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गुजरात अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मध्यस्थता केंद्र

  • 25 Jun 2021
  • 5 min read

प्रिलिम्स के लिये

गुजरात अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मध्यस्थता केंद्र, ‘गिफ्ट’ सिटी, गुजरात मैरीटाइम क्लस्टर

मेन्स के लिये

मध्यस्थता केंद्र की स्थापना का महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में गुजरात की ‘गिफ्ट’ सिटी (गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी) में ‘गुजरात मैरीटाइम यूनिवर्सिटी’ और ‘इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेंटर अथॉरिटी’ के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किये गए हैं।

  • इस MoU का उद्देश्य संयुक्त रूप से ‘गुजरात अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मध्यस्थता केंद्र’ (GIMAC) की स्थापना का समर्थन करना है।

प्रमुख बिंदु

‘गुजरात अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मध्यस्थता केंद्र’ के विषय में

  • यह देश में अपनी तरह का पहला केंद्र होगा, जो समुद्री और शिपिंग क्षेत्र से संबंधित विवादों में मध्यस्थता की कार्यवाही का प्रबंधन करेगा।
  • यह मध्यस्थता केंद्र एक समुद्री क्लस्टर का हिस्सा होगा, जिसे गांधीनगर स्थित ‘गुजरात मैरीटाइम बोर्ड’ (GMB) द्वारा गिफ्ट सिटी में स्थापित किया जा रहा है।

आवश्यकता

  • मध्यस्थता पर भारत का फोकस: हाल ही में सरकार द्वारा मध्यस्थता एवं सुलह (संशोधन) अधिनियम, 2021 को अधिसूचित किया गया है, जिसे भारत को अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता केंद्र बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
    • मध्यस्थता एक प्रकार की विवाद समाधान पद्धति है, जहाँ दो या दो से अधिक पक्षों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों को राज्य के कानूनी निकायों के बजाय उनके द्वारा नियुक्त मध्यस्थों द्वारा हल किया जाता है।
  • भारत में वर्तमान में 35 से अधिक मध्यस्थता संस्थान हैं, हालाँकि इसमें से कोई भी विशेष तौर पर समुद्री क्षेत्र से संबंधित विवादों पर ध्यान केंद्रित नहीं करता है।
    • गुजरात मैरीटाइम क्लस्टर परियोजना के कार्यान्वयन के साथ राज्य में समुद्री गतिविधियों का तेज़ी से विस्तार हो रहा है और राज्य वैश्विक समुद्री केंद्र बनने के करीब पहुँच गया है, ऐसे में समुद्री विवादों में मध्यस्थता सेवाओं के लिये एक विशेष सुविधा स्थापित करना काफी महत्त्वपूर्ण हो गया है।
  • इसका उद्देश्य समुद्री और शिपिंग विवादों पर केंद्रित एक विश्व स्तरीय मध्यस्थता केंद्र स्थापित करना है, जो भारत में परिचालन वाली संस्थाओं के बीच वाणिज्यिक और वित्तीय संघर्षों को हल करने में मदद कर सके।
    • अब तक भारतीय पक्षों से जुड़े मध्यस्थता मामलों की सुनवाई सिंगापुर मध्यस्थता केंद्र में की जाती रही है।
    • वैश्विक स्तर पर लंदन को समुद्री एवं शिपिंग क्षेत्र के लिये मध्यस्थता का महत्त्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।

लाभ

  • तीव्र विवाद समाधान की सुविधा।
  • अंतर्राष्ट्रीय समुद्री समुदाय के बीच ‘गिफ्ट स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) के आकर्षण में बढ़ोतरी।
  • ‘ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस’ में सुधार 
  • न्यायालयों के कार्यभार में कमी

गुजरात मैरीटाइम क्लस्टर

  • इसकी परिकल्पना बंदरगाहों, समुद्री नौवहन और रसद सेवा प्रदाताओं के एक समर्पित पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में की गई है।
  • यह गिफ्ट सिटी, गांधीनगर, जो कि भारत का पहला अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र (IFSCA) है, में प्रासंगिक सरकारी नियामक एजेंसियों के साथ समुद्री, शिपिंग उद्योग कंपनियों और सेवा प्रदाताओं की एक शृंखला की मेज़बानी करेगा।
    • अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) भारत में वित्तीय उत्पादों, वित्तीय सेवाओं और वित्तीय संस्थानों के विकास एवं विनियमन हेतु एक एकीकृत प्राधिकरण है।
  • यह क्षेत्र में आर्थिक विकास, रोज़गार सृजन और उद्योग-शैक्षणिक समन्वय के साथ सभी समुद्री सेवाओं के लिये एक ‘वन-स्टॉप सल्यूशन’ होगा।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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