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जीव विज्ञान और पर्यावरण

दीपोर बील: इको-सेंसिटिव ज़ोन

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  • 08 Sep 2021
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये: 

इको-सेंसिटिव ज़ोन, दीपोर बील वन्यजीव अभयारण्य, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान, ब्रह्मपुत्र नदी  

मेन्स के लिये:

इको-सेंसिटिव ज़ोन के निर्धारण हेतु मानदंड

चर्चा में क्यों?    

हाल ही में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने दीपोर बील वन्यजीव अभयारण्य (असम) को पर्यावरण-संवेदी क्षेत्र/ इको-सेंसिटिव ज़ोन के रूप में अधिसूचित किया है।

प्रमुख बिंदु 

  • दीपोर बील:
    • दीपोर बील के बारे में:
      • यह असम की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक है और बर्डलाइफ इंटरनेशनल द्वारा एक महत्त्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र घोषित होने के अलावा राज्य का एकमात्र रामसर स्थल है।
      • यह असम के गुवाहाटी शहर के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और ब्रह्मपुत्र नदी का पूर्ववर्ती जल चैनल है।
      • यह झील गर्मियों में 30 वर्ग किमी. तक फैलती है और सर्दियों में लगभग 10 वर्ग किमी. तक कम हो जाती है। वन्यजीव अभयारण्य इस आर्द्रभूमि (बील) के भीतर 4.1 वर्ग किमी. में स्थित है।
    • महत्त्व:
      • यह जलीय वनस्पतियों और एवियन जीवों (Avian Fauna) के लिये एक अद्वितीय/अनूठा आवास है।
      • गुवाहाटी शहर के लिये एकमात्र प्रमुख स्टॉर्म वाटर स्टोरेज (Storm-Water Storage Basin) होने के अलावा इसका जैविक और पर्यावरणीय दोनों महत्त्व है।
      • यह कई स्थानीय परिवारों के लिये आजीविका का साधन प्रदान करती है।
        • हाल ही में असम के मछुआरे समुदाय की छह युवा लड़कियों ने एक बायोडिग्रेडेबल और कम्पोस्टेबल योगा मैट (Biodegradable and Compostable Yoga Mat) विकसित किया है जिसे 'मूरहेन योगा मैट' (Moorhen Yoga Mat) कहा जाता है।
    • चिंताएँ:
      • इसका ( दीपोर बील) जल विषाक्त हो गया है जिस कारण कई जलीय पौधे जिन्हें हाथियों द्वारा खाद्य के रूप में प्रयोग किया जाता था, समाप्त हो गए हैं।
      •  यहाँ दशकों पुराना रेलवे ट्रैक है  जिसे बढ़ाकर दोगुना करने के साथ ही विद्युतीकृत भी किया जाना है। इसके दक्षिणी किनारे पर मानव निवास और वाणिज्यिक इकाइयों द्वारा अतिक्रमण के चलते अपशिष्ट पदार्थों की डंपिंग (Garbage Dump) होती है।

Deepor-Beel

  • इको-सेंसिटिव ज़ोन:
    • परिचय:
      • इको-सेंसिटिव जोन (ESZ) या पर्यावरण संवेदी क्षेत्र, संरक्षित क्षेत्रों, राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आसपास 10 किलोमीटर के भीतर के क्षेत्र हैं।
      • संवेदनशील गलियारे, संपर्क और पारिस्थितिक रूप से महत्त्वपूर्ण खंडों और प्राकृतिक संयोजन के लिये महत्त्वपूर्ण क्षेत्र होने की स्थिति में 10 किमी. से अधिक क्षेत्र को भी इको-सेंसिटिव ज़ोन में शामिल किया जा सकता है।
      • ESZ को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा अधिसूचित किया जाता है।
      • इसका मूल उद्देश्य राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों के आस-पास कुछ गतिविधियों को विनियमित करना है ताकि संरक्षित क्षेत्रों के निकटवर्ती संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र पर ऐसी गतिविधियों के नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सके
    • ESZ में गतिविधियों का विनियमन:
      • प्रतिबंधित गतिविधियाँ: वाणिज्यिक खनन, मिलों, उद्योगों के कारण होने वाला प्रदूषण (वायु, जल, मिट्टी, शोर आदि), प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना (HEP), लकड़ी का व्यावसायिक उपयोग, राष्ट्रीय उद्यान के ऊपर गर्म हवा के गुब्बारे जैसी पर्यटन गतिविधियाँ, निर्वहन अपशिष्ट या किसी भी ठोस अपशिष्ट या खतरनाक पदार्थों का उत्पादन जैसी गतिविधियाँ।
      • विनियमित गतिविधियाँ: वृक्षों की कटाई, होटल और रिसॉर्ट्स की स्थापना, प्राकृतिक जल संसाधनों का वाणिज्यिक उपयोग, बिजली के तारों का विस्तार, कृषि प्रणाली में व्यापक परिवर्तन आदि।
    • अनुमत गतिविधियाँ: इसके तहत कृषि या बागवानी प्रथाओं, वर्षा जल संचयन, जैविक खेती, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग, सभी गतिविधियों के लिये हरित प्रौद्योगिकी को अपनाने आदि की अनुमति होती है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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