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कृषि

कृषक कल्याण शुल्क का विरोध

  • 13 May 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

कृषक कल्याण शुल्क, कृषक कल्याण कोष

मेन्स के लिये:

कृषि विकास योजनाओं से संबंधित प्रश्न 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में राजस्थान राज्य में किसानों और कृषि मंडियों से जुड़े हुए लोगों ने कृषि उत्पादों पर राज्य सरकार द्वारा 2% कृषक कल्याण शुल्क (Krishak Kalyan Fees) लगाए जाने का विरोध किया है।

मुख्य बिंदु:

  • ध्यातव्य है कि राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2019 में ‘ईज़ ऑफ डूइंग फार्मिंग’ (Ease of Doing Farming) की पहल के तहत ‘कृषक कल्याण कोष’ की स्थापना की घोषणा की गई थी। 
  • 1 मई, 2020 को राजस्थान सरकार ने ‘राजस्थान कृषि उपज बाजार (संशोधन) अध्यादेश, 2020’ के माध्यम से ‘राजस्थान कृषि उपज मंडी अधिनियम, 1961’ की धारा-17 में परिवर्तन कर दिया था। 
  • इस अधिनियम में जोड़ी गई नई धारा 17A के तहत मंडी समितियों को सरकार द्वारा निर्धारित दर के अनुसार लाइसेंस धारकों से कृषि उपज की बिक्री और क्रय पर कृषक कल्याण शुल्क वसूल करने का निर्देश दिया गया।
  • मंडियों द्वारा एकत्र कृषक कल्याण शुल्क को इस अधिनियम की धारा-19A के तहत स्थापित ‘कृषक कल्याण कोष’ में जमा किया जाएगा।    

कृषक कल्याण शुल्क लगाने का उद्देश्य: 

  • राजस्थान सरकार के अनुसार, कृषक कल्याण कोष की स्थापना के बाद इस कोष के लिये किसी स्थायी आर्थिक स्रोत की व्यवस्था नहीं थी, अतः कृषि उपज पर लगाया गया यह 2% शुल्क इस कोष के लिये स्थायी राजस्व स्रोत के रूप में काम करेगा।
  • हाल ही में राज्य सरकार ने ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana- PMFBY) के तहत राज्य के हिस्से की भरपाई के लिये ‘कृषक कल्याण कोष’ पर 2000 रुपए करोड़ ऋण लिया था, जिसके माध्यम से पिछले 20-25 दिनों में किसानों को 2200 रुपए तक का बीमा लाभ दिया गया है।
  • सरकार के अनुसार, कृषक कल्याण शुल्क के रूप में प्राप्त फंड का प्रयोग कृषि कल्याण के लिये ही किया जाएगा।

कृषक कल्याण शुल्क की समस्याएँ:

  • राजस्थान में पहले ही कृषि उपज पर 1.6% मंडी उपकर (Mandi Cess) लागू है, ऐसे में कृषक कल्याण शुल्क के रूप में 2% अतिरिक्त कर लगने से कुल कर बढ़कर 3.6% हो जाएगा जो अन्य राज्यों से बहुत अधिक है।
  • कृषक कल्याण शुल्क के कारण कृषि उपज की कीमत में वृद्धि को देखते हुए खरीदार कम बोली लगाएंगे जिससे किसानों को अपनी कृषि उपज पर कम धन प्राप्त होगा।
  • कुछ किसानों के अनुसार, मंडियों में कृषि उपज की कीमत पहले से ही ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य’ (Minimum Support Price- MSP) से कम हैं, ऐसे में 2% अतिरिक्त कर से किसानों का नुकसान और भी बढ़ जाएगा। 
  • अतिरिक्त कर से बचने के लिये किसान मंडियों से बाहर कृषि उपज बेचने का प्रयास करेंगे जिससे कालाबाज़ारी जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आगे चलकर किसानों को ही इसका नुकसान झेलना पड़ेगा।

निष्कर्ष:

आज भी देश की आधी से अधिक आबादी अपनी आजीविका के लिये कृषि पर निर्भर करती है। पिछले कुछ वर्षों में देश में कृषि के क्षेत्र में नई तकनीकों और वैज्ञानिक प्रयोगों को बड़े पैमाने पर शामिल न करने से किसानों की आय में कमी आई है। राजस्थान सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के विकास हेतु कृषक कल्याण कोष की स्थापना एक सराहनीय पहल है परंतु किसानों से अतिरिक्त शुल्क लेने से इसका प्रत्यक्ष प्रभाव किसानों की आय पर पड़ेगा, विशेषकर जब COVID-19 के कारण देश में कृषि उत्पादों की बिक्री प्रभावित हुई है। ऐसे में सरकार को किसानों के पक्ष को सुनकर तथा अन्य पहलुओं को देखते हुए इस मामले पर निर्णय करना चाहिये।

स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस

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