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न्यायिक निर्णयों का आर्थिक प्रभाव

  • 09 Feb 2021
  • 6 min read

चर्चा में क्यों 

हाल ही में नीति आयोग ने अनुसंधान संगठन ‘उपभोक्ता एकता और ट्रस्ट सोसायटी (Consumer Unity and Trust Society- CUTS) अंतर्राष्ट्रीय’ को न्यायालयों एवं न्यायाधिकरणों द्वारा दिये गए विभिन्न निर्णयों के ‘आर्थिक प्रभाव’ तथा ‘न्यायालयों व न्यायाधिकरणों की ‘न्यायिक सक्रियता’ पर एक अध्ययन करने के लिये कहा है।

  • न्यायिक सक्रियता: इसका तात्पर्य न्यायपालिका द्वारा सरकार के अन्य दो अंगों (विधायिका और कार्यपालिका) को उनके संवैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिये बाध्य करने हेतु निभाई गई मुखर भूमिका से है। इसे "न्यायिक गतिशीलता" के रूप में भी जाना जाता है। यह "न्यायिक संयम" के बिल्कुल विपरीत है, जिसका अर्थ है न्यायपालिका द्वारा आत्म-नियंत्रण बनाए रखना।

प्रमुख बिंदु

संगठन का संचालन:

  • यह अध्ययन जयपुर-मुख्यालय CUTS (उपभोक्ता एकता और ट्रस्ट सोसायटी) सेंटर फॉर कॉम्पिटिशन, इन्वेस्टमेंट एंड इकोनॉमिक रेगुलेशन द्वारा किया जाना है, जिसकी उपस्थिति अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर है।
  • यह एक पंजीकृत, मान्यता प्राप्त, गैर-लाभकारी, गैर-पक्षपातपूर्ण, गैर-सरकारी संगठन (NGO) है जो सामाजिक न्याय तथा आर्थिक इक्विटी की सीमा के भीतर और इसके अलावा भी उसका अनुसरण करता है।

उद्देश्य:

  • अध्ययन का उद्देश्य "न्यायपालिका को उसके द्वारा दिये गए निर्णयों के आर्थिक प्रभाव के बारे में संवेदनशील बनाने हेतु विवरण प्रदान करना है।”
  • इसका एक उद्देश्य निर्णयों के आर्थिक प्रभाव का लागत-लाभ विश्लेषण करना भी है।

परियोजनाओं का अध्ययन:

  • इसका प्रयोजन सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court- SC) या राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal- NGT) के न्यायिक निर्णयों द्वारा "प्रभावित" पाँच प्रमुख परियोजनाओं का अध्ययन करना है।
    • विश्लेषण की जाने वाली परियोजनाओं में गोवा के मोपा में एक हवाई अड्डे का निर्माण, गोवा में लौह अयस्क खनन पर रोक और तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्टारलाइट कॉपर प्लांट को बंद करना शामिल है।
    • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में रेत खनन और निर्माण गतिविधियों से संबंधित NGT के अन्य फैसले हैं।

प्रक्रिया:

  • यह परियोजना के बंद होने के कारण प्रभावित लोगों, पर्यावरणविद, विशेषज्ञों के साक्षात्कार साथ-साथ बंदी के व्यावसायिक आकलन की योजना बना रहा है।

महत्त्व:

  • निर्णयों का उपयोग वाणिज्यिक न्यायालयों, NGT, उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के लिये एक प्रशिक्षण इनपुट के रूप में किया जाएगा।
  • यह अपने निर्णयों में "न्यायपालिका द्वारा आर्थिक रूप से ज़िम्मेदार दृष्टिकोण" को बढ़ावा देने के लिये नीति निर्माताओं के बीच सार्वजनिक संवाद में योगदान देगा।
  • यह अध्ययन नीति आयोग द्वारा शुरू की गई व्यापक योजना का भी एक हिस्सा है जिसके तहत वह एक न्यायिक प्रदर्शन सूचकांक स्थापित करना चाहता है, जो ज़िला न्यायालयों और अधीनस्थ स्तरों पर न्यायाधीशों के प्रदर्शन को मापेगा।

पूर्व अध्ययन:

  • वर्ष 2017 में CUTS अंतर्राष्ट्रीय ने किसी भी राजमार्ग के 500 मीटर के भीतर शराब की दुकानों पर प्रतिबंध लगाने के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के आर्थिक प्रभाव पर एक मूल्यांकन अध्ययन भी किया था।
  • अध्ययन से पता चलता है कि जिन मामलों में पर्याप्त सामाजिक और आर्थिक आयाम शामिल हैं, उनका आकलन करने के लिये विस्तार से यह अध्ययन करने की आवश्यकता है कि क्या वे पूर्व की तरह लागू करने के योग्य हैं और क्या अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की परिकल्पना की गई है।
  • ऐसा तब किया जा सकता है जब न्यायालयों ने इन पहलुओं का अध्ययन करने के लिये विशेषज्ञ समितियों का गठन किया हो और जो निर्णय सुनाए जाने से पहले लागत/लाभों का विश्लेषण करने के लिये अर्थशास्त्रियों को संलग्न कर सकते हैं।
  • सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व मामलों के लिये ऐसे विशेषज्ञ समूह समितियों की स्थापना की थी जैसे- वर्ष 2014 में न्यायमूर्ति के.एस. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में गठित सड़क सुरक्षा पर सर्वोच्च न्यायालय की समिति और वर्ष 2015 में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (Board of Control for Cricket in India- BCCI) के भीतर सुधारों हेतु जस्टिस लोढ़ा समिति का गठन।

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स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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