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युवाओं हेतु वैश्विक रोज़गार रुझान: ILO

  • 13 Aug 2022
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), नीली अर्थव्यवस्था, जेंडर गैप, वेस्ट मैनेजमेंट, वेज गैप, लर्निंग रिग्रेशन।

मेन्स के लिये:

भारत से संबंधित युवाओं के लिये वैश्विक रोजगार रुझानों के निष्कर्ष।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने "युवाओं हेतु वैश्विक रोज़गार रुझान 2022: युवाओं के भविष्य परिवर्तन में निवेश" शीर्षक से रिपोर्ट जारी की है।

अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक संगठन

वैश्विक स्तर पर

  • EPR में लैंगिक असमानता:
    • युवा महिलाओं ने रोज़गार-से-जनसंख्या अनुपात (EPR) में बहुत कम प्रदर्शन किया, जो यह दर्शाता है कि युवा पुरुषों की तुलना में युवा महिलाओं के रोज़गार की संभावना लगभग 1.5 गुना अधिक है।
      • वर्ष 2022 में 40.3% युवा पुरुषों की तुलना में वैश्विक स्तर पर युवा महिलाओं हेतु 27.4% रोज़गार के अवसर होने का अनुमान है।
  • महामारी से प्रभावित युवा रोज़गार:
    • कोविड–19 महामारी ने 15 से 24 वर्ष की आयु के लोगों के सामने कई श्रम बाज़ार चुनौतियों को और बद्तर कर दिया है, जिन्होंने वर्ष 2020 की शुरुआत से वयस्कों की तुलना में रोज़गार में बहुत अधिक प्रतिशत नुकसान का अनुभव किया है।
      • बेरोज़गार युवाओं की कुल वैश्विक संख्या वर्ष 2022 में 73 मिलियन तक पहुँचने का अनुमान है, वर्ष 2021 से कुछ सुधार हुआ है लेकिन यह अभी भी वर्ष 2019 के पूर्व-महामारी स्तर से छह मिलियन अधिक है।
  • क्षेत्रीय अंतर:
    • युवा बेरोज़गारी में सुधार एक ओर निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों और दूसरी ओर उच्च आय वाले देशों के बीच विचलन का अनुमान है।
    • उच्च आय वाले देश वर्ष 2022 के अंत तक वर्ष 2019 के सामान युवा बेरोजगारी दर हासिल करने की अपेक्षा कर रहे हैं।
    • इस बीच दूसरे देश के आय समूहों में दरें उनके पूर्व-संकट मूल्यों से 1% से अधिक रहने का अनुमान है।
  • हरित और नीली अर्थव्यवस्थाओं के लाभ:
    • हरित और नीली अर्थव्यवस्थाओं के विस्तार (जो क्रमशः पर्यावरण और स्थायी महासागर संसाधनों के आसपास केंद्रित थे) से लाभान्वित होने के लिये युवा लोगों को उचित अवसर प्रदान किया गया था।
  • ब्रॉडबैंड कवरेज और रोज़गार:
    • वर्ष 2030 तक सार्वभौमिक ब्रॉडबैंड कवरेज प्राप्त करने से वैश्विक स्तर पर 24 मिलियन से अधिक रोज़गार सृजन की संभावना है।
      • देखभाल क्षेत्रों में निवेश से 2030 तक युवाओं के लिये 17.9 मिलियन अधिक रोज़गार सृजित होंगे।

भारत से संबंधित निष्कर्ष:

  • युवा रोज़गार में गिरावट:
    • वर्ष 2020 में इसके मूल्य के सापेक्ष वर्ष 2021 के पहले नौ महीनों में युवा रोज़गार भागीदारी दर में 0.9% की गिरावट आई, जबकि इसी अवधि में वयस्कों के लिये इसमें 2% की वृद्धि हुई।
      • 15-20 वर्ष की आयु-वर्ग के लिये यह स्थिति विशेष रूप से गंभीर है।
  • महिलाओं की रोज़गार क्षेत्र में निम्न-भागीदारी:
    • युवा भारतीय महिलाओं ने वर्ष 2021 और वर्ष 2022 में युवा भारतीय पुरुषों की तुलना में सापेक्ष रोज़गार में कमी का अनुभव किया है।
    • सामान्य तौर पर भारत में उच्च युवा रोज़गार में गिरावट वैश्विक स्तर पर औसत रोज़गार में आने वाली कमी को दर्शाती हैं।
      • वैश्विक श्रम बाज़ार में युवा भारतीय पुरुषों की भागीदारी 16% जबकि युवा भारतीय महिलाओं की भागीदारी मात्र 5% है।
  • ऑनलाइन शिक्षा में अंतराल:
    • सभी विद्यालय लगभग 18 महीने तक बंद रहे और 24 % बच्चों में ग्रामीण क्षेत्र में केवल 8% और शहरी क्षेत्रों में 23% बच्चों की ऑनलाइन शिक्षा तक पर्याप्त पहुँच थी।
    • विकासशील देशों में ऑनलाइन संसाधनों तक अत्यधिक असमान पहुँच को देखते हुए, सामाजिक-आर्थिक रूप से वंचित परिवारों के बच्चों की शिक्षा तक पहुँच लगभग नहीं के बराबर थी।
  • सीखने की प्रक्रिया का प्रतिगमन:
    • विद्यालयों के बंद होने से न केवल नई शिक्षा नीति बाधित हुई, बल्कि "सीखने की प्रक्रिया का प्रतिगमन" की घटना भी हुई, यानी बच्चे ये भूल गए कि उन्होंने पहले क्या सीखा था।
    • भारत में, औसतन 92% बच्चों ने कम-से-कम एक भाषा में मूलभूत क्षमता खो दी और 82% ने गणित में मूलभूत क्षमता खो दी।
  • शिक्षकों को कम वेतन का भुगतान:
    • अध्ययन में पाया गया कि गैर-सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों को अक्सर सरकारी विद्यालयों की तुलना में काफी कम वेतन का भुगतान किया जाता है।
    • भारत, केन्या, नाइजीरिया और पाकिस्तान में कम-शुल्क वाले निजी विद्यालयों के शिक्षकों को राज्य क्षेत्र में उनके समकक्षों को मिलने वाले वेतन के आठवें भाग या 50 प्रतिशत के बीच भुगतान किया जाता है।
  • घरेलू-कार्य का अत्यधिक अनौपचारिक होना:
    • भारत में घरेलू-कार्य को अत्यधिक अनौपचारिक कार्य के रूप में देखा जाता है, जिसका पारिश्रमिक अत्यंत कम है और साथ ही महिलाओं और लड़कियों को दुर्व्यवहार का सामना भी करना पड़ता हैं।
    • युवा घरेलू कामगारों के साथ दुर्व्यवहार की रिपोर्ट आम हैं, जिनमें मौखिक, शारीरिक और यौन शोषण शामिल हैं।

