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जिला खनिज निधि

  • 27 Jun 2017
  • 5 min read

संदर्भ
हाल ही में देश के खननकर्त्ताओं के मध्य इसको लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गयी है कि क्या वर्ष 2015 का ‘खनन कानून’ अधिसूचना की तारीख से लागू होगा या फिर कानून लागू होने की तारीख से। इसी मुकद्दमेबाज़ी को लेकर लगभग 7,000 करोड़ रुपए का खनन कर अधर में लटका है। 

महत्त्वपूर्ण बिंदु 

  • ’खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम-2015’ 12 जनवरी, 2015 को लागू किया गया था, लेकिन कानून के तहत ‘जिला खनिज निधि’ (DMF) नियम सितंबर में अधिसूचित किया गया था।
  • डी.एम.एफ. के मानदंडों के अनुसार खनन मालिकों को खनन नीलामी का 10% रॉयल्टी और नीलामी शुरू होने से पहले आवंटित खानों को 30% रॉयल्टी के रूप में भुगतान करना होगा। 
  • खननकर्त्ताओं द्वारा अप्रैल तक डी.एम.एफ़. में 7,000 करोड़ रुपए  जमा किये गए थे, लेकिन कुछ खनन कंपनियों ने इस आधार पर न्यायपालिका में याचिका दायर की है कि जनवरी 2015 से विभिन्न राज्यों द्वारा डी.एम.एफ. को अधिसूचित करने तक यह कानून लागू नहीं होता है। 
  • डी.एम.एफ. नियमों के ' पूर्व-प्रभावी प्रयोजनीयता ' (Retrospective Applicability) को लेकर खनिकों को उच्च न्यायालयों ने कुछ राहत प्रदान की है, लेकिन अभी मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
  • दस साल की अवधि में डी.एम.एफ. का संग्रह लगभग 70,000 करोड़ रुपए या इससे अधिक होने की उम्मीद है।
  • वर्तमान में देश के 287 ज़िलों में डी.एम.एफ. ट्रस्ट का संचालन हो रहा है। 
  • इस रॉयल्टी का उपयोग खनन क्षेत्र में विकास परियोजनाओं का वित्तपोषण करने में किया जाता है। उदाहरण के लिये झारखंड ने अपने डी.एम.एफ. संग्रह का अधिकांश हिस्सा ज़िले (जहाँ खानें अवस्थित हैं) में जल परियोजनाओं में निवेश करने का निर्णय लिया है।

 ’खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम-2015’

  • विवेकाधीन अधिकारों की समाप्ति: आवंटन की एकमात्र विधि नीलामी होगी।

संशोधन के तहत खनिज रियायतों की अनुमति में विवेकाधीन अधिकार समाप्त कर दिये गए हैं। सभी तरह की खनिज रियायतों की अनुमति संबंधित राज्य सरकारें देती हैं। वे अनुमति देती रहेंगी, लेकिन सभी तरह की खनिज रियायतों की अनुमति नीलामी के ज़रिये ही दी जाएंगी।

  • खनिज क्षेत्र को प्रोत्साहन

दूसरे और उसके बाद नवीकरण के लिये लंबित आवेदनों के कारण खनन उद्योग में ऑपरेशन निरंतर प्रभावित हो रहा है। असल में इसके कारण बड़ी संख्या में खानें बंद हो गई हैं। संशोधन के तहत इन समस्याओं को दूर कर दिया गया है।

  • प्रभावित व्यक्तियों के लिये सुरक्षा उपाय

विधेयक में उन सभी ज़िलों में ‘ज़िला खनिज प्रतिष्ठान’ (DMF) स्थापित करना अनिवार्य बनाया गया है, जहाँ खनन किया जाता है। यह लंबे समय से चली आ रही शिकायतों के समाधान के लिये किया गया है।

  • अन्वेषण एवं निवेश को प्रोत्साहन

भारतीय खनन उद्योग में अन्य देशों की तरह अन्वेषण कार्य नहीं हो रहा है। इस चुनौती से निपटने के लिये राष्ट्रीय अन्वेषण न्यास की स्थापना की जाएगी। इससे अन्वेषण गतिविधियों के लिये सरकार के पास समर्पित निधि उपलब्ध हो सकेगी।

  • प्रक्रियाओं को सरल बनाना और देरी से बचना

संशोधन के तहत केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं होगी। इसलिये राज्य सरकारों को खनिज रियायतों की अनुमति देने की प्रक्रिया सरल होगी और उसमें तेज़ी लाई जा सकेगी।

  • अवैध खनन को रोकने के लिये सख्त प्रावधान

कानून के तहत अब अधिकतम 5 वर्ष की जेल या 5 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर जुर्माना लगाया जा सकेगा। राज्य सरकारों को अवैध खनन के मुकदमों को तेज़ी से निपटाने  के लिये विशेष अदालतें स्थापित करने के अधिकार दिये गए हैं।

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