्ट अधिकृत उपयोगकर्त्ताओं, अपशिष्ट संग्राहकों या निपटान करने वालों को सौंप दिये जाते हों।

स्रोत- पीआईबी

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