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डेली अपडेट्स

अंतर्राष्ट्रीय संबंध

द्वितीय भारत-रूस सामरिक आर्थिक वार्ता

  • 11 Jul 2019
  • 7 min read

चर्चा में क्यों?

नई दिल्ली में द्वितीय ‘भारत-रूस रणनीतिक आर्थिक संवाद (Second India-Russia Strategic Economic Dialogue-IRSED) का आयोजन किया गया।

प्रमुख बिंदु

  • भारत-रूस रणनीतिक आर्थिक संवाद की दूसरी बैठक सहयोग के निम्नलिखित 6 प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित थी-

1. परिवहन अवसंरचना एवं प्रौद्योगिकियों का विकास (Development of Transport Infrastructure and Technologies)

2. कृषि एवं कृषि-प्रसंस्‍करण क्षेत्र का विकास (Development of Agriculture and Agro-Processing sector)

3. लघु एवं मझोले व्‍यवसाय को सहयोग (Small and Medium Business support)

4. डिजिटल रूपांतरण एवं उद्भव (फ्रंटियर) प्रौद्योगिकियाँ (Digital Transformation and Frontier Technologies)

5. व्‍यापार, बैंकिंग, वित्त एवं उद्योग क्षेत्र में सहयोग (Cooperation in Trade, Banking, Finance, and Industry)

6. पर्यटन एवं कनेक्टिविटी (Tourism & Connectivity)

  • ‘भारत-रूस रणनीतिक आर्थिक संवाद’ के दौरान समानांतर रूप से गोलमेज बैठकें आयोजित की गईं जिसमें सहयोग के क्षेत्रों के साथ-साथ उपर्युक्‍त प्रमुख क्षेत्रों में भावी वार्ताओं की ठोस रूपरेखा पर विचार-विमर्श किया गया।

परिवहन अवसंरचना एवं प्रौद्योगिकियों का विकास

  • परिवहन अवसंरचना एवं प्रौद्योगिकियों के विकास पर गोलमेज बैठक में परिवहन के विभिन्न साधनों जैसे- रेलवे में रेलों की गति को अद्यतन बनाने, यात्रियों की सुरक्षा और सहूलियत, भारत और रूस के बीच दोहरे बंदरगाहों के सृजन, पोत निर्माण और नदी नौवहन, अनुसंधान एवं विकास तथा समस्त परिवहन गलियारों में लागत की पूर्वानुमेयता में सहयोग पर चर्चा की गई।

कृषि और कृषि-प्रसंस्करण

  • कृषि और कृषि-प्रसंस्करण पर गोलमेज बैठक में दोनों देशों ने कृषि, मवेशी पालन और खाद्य प्रसंस्करण की गतिशील प्रकृति और सहयोग के क्षेत्र में अपार अवसरों को चिह्नित किया।
  • इस दौरान की गई सिफारिशों में सहयोग के प्रयासों को सुगम बनाने के लिये दोनों देशों के कृषि मंत्रालयों के मध्य सकारात्‍मक संवाद स्थापित करना शामिल था।
  • प्रमाणीकरण की स्वीकृति, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence-AI) आधारित फ्रंटलाइन प्रौद्योगिकियों और सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने पर भी चर्चा की गई।

लघु और मझोले व्यवसायों के बीच गठबंधन और सहयोग

  • भारत और रूस में लघु और मझोले व्यवसायों के बीच गठबंधन और सहयोग बढ़ाने हेतु गोलमेज बैठक में दोनों देशों के बीच प्रमुख बिंदुओं पर बातचीत करने की सिफारिश की गई।
  • वित्त तक पहुँच, डिजिटल बैंकिंग, ई-मार्केट तक पहुँच और समस्त क्षेत्रों में व्यापक आधार पर सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी चर्चा की गई।

डिजिटल रूपांतरण एवं उद्भव (फ्रंटियर) प्रौद्योगिकियाँ

  • डिजिटल ट्रांसफ़ॉर्मेशन और फ्रंटियर प्रौद्योगिकियों पर हुई गोलमेज बैठक में डिजिटल स्पेस और फ्रंटियर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भारत और रूस के बीच सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
  • रूस द्वारा विकसित प्लेटफार्मों का भारत किस प्रकार लाभ उठा सकता है तथा भारत द्वारा विकसित विभिन्न प्लेटफॉर्मों का रूस किस प्रकार लाभ उठा सकता है तथा भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों जैसे- पेमेंट प्लेटफॉर्म, संयुक्त स्टार्ट-अप व्यवस्था, जैसे-शिक्षा, निर्माण और कौशल विकास में डिजिटल प्रौद्योगिकी के उपयोग में सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

औद्योगिक व्यापार और सहयोग पर गोलमेज बैठक

  • औद्योगिक व्यापार और सहयोग पर गोलमेज बैठक में ऊर्जा, वित्त और बिज़नेस टू बिज़नेस (Business to Business) सहयोग एवं भागीदारी पर चर्चा की गई।
  • इसमें निवेश के अवसरों के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच जागरूकता के बढ़ने पर ज़ोर दिया गया।

पर्यटन और कनेक्टिविटी

  • पर्यटन और कनेक्टिविटी पर गोलमेज बैठक में द्विपक्षीय पर्यटन बढ़ाने और आर्थिक एवं वाणिज्यिक साझेदारी के लिये प्राकृतिक मार्ग तलाशने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।
  • क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में सुधार तथा सरकार और उद्योग के बीच सहयोग में सुधार लाने की दिशा में भी चर्चा की गई।

पृष्ठभूमि

  • 5 अक्तूबर, 2018 को नई दिल्ली में वार्षिक भारत—रूस द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन (Annual India-Russia Bilateral Summit) के 19वें संस्करण के दौरान नीति आयोग (NITI Aayog) और रूस के आर्थिक विकास मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद IRSED की स्थापना की गई।
  • ‘भारत-रूस रणनीतिक आर्थिक संवाद’ की प्रथम बैठक 25-26 नवंबर, 2018 को सेंट पीटर्सबर्ग में हुई थी।

निष्कर्ष

  • वार्ता के दौरान हुए विचार-विमर्श के नतीजों से दोनों देशों के बीच रणनीतिक आर्थिक सहयोग बढ़ाने में मदद मिलेगी। भविष्‍य में संयुक्‍त रूप से ठोस कदम उठाने के लिये आवश्‍यक विचार-विमर्श के साथ-साथ विशिष्‍ट प्रस्‍ताव प्रस्तुत किये जाने चाहिये। साथ ही ऐसे आर्थिक संबंध स्थापित करने चाहिये जो दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं को प्रतिबिंबित करे।

स्रोत: PIB

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