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जैवविविधता और पर्यावरण

दिल्ली में 'स्मॉग टॉवर'

  • 24 Aug 2021
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये

स्मॉग टॉवर और उसकी कार्यप्रणाली

मेन्स के लिये

स्मॉग टॉवर का महत्त्व और इसकी आवश्यकता, प्रदूषण रोकने के संबंध में किये गए प्रयास

चर्चा में क्यों?

हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कनॉट प्लेस में देश के पहले 'स्मॉग टॉवर' का उद्घाटन किया है।

  • इसका उद्घाटन राष्ट्रीय राजधानी में किसानों द्वारा फसल अपशिष्ट (पराली) को जलाने के कारण होने वाले प्रदूषण से निपटने हेतु किया गया है।

Smog-Tower

प्रमुख बिंदु

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने ‘केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड’ (CPCB) और दिल्ली सरकार को वायु प्रदूषण से निपटने के लिये स्मॉग टॉवर स्थापित करने हेतु योजना बनाने का निर्देश दिया था।
  • इसके पश्चात आईआईटी-बॉम्बे ने CPCB के समक्ष टॉवरों के लिये एक प्रस्ताव प्रस्तुत किया था।
  • जनवरी 2020 में सर्वोच्च न्यायालय ने निर्देश दिया था कि पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अप्रैल तक दो टॉवर लगाए जाएँ।
  • कनॉट प्लेस (CP) में स्मॉग टॉवर इस पायलट परियोजना के तहत स्थापित पहला टॉवर है। पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार सीपीसीबी के सहयोग से दूसरा टॉवर स्थापित किया जा रहा है।

स्मॉग टॉवर

  • स्मॉग टॉवर का आशय व्यापक पैमाने पर एयर प्यूरीफायर के रूप में काम करने के लिये डिज़ाइन की गई संरचनाओं से है।
  • इसमें प्रायः एयर फिल्टर की कई परतें मौजूद होती हैं, जो प्रदूषित हवा को साफ करते हैं।
  • चीन में दुनिया का सबसे बड़ा स्मॉग टॉवर मौजूद है।

स्मॉग टॉवर की कार्यप्रणाली

  • यह एक 'डाउनड्राफ्ट एयर क्लीनिंग सिस्टम’ का उपयोग करता है, जहाँ प्रदूषित हवा को तकरीबन 24 मीटर की ऊँचाई से प्राप्त किया जाता है और फिल्टर की गई हवा को टॉवर के नीचे, ज़मीन से लगभग 10 मीटर की ऊँचाई पर छोड़ा जाता है।
    • यह चीन में उपयोग की जाने वाली प्रणाली से अलग है, जहाँ 60 मीटर का स्मॉग टॉवर एक 'अपड्राफ्ट' सिस्टम का उपयोग करता है, जिसमें हवा को ज़मीन के पास से प्राप्त किया जाता है और हीटिंग तथा संवहन द्वारा ऊपर की ओर बढ़ाया जाता है। फिल्टर की गई हवा टॉवर के शीर्ष पर छोड़ी जाती है।

निर्माण:

  • इस टॉवर को टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड (TPL) ने आईआईटी-बॉम्बे और आईआईटी- दिल्ली के तकनीकी सहयोग से बनाया है, जो इसके डेटा का विश्लेषण करेगा।
  • इस परियोजना का प्रबंधन सलाहकार राष्ट्रीय जैव ईंधन समन्वय समिति (NBCC) इंडिया लिमिटेड है।
  • दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति इस परियोजना की प्रभारी थी।

आवश्यकता:

  • CPCB की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2009 से दिल्ली में PM10 की सांद्रता में 258% से 335% की वृद्धि देखी गई है।
  • लेकिन दिल्ली और आसपास के इलाकों में सबसे प्रमुख प्रदूषक PM2.5 है।
    • PM2.5 का अर्थ है सूक्ष्म कण जो शरीर में प्रवेश करते हैं और फेफड़ों तथा श्वसन मार्ग में सूजन को बढ़ावा देते हैं, जिससे कमज़ोर प्रतिरक्षा प्रणाली सहित हृदय एवं श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा होता है।
  • एक स्विस समूह की रिपोर्ट (जिसने शहरों को उनकी वायु गुणवत्ता के आधार पर अल्ट्राफाइन पार्टिकुलेट मैटर के स्तर के आधार पर मापा) के अनुसार, दिल्ली लगातार तीसरी बार वर्ष 2020 में विश्व का सबसे प्रदूषित राजधानी शहर था।

चुनौतियाँ:

  • यह एक छोटे से क्षेत्र में वायु प्रदूषण से तत्काल राहत प्रदान कर सकता है, लेकिन यह महँगा त्वरित समाधान उपाय हैं।
  • इससे 1 किमी. तक की हवा की गुणवत्ता पर असर हो सकता है।
    • हालाँकि दो वर्ष के अध्ययन में आईआईटी-बॉम्बे और आईआईटी-दिल्ली द्वारा वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जाएगा, जो यह भी निर्धारित करेगा कि विभिन्न मौसम की स्थितियों में टॉवर कैसे काम करता है तथा हवा के प्रवाह के साथ PM2.5 का स्तर कैसे बदलता है।

दिल्ली में प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिये उठाए गए अन्य कदम:

  • टर्बो हैप्पी सीडर (Turbo Happy Seeder-THS) ट्रैक्टर के साथ लगाई जाने वाली एक प्रकार की मशीन होती है जो फसल के अवशेषों को उनकी जड़ समेत उखाड़ फेंकती है। 
  • BS-VI वाहनों की शुरुआत इलेक्ट्रिक वाहनों (EV),  ऑड-ईवन को एक आपातकालीन उपाय के रूप में वाहनों के प्रदूषण को कम करने के लिये पूर्वी और पश्चिमी पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के निर्माण हेतु प्रेरित करती है।
  • ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का कार्यान्वयन। यह हवा की गुणवत्ता में गिरावट के रूप में चरणों में शुरू होने वाले प्रतिबंधों का एक समूह है, जो अक्तूबर-नवंबर की अवधि के लिये विशिष्ट है।
  • कम उत्सर्जन वाले पटाखों (ग्रीन क्रैकर्स) का प्रयोग।
  • CPCB के तत्त्वावधान में सार्वजनिक सूचना के लिये राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) का विकास।

आगे की राह

  • चूँकि इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो इसकी दक्षता को साबित करता है, सरकारों को इसके बजाय मूल कारणों को संबोधित करना चाहिये और वायु प्रदूषण से निपटने व उत्सर्जन को कम करने के लिये अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देना चाहिये।
  • यह वास्तव में दुर्भाग्यपूर्ण होगा यदि अन्य शहर किसी दावे का पालन करने और इन महँगे, अप्रभावी टावरों को स्थापित करने का निर्णय लेते हैं।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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