हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

भारत-बेल्जियम प्रत्यर्पण संधि

  • 23 Mar 2020
  • 7 min read

प्रीलिम्स के लिये:

भारत-बेल्जियम प्रत्यर्पण संधि 

मेन्स के लिये:

भारत में प्रत्यर्पण संबंधी मुद्दे

चर्चा में क्यों ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत और बेल्जियम के मध्य प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) पर हस्ताक्षर को मंज़ूरी प्रदान की है।

पृष्ठभूमि

  • भारत और बेल्जियम के मध्य होने जा रही नई संधि स्वतंत्रता-पूर्व वर्ष 1901 में ब्रिटेन और बेल्जियम के मध्य हुई संधि का स्थान लेगी जो स्वतंत्रता प्राप्ति से पूर्व भारत पर भी लागू हो गई थी। वर्तमान में उक्त संधि ही भारत और बेल्जियम के मध्य लागू है। स्वतंत्रता-पूर्व की गई संधि में अपराधों की संख्या काफी सीमित है जिसके कारण यह उपयोगी नहीं रह गई है।

संधि की प्रमुख विशेषताएँ:

  • प्रत्यर्पण हेतु दायित्त्व
    • संधि के अनुसार, प्रत्येक पक्ष दूसरे पक्ष के ऐसे व्यक्ति के प्रत्यर्पण की सहमति प्रदान करता है जो उसके देश के सीमा क्षेत्र में प्रत्यर्पण अपराध का आरोपी है या उसे सजा दी जा चुकी है।
  • प्रत्यर्पण अपराध
    • प्रत्यर्पण अपराध का अर्थ ऐसे अपराध से है जो दोनों देशों के कानूनों के अंतर्गत दंडनीय है और जिसमें एक वर्ष के कारावास अथवा अधिक कड़े दंड का प्रावधान है। जब किसी सज़ा प्राप्त व्यक्ति के प्रत्यर्पण की मांग की जाती है तो शेष सजा की अवधि कम-से-कम 6 महीने होनी अनिवार्य है। उल्लेखनीय है कि बेल्जियम के साथ की जा रही संधि में टैक्स, राजस्व और वित्त से संबंधित अपराध भी शामिल किये गए हैं।
  • अस्वीकार्यता के लिये अनिवार्य आधार
    • यदि अपराध की प्रकृति राजनीतिक है तो प्रत्यर्पण के प्रस्ताव को अस्वीकार किया जा सकता है। हालाँकि संधि में कुछ ऐसे अपराधों को भी शामिल किया गया है जिन्हें राजनीतिक अपराध नहीं माना जाएगा।
    • यदि प्रत्यर्पण अपराध एक सैन्य अपराध है। 
    • यदि किसी व्यक्ति को उसके रंग, लिंग, धर्म, राष्ट्रीयता या राजनीतिक विचार के कारण दंडित किया जा रहा है।
    • दंड को लागू करने की समय-सीमा बीत चुकी है।
  • दोषी की राष्ट्रीयता
    • राष्ट्रीयता का निर्धारण उस समय के अनुसार किया जाएगा जब अपराध किया गया है।

लाभ 

  • संधि के माध्यम से भारत को और भारत से प्रत्यर्पित होने वाले आतंकियों, आर्थिक अपराधियों और अन्य अपराधियों के प्रत्यर्पण को कानूनी आधार प्राप्त होगा। 
  • ध्यातव्य है कि अभिपुष्टि के पश्चात भारत और बेल्जियम के मध्य अभिपुष्टि-पत्रों के आदान-प्रदान के दिन से संधि लागू हो जाएगी।

प्रत्यर्पण

  • प्रत्यर्पण का अभिप्राय उस कानूनी प्रक्रिया से है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसे एक देश से दूसरे देश में स्थानांतरित किया जाता है।
  • इसमें एक सरकारी प्राधिकरण औपचारिक और कानूनी रूप से एक कथित अपराधी को अपराध हेतु अभियोजन का सामना करने के लिये किसी अन्य सरकार से उसकी मांग करता है।
  • निर्वासन के विपरीत यह एक न्यायिक प्रक्रिया है।

भारत और प्रत्यर्पण (India and Extradition):

  • भारत दुनिया के किसी भी देश को प्रत्यर्पण का प्रस्ताव कर सकता है। यदि भारत ने इस संदर्भ में उस देश के साथ किसी प्रकार की संधि की है तो सभी नियम उस संधि के आधार पर ही निर्धारित किये जाएंगे, किंतु यदि भारत की उस देश के साथ संधि नहीं है, तो इस स्थिति में संपूर्ण प्रक्रिया उस देश की घरेलू कानूनों के आधार पर निर्धारित की जाएगी। 
    • उचित संधि के अभाव में प्रत्यर्पण भारत और उस देश के संबंधों पर भी निर्भर करेगा।
  • इसी प्रकार कोई भी देश भारत को प्रत्यर्पण का अनुरोध कर सकता है। जिन राज्यों के साथ भारत ने प्रत्यर्पण संधि नहीं की है, उनके साथ प्रत्यर्पण का कानूनी आधार भारतीय प्रत्यर्पण अधिनियम, 1962 की धारा 3(4) द्वारा प्रदान किया गया है।

Belgium

बेल्जियम (Belgium)

  • तकरीबन 40 मील लंबे समुद्री तट वाला बेल्जियम पश्चिमी यूरोप में स्थित एक देश है। यह नीदरलैंडस, जर्मनी, लक्ज़मबर्ग, फ्रांँस और उत्तरी सागर से घिरा हुआ है।
  • तकरीबन 30230 वर्ग किमी वाले इस क्षेत्र में वर्ष 2014 के अनुमान के अनुसार, 10449361 लोग रहते हैं।
  • बेल्जियम की राजधानी और सबसे उसका सबसे बड़ा शहर ब्रसेल्स (Brussels) है, इसके अलावा यहाँ कई अन्य प्रमुख शहर भी हैं।

भारत-बेल्जियम संबंध

  • भारत, बेल्जियम का एक बड़ा निर्यात स्‍थल है और भारत बेल्जियम से अधिकांशतः जवाहरात और आभूषण (अपरिष्‍कृत हीरा), रसायन, रासायनिक उत्‍पाद, मशीन तथा मशीनी उत्‍पादों का निर्यात करता है।
  • अनुमानित आँकड़ों के अनुसार, भारत में बेल्जियम की लगभग 160 कंपनियाँ कार्यरत हैं। 
  • इसके अलावा सूचना तथा सॉफ्टवेयर क्षेत्र की दिग्गज कंपनियों जैसे- TCS, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और HCL ने बेल्जियम और यूरोपीय बाज़ारों की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने हेतु  बेल्जियम को ही अपना आधार बनाया है।
  • भारत और बेल्जियम के मध्य राजनयिक संबंध वर्ष 1947 में स्थापित किये गए थे। उल्लेखनीय है कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध काफी सौहार्दपूर्ण और मैत्रीपूर्ण रहे हैं तथा बीते कुछ वर्षों में बेल्जियम ने वैश्विक परिदृश्य में भारत की बढ़ती भूमिका को मान्यता प्रदान की है।

स्रोत: पी.आई.बी.

एसएमएस अलर्ट
 

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

नोट्स देखने या बनाने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

प्रोग्रेस सूची देखने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close

आर्टिकल्स को बुकमार्क करने के लिए कृपया लॉगिन या रजिस्टर करें|

close