हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

जैवविविधता और पर्यावरण

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट

  • 22 Feb 2020
  • 6 min read

प्रीलिम्स के लिये

CSE, CACB

मेन्स के लिये

जल प्रदूषण संबंधी रिपोर्ट के प्रमुख प्रावधान व महत्त्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Central Pollution Control Board-CPCB) ने पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में बायो-केमिकल ऑक्सीजन डिमांड (Bio-chemical Oxygen Demand-BOD) के मानक पर लगभग 60 नदियों के प्रदूषित क्षेत्रों की पहचान की है।

प्रमुख बिंदु

  • दिल्ली स्थित सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट (Centre for Science and Environment-CSE) द्वारा पर्यावरण और विकास के मुद्दे पर प्रकाशित एक वार्षिक वक्तव्य में संपूर्ण भारत की नदियों पर किये गए शोध के बारे में बताया गया है।
  • शोध के अनुसार, CPCB ने संपूर्ण भारत में 350 से अधिक नदियों के प्रदूषित क्षेत्रों की पहचान की है और इनकी संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
  • शोध में कहा गया है कि पूर्वोत्तर राज्यों में प्रदूषित नदियों का विस्तार असम में भरालू, बसीठा, कोलॉन्ग, बोको, कोपिली तथा मेघालय में वमुखराह, उम्शिरपी, विखिर्वी, रावका, कमइ-उम, उम-म्यनेसेह, उम्पई, म्यनेसेह और सारबंग तक है।
  • मणिपुर में यह विस्तार नम्बुल और कोंगबा, मिज़ोरम में चिते, नगालैंड में धनसिरी और त्रिपुरा में गुमति नदियों तक है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एन्वायरमेंट

  • यह एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो भारत में पर्यावरण-विकास के मुद्दों पर थिंक टैंक के रूप में कार्य कर रहा है।
  • इस संगठन ने वायु और जल प्रदूषण, अपशिष्ट जल प्रबंधन, औद्योगिक प्रदूषण, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा संबंधी पर्यावरण के मुद्दों पर जागरूकता एवं शिक्षा का प्रसार करने की दिशा में महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1980 में की गई थी।
  • पर्यावरण शिक्षा और संरक्षण की दिशा में इसके योगदान के कारण वर्ष 2018 में इसे शांति, निरस्त्रीकरण और विकास के लिये इंदिरा गांधी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • शोध में पाया गया है कि औद्योगिक और खनन अपशिष्टों के निष्कासन तथा कचरे की डंपिंग से नदियों के प्रमुख प्रवाह क्षेत्र में प्रदूषण फैल रहा है। इस प्रदूषण का स्रोत अधिकतर कस्बों और शहरों के पास स्थित कारखाने और फैक्टरियाँ हैं।
  • शोध में बताया गया है कि 60% से अधिक अनुपचारित सीवेज को नदियों और नहरों में छोड़ दिया जाता है। परिणामस्वरूप देश की आधी नदियाँ प्रदूषित हो गई हैं, जिनमें गंगा, यमुना, साबरमती तथा दामोदर प्रमुख हैं।
  • शोध में नीति आयोग की समग्र जल प्रबंधन सूचकांक रिपोर्ट (Composition Water Management Index-CWMI) 2018 का संदर्भ लेते हुए बताया गया है कि देश में लगभग 70% ताज़े पानी के स्रोत दूषित हैं और 600 मिलियन से अधिक लोग अत्यधिक जल संकट का सामना कर रहे हैं।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड

  • केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक सांविधिक संगठन है। इसका गठन जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 के अधीन सितंबर, 1974 में किया गया था।
  • इसके अलावा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम,1981 के अधीन भी शक्तियाँ और कार्य सौंपे गए हैं।
  • यह पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के एक फील्ड संगठन के रूप में कार्य करता है तथा मंत्रालय को पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के उपबंधों के बारे में तकनीकी सेवाएँ भी प्रदान करता है।
  • इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

कार्य

  • जल एवं वायु प्रदूषण के नियंत्रण एवं निवारण तथा वायु गुणवत्‍ता में सुधार से संबंधित किसी भी मामले पर केंद्र सरकार को सलाह देना।
  • राज्‍य बोर्डों की गतिविधियों के बीच समन्‍वय स्‍थापित करना और उनके बीच मतभेदों को सुलझाना।
  • जल एवं वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और इसमें कमी हेतु एक राष्‍ट्रव्‍यापी कार्यक्रम के लिये योजना बनाना एवं उसका संचालन करना।
  • जल एवं वायु प्रदूषण के निवारण, नियंत्रण और इसमें कमी लाने के कार्य में लगे हुए कार्मियों हेतु प्रशिक्षण की योजना बनाना एवं प्रशिक्षण का आयोजन करना।
  • जल एवं वायु प्रदूषण से संबधित तकनीकी आँकड़े एकत्रि‍त करना, संग्रहण एवं प्रकाशित करना और जल एवं वायु प्रदूषण के प्रभावी निवारण, नियंत्रण या इसमें कमी हेतु उपाय करना।
  • शोध में यह भी बताया गया है कि पूर्वोत्तर भारत, जो कि देश के जल संसाधनों के लगभग 30% का प्रतिनिधित्व करता है, के कई क्षेत्रों में पानी की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है।
  • शोध के अनुसार, स्वच्छ और पर्याप्त पानी की उपलब्धता के आधार पर भारत जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में 120वें स्थान पर है।

स्रोत: AIR

एसएमएस अलर्ट
Share Page