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वैश्विक सतत् विकास रिपोर्ट, 2022

  • 10 Jun 2022
  • 12 min read

प्रिलिम्स के लिये:

वैश्विक सतत् विकास रिपोर्ट, 2022, TERI, एसडीजी। 

मेन्स के लिये:

पर्यावरण प्रदूषण और गिरावट, भारत के सतत् विकास लक्ष्य और इसकी उपलब्धियांँ। 

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में वैश्विक सतत् विकास रिपोर्ट, 2022 जारी की गई। 

सतत् विकास रिपोर्ट: 

  • परिचय: 
    • यह सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में देशों की प्रगति का एक वैश्विक मूल्यांकन है। 
    • यह सतत् विकास समाधान नेटवर्क (SDSN) में स्वतंत्र विशेषज्ञों के एक समूह द्वारा प्रकाशित की गई है।  
      • सतत् विकास के क्षेत्र में व्यावहारिक समस्याओं के समाधान को बढ़ावा देने और सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को लागू करने के लिये वैश्विक स्तर पर वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञता जुटाने के लिये SDSN द्वारा इसे वर्ष 2012 में शुरू किया गया था। 
      • इसे अपनाने के बाद SDSN अब राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर SDG के कार्यान्वयन का समर्थन करने के लिये प्रतिबद्ध है। 
  • रैंकिंग: 
    • देशों के समग्र स्कोर के आधार पर उन्हें रैंक प्रदान की जाती है। 
    • समग्र स्कोर सभी 17 सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने की दिशा में कुल प्रगति को मापता है। 
    • स्कोर की व्याख्या SDG उपलब्धि के प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जाती है। 
    • 100 का स्कोर इंगित करता है कि सभी सतत् विकास लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया गया है। 
  • देशों का प्रदर्शन: 
    • SDG इंडेक्स, 2022 में फिनलैंड सबसे ऊपर है, इसके बाद क्रमशः तीन नॉर्डिक देश-डेनमार्क, स्वीडन और नॉर्वे हैं। 
    • पूर्व और दक्षिण एशिया क्षेत्र ने वर्ष 2015 में SDG को अपनाने के बाद से सबसे अधिक प्रगति की है। 
    • बांग्लादेश और कंबोडिया दो ऐसे देश हैं जिन्होंने वर्ष 2015 के बाद से SDG पर सबसे अधिक प्रगति की है। 
    • इसके विपरीत वेनेज़ुएला ने वर्ष 2015 में इसे अपनाए जाने के बाद से SDG इंडेक्स में सबसे ज़्यादा गिरावट दर्ज की है। 

रिपोर्ट की मुख्य विशेषताएंँ:  

  • विश्व: 
    • स्वास्थ्य संबंधी विविधतापूर्ण एवं शमानात्मक उपचारों में कम, जलवायु, जैवविविधता, भू-राजनीतिक और सैन्य-संकट विश्व स्तर पर सतत् विकास के लिये प्रमुख अवरोध हैं। 
    • SDG इंडेक्स के विश्व औसत में वर्ष 2021 में लगातार दूसरे वर्ष गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण SDG-1 (कोई गरीब नहीं) और SDG-8 (सभ्य कार्य एवं आर्थिक विकास) पर महामारी का प्रभाव तथा SDG11-15 (जलवायु जैवविविधता व सतत् शहरी विकास लक्ष्य) का खराब प्रदर्शन है। 
    • भारी मानवीय क्षति के अलावा सैन्य संघर्ष, यूक्रेन में युद्ध सहित अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खाद्य सुरक्षा संकट और ऊर्जा की कमी आदि जलवायु और जैवविविधता संकट के कारण बढ़ रहे हैं। 
  • भारत : 
    • भारत की तैयारी में कमी: 
    • प्रमुख चुनौतियांँ: 
      • भारत को 17 SDG में से 11 लक्ष्यों को हासिल करने में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके कारण SDG तैयारियों पर वैश्विक रैंकिंग में गिरावट देखी जा रही है। 
      • उत्कृष्ट कार्य सुनिश्चित करना (SDG 8) अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। 
      • रिपोर्ट के अनुसार, भारत जलवायु कार्रवाई पर SDG 13 को हासिल करने की राह पर है। 
        • हालांँकि स्टेट ऑफ इंडियाज़ एन्वायरनमेंट रिपोर्ट, 2022 ने संकेत दिया है कि देश इस क्षेत्र में बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। 
        • जलवायु कार्रवाई पर भारत के प्रदर्शन (SDG 13) में वर्ष 2019-2020 की तुलना में गिरावट आई है। 
        • भारत के समग्र प्रदर्शन में यह गिरावट मुख्य रूप से आठ राज्यों- बिहार, तेलंगाना, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब और झारखंड के कारण है, जिनके स्कोर में SDG 13 के तहत दो वर्षों से गिरावट देखी जा रही है। 
  • प्रगति: 
    • इनमें से लगभग 10 लक्ष्यों में प्रगति वर्ष 2021 के समान है। 
      • इनमें भुखमरी समाप्त करना- SDG 2, स्वास्थ्य सुनिश्चित करना- SDG-3 और शुद्ध जल एवं स्वच्छता- SDG 6 शामिल हैं। 

