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DNA विधेयक से जुड़ी चिंताएँ

  • 06 Feb 2021
  • 10 min read

चर्चा में क्यों? 

हाल ही में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन पर संसदीय स्थायी समिति ने अपनी एक सिफारिश में कहा है कि सरकार को डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2019 के संदर्भ में व्यक्त की गई चिंताओं को संबोधित करना चाहिये, जिसमें अपराध स्थल से प्राप्त डीएनए प्रोफाइल का एक राष्ट्रीय डेटा बैंक बनाने और समुदायों को लक्षित किये जाने जैसी चिंताएँ शामिल हैं।

  • गौरतलब है कि यह विधेयक एक केंद्रीय डेटा बैंक के अलावा क्षेत्रीय डेटा बैंक की स्थापना की बात करता है, परंतु डेटा के दुरुपयोग की संभावनाओं को कम करने के लिये संसदीय स्थायी समिति ने केवल एक राष्ट्रीय डेटा बैंक को स्थापित किये जाने की सिफारिश की है।

प्रमुख बिंदु:   

डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक, 2019 (मुख्य प्रावधान):

  • यह विधेयक अपराध, पितृत्व विवाद, प्रवास या आव्रजन और मानव अंगों के प्रत्यारोपण के मामलों में व्यक्तियों की पहचान स्थापित करने के लिये डीएनए प्रौद्योगिकी के उपयोग की अनुमति देता है। 
  • यह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड) डेटा बैंकों की स्थापना की परिकल्पना करता है, साथ ही प्रत्येक डीएनए डेटा बैंक में अपराध स्थल सूचकांक, संदिग्धों या विचाराधीन कैदियों तथा अपराधियों के सूचकांक को अलग-अलग तैयार कर सुरक्षित रखा जाएगा।
  • इस विधेयक में एक डीएनए नियामक बोर्ड की स्थापना की बात कही गई है, जो डीएनए प्रयोगशालाओं और डेटाबैंक की स्थापना तथा इनके लिये आवश्यक दिशा-निर्देशों, मानकों तथा प्रक्रियाओं के निर्धारण जैसे मुद्दों पर केंद्र एवं राज्य सरकारों को सलाह देगा।

समिति द्वारा उठाए गए मुद्दे:

  • डीएनए डेटा बैंक से जुड़े मुद्दे: अपराध स्थल से प्राप्त डीएनए प्रोफाइल के एक राष्ट्रीय डीएनए डेटा बैंक का जोखिम यह है कि इसमें लगभग सभी लोगों को शामिल किया जाएगा क्योंकि किसी अपराध स्थल पर अपराध के पहले और अपराध के बाद भी कई लोगों के डीएनए जमा हो सकते हैं और यह भी संभव है कि प्राप्त डीएनए से जुड़े लोगों का उस अपराध से कोई भी संबंध न हो।
  • डीएनए प्रोफाइलिंग से जुड़े मुद्दे: इस विधेयक के प्रावधानों के तहत की जाने वाली डीएनए प्रोफाइलिंग का दुरुपयोग धर्म, जाति या राजनीतिक विचारों आदि जैसे कारकों के आधार पर समाज के विभिन्न वर्गों को लक्षित करने के लिये किया जा सकता है।
    • डीएनए प्रोफाइलिंग वह प्रक्रिया है जिसके तहत एक विशिष्ट डीएनए पैटर्न, जिसे एक प्रोफाइल कहा जाता है, को एक व्यक्ति या शारीरिक ऊतक के नमूने से प्राप्त किया जाता है।
  • गैर-आपराधिक पृष्ठभूमि के व्यक्तियों के डीएनए प्रोफाइल का संग्रहण: 
    • इस विधेयक में भविष्य में किसी अपराध की जाँच के लिये संदिग्धों, अपराधियों, पीड़ितों और उनके रिश्तेदारों के डीएनए प्रोफाइल को संग्रहीत करने का प्रस्ताव किया गया है।.
    • विधेयक यह भी प्रावधान करता है कि दीवानी मामलों के लिये भी डीएनए प्रोफाइल डेटा बैंकों में संग्रहीत की जाएगी, हालाँकि इसके लिये एक स्पष्ट और अलग सूचकांक नहीं दिया गया है।
    • समिति ने ऐसे डीएनए प्रोफाइल के भंडारण की आवश्यकता पर सवाल उठाया है, साथ ही समिति ने यह भी रेखांकित किया है कि इस प्रकार का भंडारण निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और यह किसी सार्वजनिक उद्देश्य की पूर्ति भी नहीं करता है।
  • सहमति:
    • विधेयक के कई प्रावधानों में ‘सहमति’ की बात कही गई है परंतु उनमें से प्रत्येक मामले में एक मजिस्ट्रेट आसानी से सहमति के अधिकार की अवहेलना कर सकता है।
    • इस विधेयक में उस स्थिति या कारण को स्पष्ट नहीं किया गया है जब मजिस्ट्रेट सहमति  की अवहेलना कर सकता है।
  • मज़बूत डेटा संरक्षण का अभाव:
    • समिति ने राष्ट्रीय डीएनए डेटा बैंक में इतनी भारी संख्या में डीएनए प्रोफाइल रखे जाने पर उनकी सुरक्षा पर सवाल उठाया है।

