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फेशियल रिकॉग्निशन एप

  • 03 Feb 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये:

डिजीयात्रा, रियूनाइट एप, राज्य निर्वाचन आयोग, फेशियल रिकॉग्निशन एप

मेन्स के लिये:

मतदान प्रक्रिया में अनियमितता से संबंधित मुद्दे, मतदान प्रक्रिया को स्वच्छ बनाने के लिये सरकारी प्रयास, फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक के उपयोग संबंधी मुद्दे

चर्चा में क्यों?

तेलंगाना में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में राज्य निर्वाचन आयोग (State Election Commission) ने मतदान केंद्रों पर मतदाताओं के सत्यापन और रियल टाइम प्रमाणीकरण के लिये फेशियल रिकॉग्निशन एप (Facial Recognition App) का उपयोग किया।

महत्त्वपूर्ण बिंदु

  • तेलंगाना राज्य चुनाव आयोग के अनुसार, मेडचल-मलकाजगिरि (Medchal−Malkajgiri) ज़िले के कोमपल्ली नगरपालिका के चुनिंदा 10 मतदान केंद्रों में पायलट आधार पर इस प्रौद्योगिकी का उपयोग किया गया है।
  • गौरतलब है कि इस प्रणाली द्वारा सत्यापन न होने की स्थिति में मतदाताओं को पहचान पत्र की निर्धारित प्रक्रिया के आधार पर आईडी कार्ड का उपयोग कर मतदान करने की अनुमति दी गई।
  • राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता पहचान के लिये ली गई तस्वीरों को संग्रहीत या उन्हें किसी अन्य उद्देश्य के लिए उपयोग नहीं किया जाएगा।

फेशियल रिकॉग्निशन की प्रक्रिया

Voter-identity

  • इस प्रक्रिया के तहत अतिरिक्त मतदान अधिकारी द्वारा पहले मतदाताओं के पहचान प्रमाण पत्र को सत्यापित किया जाता है और फिर उनकी तस्वीर लेकर उसे मोबाइल फोन में स्थापित फेस रिकॉग्निशन एप का उपयोग करके सर्वर पर अपलोड किया जाता है ताकि संबंधित मतदान केंद्र के सभी मतदाताओं की पहले से उपलब्ध तस्वीरों से मतदाता का मिलान किया जा सके।
  • यह एप एक उपयुक्त संदेश के साथ मतदाताओं के साथ मिलान के आधार पर सत्यापन का परिणाम प्रदर्शित करता है।
  • ध्यातव्य है कि इस प्रणाली का उपयोग मौजूदा पहचान सत्यापन प्रणाली के स्थान पर नहीं बल्कि एक अतिरिक्त उपकरण के रूप में किया गया है। साथ ही इस एप में संग्रहित डेटा को चुनाव पश्चात् हटा दिया जाता है।

प्रौद्योगिकी के उपयोग के उद्देश्य

  • प्रौद्योगिकी का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और शिक्षण की नवीनतम तकनीकों का उपयोग करके चुनाव में प्रतिरूपण (Impersonation) के मामलों को कम करना है। अर्थात् इस प्रौद्योगिकी का मुख्य उद्देश्य फर्जी मतदान पर अंकुश लगाना है।
  • यह प्रणाली डिजिटल ट्रेल (Digital Trail) तथा तेलंगाना स्टेट टेक्नोलॉजी सर्विसेज (Telangana State Technology Services- TSTS) द्वारा विकसित और संचालित है।

प्रौद्योगिकी की भविष्य में उपयोगिता

  • इस प्रणाली के उपयोग से चुनाव प्रक्रिया को स्वच्छ बनाया जा सकता है।
  • इस प्रणाली के माध्यम से चुनाव में फर्जी वोटिंग पर अंकुश लगाया जा सकता है जिससे वोटिंग के सही आँकड़े प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
  • इस प्रणाली के उपयोग से मौजूदा मतदाता सत्यापन प्रणालियों (Voter Verification Systems) को सुदृढ़ किया जा सकता है।
  • इस प्रणाली का उपयोग अपराधियों को पहचानने, सुरक्षा जाँच जैसे अनेक क्षेत्रों में किया जा सकता है।

भारत में फेशियल रिकॉग्निशन तकनीक

  • भारत में यह एक नया विचार है जिसे देश के विभिन्न क्षेत्रों में प्रायोगिक स्तर पर शुरू किया गया है।
  • नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) ने हवाई अड्डे में प्रवेश के दौरान चेहरे की पहचान करने हेतु "डिजीयात्रा (DigiYatra)" प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है।
  • तेलंगाना पुलिस ने इस संदर्भ में वर्ष 2018 में अपना स्वयं का सिस्टम विकसित किया है।
  • केंद्रीय वाणिज्य एंव उद्योग मंत्रालय ने ‘रियूनाइट’ (Re-unite) नामक एक मोबाइल एप लॉन्च किया है। इस एप की सहायता से देश में खोए हुए बच्चों का पता लगाने में सहायता मिलेगी।

आगे की राह

  • मतदान की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं स्वच्छ बनाने के लिये व्यापक स्तर पर कदम उठाए जाने चाहिये और चुनाव सुधार (Electoral Reforms) की दिशा में व्यापक स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है।
  • तेलंगाना में किये गए पायलट परीक्षण की भाँति देश के अन्य हिस्सों में भी इस प्रकार के प्रयोग करने की आवश्यकता है तथा सकारात्मक परिणाम के साथ इसे मतदान प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिये।

स्रोत: द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस

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