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फेक न्यूज़ को रोकने हेतु दिशा-निर्देश

  • 14 May 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट

मेन्स के लिये:

फेक न्यूज़ से उत्पन्न समस्याओं से संबंधित मुद्दे 

चर्चा में क्यों?

‘पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो’ (Bureau of Police Research and Development-BPRD) ने फेक न्यूज़ और वीडियो की पहचान करने के लिये कानून प्रवर्तन एजेंसियों की सहायता हेतु दिशा-निर्देश जारी किया है।

प्रमुख बिंदु:

  • उल्लेखनीय है कि डिजिटल युग में ‘फेक न्यूज़ या यलो जर्नलिज़्म’ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। फेक न्यूज़ किसी एजेंसी, इकाई या व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने और आर्थिक या राजनीतिक रूप से लाभ पाने के उद्देश्य से प्रकाशित किये जाते हैं।
  • फेक न्यूज़ का उपयोग अक्सर सनसनीखेज, गलत या स्पष्ट रूप से मनगढ़ंत सुर्खियों का उपयोग पाठकों की संख्या बढ़ाने के लिये भी किया जाता है।
  • गौरतलब है कि महामारी के मद्देनज़र, फेक न्यूज़ और वीडियो ने लोगों में दहशत फैलाने के साथ ही घृणा और सांप्रदायिक हिंसा को भी बढ़ावा दिया है।
  • साइबर अपराधियों ने फेक यूआरल (Fake URL) का उपयोग कर उन लोगों को गुमराह करने की कोशिश की है जो PM-CARES फंड में दान करना चाहते थे।

प्रमुख दिशा-निर्देश 

  • जाँच अधिकारियों को ऐसी वेबसाइट और लिंक से सतर्क रहना चाहिये जिनमें वर्तनी की गलतियाँ हों तथा किसी व्यक्ति द्वारा भेजी गई लिंक वास्तविक सामग्री से मेल न खाती हो।
  • वायरल फोटो, ऑडियो रिकॉर्डिंग और वीडियो को तुरंत संज्ञान में लेना चाहिये। 
  • न्यूज़ को सत्यापित करने हेतु विभिन्न विश्वसनीय समाचार स्रोतों का अवलोकन करना चाहिये। यदि विभिन्न समाचार पत्रों में एक ही घटना प्रकाशित की गई हो तो उसके सत्य होने की संभावना अत्यधिक होती है।
  • किसी भी समाचार की सत्यता हेतु लेखक की भी पहचान की जानी चाहिये।
  • इन दिशा-निर्देशों में अधिकारियों को कुछ वेबसाइटों की सूची भी प्रदान की गई है जो तथ्य/जाँच में मददगार साबित हो सकती हैं।

क्या है इंटरनेट मीडिया:

  • आज का दौर ‘ इंटरनेट मीडिया’ का है। बिल जमा करने, नौकरी-परीक्षा के फॉर्म भरने-जमा करने, फोन करने, पढ़ने व खरीदारी आदि के लिये लम्बी लाइनों में लगने की बात अब बीते दौर की बात हो गई है। लोग अब लाइन में खड़े होने के बजाय ऑनलाइन होना ज़्यादा पसंद करते हैं, जो कि सही भी है।
  • इंसान अपनी प्रकृति में ही जिज्ञासु होता है, अपने पास-पड़ोस और देश-दुनिया के बारे में जानना उसकी प्रवृत्ति होती है, और आज जब इंटरनेट फ्री अथवा एकदम सस्ता उपलब्ध है, ऐसे में इंटरनेट मीडिया का उदय होना निश्चित था।

इंटरनेट मीडिया के खतरे:

  • पहले जब व्यक्ति न्यूज़ पढ़ने के लिये समाचार-पत्रों पर निर्भर था तो वह वैसी ख़बरों से रूबरू होता था जो कई माध्यमों से छनकर उस तक पहुँचती थी लेकिन अब ‘रियल टाइम खबरों’ का दौर है जहाँ कोई भी फेक न्यूज़ लाखों लोगों द्वारा शेयर की जाती है, ट्विट और रि-ट्विट की जाती, कभी-कभी तो किसी का विचार, किसी का निजी प्रोपगेंडा भी सत्य मान लिया जाता है।

पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो

(Bureau of Police Research and Development- BPRD):

  • पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो की स्थापना गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs) के तहत 28 अगस्त, 1970 को भारत सरकार द्वारा की गई थी।
  • इसने पुलिस के आधुनिकीकरण के प्राथमिक उद्देश्य के साथ पुलिस अनुसंधान और सलाहकार परिषद (Police Research and Advisory Council) को प्रतिस्थापित किया था।
  • वर्ष 2008 में भारत सरकार ने देश में पुलिस बलों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने के उद्देश्य से BPRD के तहत राष्ट्रीय पुलिस मिशन (National Police Mission) के सृजन का निर्णय लिया था।

आगे की राह:

  • फेक न्यूज़ के मामले अक्सर सामने आते रहे हैं जो राष्ट्र की एकता व अखंडता को बाधित करते हैं तथा सांप्रदायिक दंगों आदि को प्रेरित करते हैं। इसलिये फेक न्यूज़ या गलत सूचना हेतु लोगों को जागरूक किया जाना चाहिये ताकि लोग प्रसारित हो रही सूचनाओं के मूल तथ्यों व इनके पीछे की मंशा को समझने में सक्षम हों।

स्रोत: द हिंदू

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