विधेयक की आवश्यकता: 

  • अधिक संख्या में परीक्षण किये जाने की मांग:
    • वर्तमान में भारत में डीएनए परीक्षण अत्यंत सीमित पैमाने पर किये जा रहे हैं, इस क्षेत्र में लगभग 30-40 डीएनए विशेषज्ञ, 15-18 प्रयोगशालाओं में प्रतिवर्ष 3,000 से कम मामलों की जाँच करते हैं, जो देश की कुल आवश्यकता का 2-3% प्रतिनिधित्व करता है।
    • वर्तमान में एक उचित विनियमन के अभाव में डीएनए परीक्षण प्रयोगशालाओं के मानकों की निगरानी या उनका विनियमन नहीं किया जा सक्ता है।
  • गुमशुदा की पहचान में सहायक: 
    • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार, भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1,00,000 बच्चे लापता हो जाते हैं।
    • इस विधेयक से आपदा पीड़ितों के साथ-साथ अज्ञात मृतकों की पहचान करने में भी सहायता मिलेगी और यह बलात्कार तथा हत्या जैसे जघन्य अपराधों को बार-बार दोहराने वाले अपराधियों को गिरफ्तार करने में सहायक होगा।

वैश्विक स्तर पर डीएनए प्रोफाइलिंग की स्वीकार्यता की स्थिति:  

  • यूएसए इंटरपोल के ग्लोबल डीएनए प्रोफाइलिंग सर्वे रिज़ल्ट 2016 के अनुसार,संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और चीन सहित विश्व के 69 देशों में राष्ट्रीय डीएनए डेटाबेस है।
    • इन देशों के पास कम-से-कम 35,413,155 व्यक्तियों की आनुवंशिक जानकारी सुरक्षित  है।
    • डीएनए नमूने के निष्कर्ष, संग्रह और इसे बनाए रखने के लिये विभिन्न देशों के अलग-अलग नियम हैं।
  • मानव आनुवंशिक डेटा पर घोषणा (Declaration on Human Genetic Data,) जिसे वर्ष 2003 में यूनेस्को के 32वें आम सम्मेलन में सर्वसम्मति से अपनाया गया था, का उद्देश्य मानव गरिमा का सम्मान और मानव आनुवंशिक डेटा तथा जैविक नमूनों के संग्रहण, प्रसंस्करण, उपयोग एवं भंडारण में मानव अधिकारों व मौलिक स्वतंत्रता की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट(GIP): 

  • हाल ही में केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जीनोम इंडिया प्रोजेक्ट (GIP) नामक एक महत्वाकांक्षी जीन-मैपिंग परियोजना को भी मंज़री दी है, जिसका उद्देश्य पहले चरण में भारत भर से 10,000 जीनोम के नमूने एकत्र करना और उनका अनुक्रमण करना है।
  • जीन मैपिंग डीएनए प्रोफाइलिंग से अलग है क्योंकि डीएनए प्रोफाइलिंग किसी व्यक्ति की पहचान करने के लिये डीएनए के छोटे हिस्सों का उपयोग करता है, जबकि जीन मैपिंग में पूरे जीनोम का अनुक्रमण शामिल होता है।
  • जीन मैपिंग वैज्ञानिक और चिकित्सा उपयोगों के लिये की जाती है, जबकि डीएनए प्रोफाइलिंग मुख्य रूप से फोरेंसिक और आपराधिक जाँच के लिये की जाती है।

आगे की राह: 

  • समिति का सुझाव है कि देश में जल्द ही एक सक्षम पारिस्थितिकी तंत्र  बनाया जाना चाहिये, ताकि उच्चतम न्यायालय के विभिन्न फैसलों और संविधान की भावना के अनुरूप  डीएनए प्रोफाइलिंग सुनिश्चित हो सके।
  • निजता या डेटा संरक्षण बिल शीघ्र ही अपनाए जाने से यह व्यक्तियों को उनके अधिकारों के संरक्षण के अभाव में भी कुछ राहत प्रदान करेगा। साथ ही यह विशेष रूप से उच्चतम न्यायालय के निजता के अधिकार से जुड़े फैसले के बाद और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है।

स्रोत: इंडियन एक्सप्रेस

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