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कोरोनावायरस: 21 दिन की लॉकडाउन अवधि ही क्यों?

  • 26 Mar 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

माध्य ऊष्मायन अवधि 

मेन्स के लिये:

महामारी आपदा प्रबंधन 

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत सरकार ने COVID-19 महामारी के चलते 21 दिवसीय लॉकडाउन (Lockdown) घोषित किया है। ऐसे में इस लॉकडाउन अवधि के पीछे के वैज्ञानिक आधार एवं महामारी विज्ञान (Epidemiological Significance) के महत्त्व को चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • 21 दिवसीय लॉकडाउन अवधि का निर्णय पर्याप्त वैज्ञानिक आँकड़ों के आधार पर लिया गया है। इबोला वायरस के संदर्भ में 21-दिवसीय लॉकडाउन अवधि पर विस्तृत चर्चा की गई थी तथा यह गणना वायरस की मानव मे अनुमानित ऊष्मायन (Incubation Period) अवधि पर आधारित थी।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 21 दिवसीय क्वारंटाइन (Quarantine) का निर्णय अतीत तथा वर्तमान के महामारी संबंधी आँकड़ों की व्याख्या के आधार पर लिया गया है।

लॉकडाउन का महत्त्व:

  • माध्य ऊष्मायन अवधि (Median Incubation Period): 
    • यह वायरस के शरीर में प्रवेश तथा रोग के लक्षणों/रोग के प्रकट होने के बीच की अवधि होती है।
    • जीव विज्ञान में, ऊष्मायन अवधि, विकास की किसी विशेष प्रक्रिया के लिये आवश्यक समय है। 

communicability

प्रसुप्ति अवधि (Latency period):

  • यह रोगजनक जीव से संपर्क होने तथा रोगी के शरीर द्वारा संक्रमण फैलाने की क्षमता के आरंभ होने के बीच की अवधि होती है।  
  • महामारी विज्ञान के अनुसार वर्तमान में मानव में वायरस की ऊष्मायन अवधि 14 दिन की होती है। एक सप्ताह की अवधि बढ़ाने पर अवशिष्ट संक्रमण (वायरस टेल ) भी समाप्त हो जाता है तथा इस प्रकार कुल 21 दिनों के बाद हम पूरी तरह से सुरक्षित स्तर में पहुँचते हैं। 
  • COVID-19 का वायरस एक नवीन प्रकार का कोरोनावायरस है, अत: इसकी ऊष्मायन अवधि 21 दिनों तक हो सकती है।  
  • साइंस डेली (Science Daily) की एक रिपोर्ट के अनुसार, COVID-19 के लिये औसत ऊष्मायन अवधि सिर्फ पाँच दिनों की होती है एवं 97.5% लोग जिनमें इस बीमारी के लक्षण प्रकट हुये, संक्रमण के 11.5 दिनों के भीतर प्रकट होते हैं।
  • वर्तमान 14 दिन की वायरस ऊष्मायन अवधि यू.एस. रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र  (U.S. Centers for Disease Control and Prevention) द्वारा सक्रिय निगरानी तथा साक्ष्यों के आधार पर अनुशंसित की गई है। 
  • संपर्क अनुरेखण (Contact Tracing):
    • यह उन लोगों की पहचान, आकलन और प्रबंधन की प्रक्रिया है, जो इस बीमारी की चपेट में है तथा अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। वायरस के संपर्क में आने वाले लोगों की 28 दिनों तक निगरानी तथा ट्रैस (Trace) किया जाता है।
    • यह समुदाय में पहले से ही संक्रमित लोगों से इस वायरस के प्रसार को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। 
  • ब्रीदिंग स्पेस (Breathing Space):
    • लॉकडाउन या क्वॉरंटाइन ‘ब्रीदिंग स्पेस’ भी बनाता है। यह लोगों को स्थिति की गंभीरता को समझने तथा सकारात्मक सार्वजनिक राय बनाने में मदद करता है। 
    • सभी भवनों, वाहनों और सतहों के कीटाणुशोधी बनाने तथा अस्पतालों को इस महामारी के अगले चरण के लिये तैयार करने में मदद करता है।

अनिश्चित काल तक लोग घरों में नहीं रह सकते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थिति की आवश्यकता को समझते हुए लोगों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने की आवश्यकता है। 

स्रोत: द हिंदू

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