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जेंडर सेल्फ आइडेंटिफिकेशन

  • 01 Jul 2021
  • 8 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

जेंडर सेल्फ आइडेंटिफिकेशन, ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम, 2019

मेन्स के लिये:  

जेंडर सेल्फ आइडेंटिफिकेशन के पक्ष तथा विपक्ष में तर्क, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार के संरक्षण हेतु भारत सरकार की पहल 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में स्पेनिश सरकार ने एक ऐसे मसौदा विधेयक को मंज़ूरी दी है जो 14 वर्ष से अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को चिकित्सा निदान या हार्मोन थेरेपी के बिना कानूनी रूप से लिंग बदलने की अनुमति देगा।

  • वर्तमान में किसी भी व्यक्ति को आधिकारिक रिकॉर्ड में अपना लिंग परिवर्तित करने  से पहले  कानूनी रूप से दो साल की हार्मोन थेरेपी और एक मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता होती है।
  • ट्रांसजेंडर लोगों के प्रति व्याप्त पूर्वाग्रह के चलते ‘सेल्फ आइडेंटिफिकेशन’ यानी 'स्व-पहचान' भारत सहित दुनिया भर में ट्रांस-राइट समूहों की लंबे समय से मांग रही है।

प्रमुख बिंदु:

जेंडर सेल्फ आइडेंटिफिकेशन (अवधारणा):

  • एक व्यक्ति को केवल घोषणा के माध्यम से और बिना किसी चिकित्सीय परीक्षण के अपनी पसंद के लिंग के साथ पहचाने जाने हेतु कानूनी रूप से अनुमति दी जानी चाहिये।
  • पक्ष में तर्क: 
    • वांछित लिंग के साथ पहचान घोषित करने की वर्तमान प्रक्रिया लंबी, महँगी और अपमानजनक है।
    • ट्रांसजेंडर लोगों को दैनिक रूप से भेदभाव का सामना करना पड़ता है, ऐसे में यह महत्त्वपूर्ण है कि इस भेदभाव से निपटने के लिये कदम उठाए जाएँ और लोगों को आवश्यक सेवाएँ तथा सहायता प्रदान की जाए।
    • लैंगिक पहचान को उस व्यक्ति का एक अंतर्निहित हिस्सा माना जाता है जिसे शल्य चिकित्सा या हार्मोनल उपचार या चिकित्सा की आवश्यकता हो भी सकती है या नहीं भी हो सकती है। इसके अलावा सभी व्यक्तियों को अपनी शारीरिक अखंडता और शारीरिक स्वायत्तता को प्रभावित करने वाले निर्णय लेने के लिये सशक्त होना चाहिये।
  • विपक्ष में तर्क
    • जेंडर सेल्फ आइडेंटिफिकेशन लोगों के इस अधिकार के सम्मान से कहीं आगे है कि वे क्या चाहते हैं; अपनी इच्छानुसार पोशाक धारण करना या अपनी पहचान व्यक्त करना।
    • यह एक राजनीतिक और सामाजिक मांग है जो सभी, विशेष रूप से महिलाओं, समलैंगिक लोगों और ट्रांससेक्सुअल लोगों को प्रभावित करती है।
    • जेंडर आइडेंटिफिकेशन के चिकित्साकरण ने ट्रांस समुदाय के कुछ सदस्यों के लिये महत्त्वपूर्ण कानूनी मान्यता और संक्रमण से संबंधित स्वास्थ्य देखभाल की अनुमति दी है।

ऐसे देश जहांँ सेल्फ आइडेंटिफिकेशन को कानूनी मान्यता प्राप्त है:

  • डेनमार्क, पुर्तगाल, नॉर्वे, माल्टा, अर्जेंटीना, आयरलैंड, लक्ज़मबर्ग, ग्रीस, कोस्टा रिका, मैक्सिको (केवल मैक्सिको सिटी में), ब्राज़ील, कोलंबिया, इक्वाडोर और उरुग्वे सहित विश्व के 15 देश सेल्फ आइडेंटिफिकेशन को मान्यता प्रदान करते हैं।
  • हंगरी में एक नया कानून लाया गया है जिसके अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिये स्कूली पाठ्यक्रम और टेलीविज़न शो के माध्यम से समलैंगिकता तथा लिंग परिवर्तन के बारे में सभी ज्ञानकारियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करना आवश्यक है।

 भारत में नियम:

  • भारत में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकार ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) विधेयक 2019 और ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) नियम, 2020 द्वारा शासित होते हैं।
    • नियम के तहत लिंग घोषित करने हेतु ज़िलाधिकारी को आवेदन करना होता है। माता-पिता भी अपने बच्चे की ओर से आवेदन कर सकते हैं।
    • नियम के तहत पहचान प्रमाण पत्र जारी करने/लिंग परिवर्तन करने की प्रक्रियाओं हेतु कोई चिकित्सा या शारीरिक परीक्षा की अनिवार्यता नहीं होगी।
  • राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) बनाम भारत संघ, 2014 मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने ट्रांसजेंडर लोगों को 'थर्ड जेंडर' घोषित किया।
    • न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आत्म-अभिव्यक्ति (Self-Expression) में विविधता को शामिल करने के लिये 'गरिमा' की व्याख्या की, जो किसी व्यक्ति को एक सम्मानजनक जीवन जीने की अनुमति देता है। इसने लैंगिक पहचान को अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के मौलिक अधिकार के ढाँचे के भीतर रखा।
    • इसके अतिरिक्त यह उल्लेख किया गया कि समानता के अधिकार (संविधान का अनुच्छेद 14) और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 19 (1) (a) को लिंग-तटस्थ (Gender-Neutral) शब्दों ("सभी व्यक्ति") के साथ निर्मित किया गया था अर्थात् इन अधिकारों में किसी विशिष्ट लिंग के बजाय सभी व्यक्तियों की बात की गई है।
  • 2018 में SC ने समलैंगिक संबंधों को भी अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया (भारतीय दंड संहिता की धारा 377 के प्रावधानों के साथ पढ़ें)।

ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिनियम, 2019 की विशेषताएँ

  • ट्रांसजेंडर व्यक्ति की परिभाषा: यह अधिनियम किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है, जिसका लिंग जन्म के समय नियत लिंग से मेल नहीं खाता। इसमें ट्रांस-मेन और ट्रांस-वूमेन, इंटरसेक्स भिन्नताओं और जेंडर क्वीर (Queer) शामिल हैं। इसमें सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान वाले व्यक्ति जैसे किन्नर भी शामिल हैं।
  • पहचान का प्रमाणपत्र: अधिनियम में कहा गया है कि एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को स्व-कथित लिंग पहचान का अधिकार होगा।
    • पहचान का प्रमाणपत्र ज़िलाधिकारी के कार्यालय से प्राप्त किया जा सकता है और लिंग परिवर्तन होने पर संशोधित प्रमाणपत्र प्राप्त करना होता है।
  • यह अधिनियम शिक्षा, रोज़गार और स्वास्थ्य सेवा आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति के खिलाफ भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।
  • इसमें ‘राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद’ की स्थापना का प्रावधान है।
  • दंड: इस अधिनियम में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ अपराध के मामले में जुर्माने के अलावा छह महीने से दो वर्ष तक की कैद की सज़ा का प्रावधान किया गया है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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