सिफारिशें: 

  • नई साझेदारी और नवाचारों को बढ़ावा: 
    • वैज्ञानिक सहयोग और डेटा सहित कोविड-19 महामारी के दौरान उभरी नई साझेदारी और नवाचारों को एसडीजी का समर्थन करने के लिये बढ़ाया जाना चाहिये। 
  • विज्ञान और तकनीकी नवाचार: 
    • विज्ञान, तकनीकी नवाचार और डेटा सिस्टम संकट के समय समाधानों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं तथा वर्तमान समय की प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने के लिये निर्णायक योगदान कर सकते हैं। 
    • ये सांख्यिकीय क्षमताओं, अनुसंधान एवं विकास और शिक्षा व कौशल में दीर्घकालिक निवेश पर बल देते हैं। 
  • निवेश में वृद्धि: 
    • SDG लक्ष्य हासिल करना मूल रूप से भौतिक बुनियादी ढांँचे (नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकियों सहित) और मानव पूंजी (स्वास्थ्य, शिक्षा सहित) में निवेश हेतु एक एजेंडा है। 
      • अब भी दुनिया के सबसे गरीब आधी जनसंख्या के पास स्वीकार्य शर्तों पर पूंजी तक बाज़ार पहुंँच नहीं है। 
      • गरीब और कमज़ोर देशों को इन संकटों के कारण बहुत नुकसान हुआ है। 

सतत् विकास लक्ष्य (SDG): 

  • सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) को वैश्विक लक्ष्यों के रूप में भी जाना जाता है, वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा गरीबी को समाप्त करने, ग्रह की रक्षा करने और वर्ष 2030 तक सभी की शांति और समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिये इसे एक सार्वभौमिक आह्वान के रूप में अपनाया गया था। 
  • 17 SGDs एकीकृत हैं- इन लक्ष्यों के अंतर्गत एक क्षेत्र में की गई कार्रवाई दूसरे क्षेत्र के परिणामों को प्रभावित करेगी और इनके अंतर्गत सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय रूप से स्थिर/वहनीय विकास होगा। 
  • यह पिछड़े देशों को विकास क्रम में प्राथमिकता प्रदान करता है। SDGs को गरीबी, भुखमरी, एड्स और महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को समाप्त करने के लिये बनाया गया है।

SDG

विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रश्न. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिये: (2016) 

  1. सतत् विकास लक्ष्यों को पहली बार वर्ष 1972 में 'क्लब ऑफ रोम' नामक एक वैश्विक थिंक टैंक द्वारा प्रस्तावित किया गया था। 
  2. सतत् विकास लक्ष्यों को वर्ष 2030 तक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं? 

(a) केवल 1 
(b) केवल 2 
(c) 1 और 2 दोनों 
(d) न तो 1 और न ही 2 

उत्तर: B 

व्याख्या: 

  • 17 सतत् विकास लक्ष्यों (SDG) को वैश्विक लक्ष्यों के रूप में भी जाना जाता है, वर्ष 2015 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा गरीबी को समाप्त करने, ग्रह की रक्षा करने और वर्ष 2030 तक सभी की शांति और समृद्धि को सुनिश्चित करने के लिये इसे एक सार्वभौमिक आह्वान के रूप में अपनाया गया था। 
  • ये सहस्राब्दी विकास लक्ष्यों की सफलता के आधार पर बनाए गए हैं, जिसमें जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असमानता, नवाचार, स्थायी उपभोग, शांति और न्याय जैसे नए क्षेत्रों सहित अन्य प्राथमिकताएँ शामिल हैं।  
  • 17 SGDs परस्पर एकीकृत हैं- इन लक्ष्यों के अंतर्गत एक क्षेत्र में की गई कार्रवाई दूसरे क्षेत्र के परिणामों को भी प्रभावित करेगी। 
  • SGDs की अवधारणा का जन्म वर्ष 2012 में रियो डी जनेरियो में सतत् विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में हुआ था। क्लब ऑफ रोम ने पहली बार वर्ष 1968 में अधिक व्यवस्थित तरीके से संसाधन संरक्षण की वकालत की थी। अतः कथन 1 सही नहीं है। 
  • सतत् विकास लक्ष्यों को वर्ष 2030 तक प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। अत: कथन 2 सही है। 

स्रोत: डाउन टू अर्थ 

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