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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

लैब में RBCs का सृजन

  • 16 Mar 2020
  • 4 min read

प्रीलिम्स के लिये:

हेमटोपोइएटिक स्टेम, ब्लड सेल  

मेन्स के लिये:

ब्लड बैंक 

चर्चा में क्यों?

भारतीय शोधकर्त्ताओं की टीम ने एक ऐसी प्रक्रिया की खोज की है जो ‘हेमटोपोइएटिक स्टेम सेल’ (Haematopoietic Stem Cells- HSCs) से लाल कणिकाओं (Red Blood Cells- RBCs) का उत्पादन शरीर के बाहर प्रयोगशाला (इन विट्रो ) में करने को गति प्रदान करेगी।

मुख्य बिंदु:

  • खोजी गई प्रक्रिया, एनीमिया, प्रत्यारोपण सर्जरी, गर्भावस्था से संबंधित जटिलता, रक्त कैंसर आदि समस्याओं के उपचार में RBCs के आधान (Transfusion) की प्रक्रिया में सहायक होगी।

आवश्यकता:

  • ब्लड बैंकों को विशेष रूप से विकासशील देशों में अक्सर रक्त तथा उनके घटक यथा- लाल रक्त कणिकाओं की कमी का सामना करना पड़ता है।
  • विभिन्न समूह HSCs से प्रयोगशाला में RBCs का उत्पादन करने में सक्षम हैं, हालाँकि इस प्रक्रिया में लगभग 21 दिन लगते हैं।
    • गर्भनाल के रक्त में हेमटोपोइएटिक स्टेम सेल नामक विशेष कोशिकाएँ होती हैं जिनका उपयोग कुछ रोगों के उपचार के लिये किया जा सकता है।
    • हेमटोपोइएटिक स्टेम कोशिकाएँ विभिन्न प्रकार की रक्त कोशिकाओं के निर्माण में समर्थ होती हैं। 
  • प्रयोगशाला में कोशिकाओं को विकसित करने में अधिक समय लगने के कारण काफी मात्रा में संसाधनों की आवश्यकता होती है। 

खोजी गई प्रक्रिया:

  • प्रयोगशाला में हेमटोपोइएटिक स्टेम सेल से RBCs निर्माण प्रक्रिया को `ट्रांसफॉर्मिंग ग्रोथ फैक्टर’ β1 (TGF- β1) नामक एक छोटे प्रोटीन अणु की बहुत कम सांद्रता तथा एरिथ्रोपोइटिन (Erythropoietin- EPO) प्रोटीन को मिलाकर तेज़ किया जा सकता है एवं  इस प्रक्रिया से RBCs निर्माण में 18 दिन लगते हैं। 

rbcs

प्रकिया का महत्त्व:

  • सामान्यत: HSCs प्रक्रिया जिसमें एरिथ्रोपोइटिन का उपयोग किया जाता है, में RBCs के निर्माण में 21 दिन लगते हैं।
  • भारतीय शोधकर्त्ताओं ने पाया है कि EPO के साथ TGFβ1के जुड़ने से RBCs के निर्माण समय में तीन दिन की कमी आई है।

रक्त (Blood)

  • यह एक तरल संयोजी ऊतक होता है जिसमें प्लाज़्मा, रक्त कणिकाएँ तथा प्लेटलेट्स होते हैं। 
  • यह शरीर की विभिन्न कोशिकाओं तथा उतकों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्त्वों का संचरण करने में मदद करता है। 
  • रक्त कोशिकाओं के प्रमुख प्रकारों में शामिल हैं:

लाल रक्त कणिकाएँ (RBCs):

  • इनको एरिथ्रोसाइट (Erythrocyte) भी कहा जाता है। RBCs का रंग आयरन युक्त प्रोटीन, हीमोग्लोबिन के कारण लाल होता है।

सफेद रक्त कणिकाएँ (WBCs):

  • WBC को ल्यूकोसाइट (Leucocyte) भी कहा जाता है। ये हीमोग्लोबिन से रहित होने के कारण रंगहीन होती हैं।

स्रोत: PIB

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