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पृथ्वी के मेंटल के पास विशालकाय महाद्वीप की खोज

  • 30 Sep 2019
  • 3 min read

चर्चा में क्यों?

हाल ही में वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के मेंटल के पास 4 बिलियन वर्ष पुराने विशालकाय महाद्वीप की खोज की है।

  • अध्ययन के अनुसार, भूमिगत चट्टानी महाद्वीप प्राचीन मैग्मा महासागर (Magma Ocean) से बना हो सकता है जो लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले पृथ्वी के गठन की शुरुआत के दौरान जम गया था।
  • पृथ्वी की विभिन्न परतों से गुजरने के दौरान भूकंपीय तरंगों की गति और पैटर्न में परिवर्तन होता है।

Mantle

  • भूकंपीय तरंगें जब इस विशाल महाद्वीप से गुज़रती तो उनका पैटर्न बदल जाता है। भूकंपीय तरंगों की इस प्रकार की गतिविधियों ने वैज्ञानिकों को इस महाद्वीप की खोज करने हेतु प्रेरित किया।
  • यह संरचना मेंटल और बाह्य कोर के समीप स्थित है। ये क्षेत्र पृथ्वी के अधिकांश ज्वालामुखीय प्रक्रियाओं से अपेक्षाकृत बच गए हैं।
  • ऐसा अनुमान है कि भूमिगत महाद्वीप हमारे ग्रह का पुराना रूप हो सकता है और इसकी सबसे अधिक संभावना कि यह ग्रह-रॉकिंग (Planet-Rocking) प्रभाव से बच गया हो, जिससे चंद्रमा का निर्माण हुआ है।
  • वैज्ञानिकों ने नए भूगर्भीय नमूनों को हवाई, आइसलैंड और अंटार्कटिका के बैलेनी द्वीप के पुराने नमूनों के डेटा का उपयोग करके तैयार किया गया है। इन क्षेत्रों में पृथ्वी के मेंटल से सतह की ओर ज्वालामुखी लावा का निष्कर्षण होता रहता है। पृथ्वी के मेंटल से सतह तक आने वाली ज्वालामुखी लावा, आग्नेय चट्टानों में परिवर्तित हो जाता है।
  • मेंटल से पृथ्वी की सतह पर ज्वालामुखी लावा, स्तंभ जैसी संरचना के माध्यम से आता है। इस स्तंभ रूपी संरचना को मेंटल प्लम (Mantle Plume) कहते हैं।
  • भूमिगत चट्टानी महाद्वीप के नमूनों में हीलियम-3 जैसे बिग बैंग के दौरान के आइसोटोप विद्यमान हैं।

मेंटल प्लम (Mantle Plume)

  • एक मेंटल प्लम पृथ्वी के मेंटल के भीतर असामान्य रूप से गर्म चट्टान का उत्थान है। ये चट्टानें अत्यधिक तापमान के कारण पिघलकर लावा के स्वरूप में बाहर निकलती हैं।
  • मेंटल प्लम कम गहराई में पहुंँचने पर आंशिक रूप से पिघल सकता है। मेंटल प्लम के कारण ज्वालामुखी का उद्गार होता है।

Mantle Plume

  • मेंटल प्लम के सतह के क्षेत्रों को हॉटस्पॉट (Hotspots) कहा जाता है।
  • पृथ्वी पर मेंटल प्लम के दो सबसे प्रसिद्ध स्थान- हवाई और आइसलैंड हैं। इसीलिये मेंटल के नमूनों की जाँच के लिये यहाँ की चट्टानों का प्रयोग किया गया।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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