अनुसंशाएँ:

  • विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के साथ-साथ सभी युवा कामगारों के लिये कार्य करने की अच्छी परिस्थितियों को बढ़ावा देना चाहिये।
  • युवा श्रमिकों हेतु यह सुनिश्चित किया जाना चाहिये कि वे मौलिक अधिकारों और सुरक्षा का आनंद ले सकें, जिसमें संघ की स्वतंत्रता, सामूहिक सौदेबाजी का अधिकार, समान कार्य के लिये समान वेतन तथा कार्यस्थल पर हिंसा और उत्पीड़न से मुक्ति शामिल हो।
  • युवा लोगों को अच्छी तरह से काम करने वाले श्रम बाज़ार के साथ श्रम बाज़ार में पहले से ही भाग लेने वालों के लिये अच्छे रोज़गार के अवसर प्रदान किये जाने चाहिये, साथ ही उन लोगों के लिये गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रशिक्षण के अवसर जो अभी तक इसमें प्रवेश नहीं कर पाए हैं।

विगत वर्ष के प्रश्न:

प्रश्न. अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन कन्वेंशन 138 और 182 किससे संबंधित हैं?

(a) बाल श्रम, (2018)
(b) वैश्विक जलवायु परिवर्तन के लिये कृषि प्रथाओं का अनुकूलन
(c) खाद्य कीमतों और खाद्य सुरक्षा का विनियमन
(d) कार्यस्थल पर लिंग समानता

उत्तर: a

व्याख्या:

  • वर्ष 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल, भारत सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के न्यूनतम आयु सम्मेलन, 1973 (नंबर 138) और बाल श्रम कन्वेंशन के सबसे खराब रूप, 1999 (संख्या 182) के अनुसमर्थन को मंज़ूरी दी।
  • कन्वेंशन 138: भारत कन्वेंशन 138 की पुष्टि करने वाला 170वाँ ILO सदस्य राज्य है, जिसके लिये राज्य पार्टियों को न्यूनतम आयु निर्धारित करने की आवश्यकता होती है, इसके तहत किसी को भी रोज़गार या किसी भी व्यवसाय में काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी, सिवाय हल्के काम और कलात्मक प्रदर्शन के।
  • कन्वेंशन 182: कन्वेंशन 182 की पुष्टि करने के लिये भारत ILO का 181वाँ सदस्य राज्य भी बन गया है। यह गुलामी, जबरन श्रम और तस्करी सहित बाल श्रम के सबसे खराब रूपों के निषेध तथा उन्मूलन का आह्वान करता है; सशस्त्र संघर्ष में बच्चों का उपयोग; वेश्यावृत्ति, अश्लील साहित्य एवं अवैध गतिविधियों (जैसे मादक पदार्थों की तस्करी) के लिये किसी बच्चे का उपयोग और खतरनाक काम आदि।
  • ये सभी बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के अनुरूप हैं, जो किसी भी व्यवसाय या प्रक्रिया में 14 साल से कम उम्र के बच्चों के रोज़गार या काम करने को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है तथा खतरनाक व्यवसायों व प्रक्रियाओं में किशोरों (14 से 18 वर्ष) के रोज़गार को भी प्रतिबंधित करता है।
  • इसके अतिरिक्त बाल श्रम (निषेध और विनियमन) केंद्रीय नियम, जैसा कि हाल ही में संशोधित किया गया है, पहली बार बाल एवं किशोर श्रमिकों की रोकथाम, निषेध, बचाव तथा पुनर्वास के लिये एक व्यापक और विशिष्ट रूपरेखा प्रदान करता है।
  • दो प्रमुख ILO सम्मेलनों के अनुसमर्थन के साथ भारत ने आठ प्रमुख ILO सम्मेलनों में से छह की पुष्टि की है। चार अन्य सम्मेलन- जबरन श्रम के उन्मूलन, समान पारिश्रमिक और रोज़गार तथा व्यवसाय में पुरुषों एवं महिलाओं के बीच कोई भेदभाव नहीं करने से संबंधित हैं। अतः विकल्प (a) सही उत्तर है।

स्रोत: द हिंदू

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