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जैव विविधता और पर्यावरण

जलवायु परिवर्तन और वैश्विक स्वास्थ्य

  • 16 Nov 2022
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

जलवायु परिवर्तन, जीवाश्म ईंधन, खाद्य असुरक्षा, हीटवेव, जूनोटिक रोग, संचारी रोग, WHO

मेन्स के लिये:

जलवायु परिवर्तन का वैश्विक स्वास्थ्य पर प्रभाव, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण

चर्चा में क्यों?

स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन पर लांसेट काउंटडाउन रिपोर्ट: हेल्थ एट द मर्सी ऑफ फॉसिल फ्यूल्स के अनुसार जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता से बीमारी, खाद्य असुरक्षा और गर्मी से संबंधित अन्य बीमारियों के जोखिम में वृद्धि हो रही है।

रिपोर्ट के निष्कर्ष:

  • स्वास्थ्य पर प्रभाव:
    • जलवायु परिवर्तन स्वास्थ्य के सामाजिक और पर्यावरणीय निर्धारकों को प्रभावित करता है- स्वच्छ हवा, सुरक्षित पेयजल, पर्याप्त भोजन और सुरक्षित आश्रय।
  • हीटवेव से प्रभावित जनसंख्या:
    • तेज़ी से बढ़ते तापमान ने लोगों, विशेष रूप से कमज़ोर वर्ग (65 वर्ष से अधिक उम्र और एक वर्ष से कम उम्र ) को अधिक प्रभावित किया है जिससे वर्ष 1986-2005 की तुलना में वर्ष 2021 में 3.7 बिलियन से अधिक लोग हीटवेव से प्रभावित हुए हैं।
  • संक्रामक रोग:
    • बदलती जलवायु संक्रामक रोग के प्रसार को प्रभावित कर रही है, जिससे उभरती बीमारियों और सह-महामारी का खतरा बढ़ रहा है।
    • उदाहरण के लिये यह रिकॉर्ड करता है कि तटीय जल विब्रियो रोगजनकों के संचरण के लिये अधिक अनुकूल हो रहा है।
    • मलेरिया संचरण के लिये उपयुक्त महीनों की संख्या अमेरिका और अफ्रीका के हाइलैंड क्षेत्रों में बढ़ी है।
  • खाद्य सुरक्षा:
    • जलवायु परिवर्तन से खाद्य सुरक्षा का हर आयाम प्रभावित हो रहा है।
    • उच्च तापमान सीधे फसल की पैदावार को खतरे में डालता है, कई बार फसलों को विकसित करने के लिये मौसम कम पड़ जाता है।
    • चरम मौसम की घटनाएँ आपूर्ति शृंखलाओं को बाधित करती हैं, जिससे खाद्य की उपलब्धता, पहुँच, स्थिरता और उपयोग में कमी आ जाती है।
    • कोविड-19 महामारी के दौरान अल्पपोषण की व्यापकता में वृद्धि हुई और वर्ष 2019 की तुलना वर्षमें 2020 में 161 मिलियन से अधिक लोगों को भूख का सामना करना पड़ा।
  • जीवाश्म ईंधन:
    • रूस-यूक्रेन युद्ध ने कई देशों को रूसी तेल और गैस के वैकल्पिक ईंधन की खोज करने या अपनाने के लिये प्रेरित किया है तथा उनमें से कुछ अभी भी पारंपरिक तापीय ऊर्जा को ही अपना रहे हैं।
    • कोयले का नए सिरे से उपयोग वायु की गुणवत्ता में परिवर्तन कर सकता है, साथ ही जलवायु परिवर्तन को तेज़ कर सकता है जो मानव अस्तित्व को खतरे में डालता है, भले ही यह एक अस्थायी परिवर्तन हो।

सुझाव:

  • स्वास्थ्य केंद्रित प्रतिक्रिया:
    • सह-मौजूदा जलवायु, ऊर्जा के लिये एक स्वास्थ्य केंद्रित प्रतिक्रिया और स्वस्थ, निम्न कार्बन युक्त भविष्य देने का अवसर प्रदान करता है।
      • वायु गुणवत्ता में सुधार से जीवाश्म ईंधन से उत्पन्न PM2.5 के संपर्क में आने से होने वाली मौतों को रोकने में मदद मिलेगी और कम कार्बन तनाव तथा शहरी क्षेत्रों में वृद्धि के परिणामस्वरूप शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा मिलेगा जिसका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव पड़ेगा।
  • संतुलित और अधिक पादप-आधारित आहारों की ओर संक्रमण:
    • संतुलित और अधिक पादप-आधारित आहारों की ओर त्वरित संक्रमण से मांस तथा दूध उत्पादन को कम करने में मदद करेगा साथ ही आहार से संबंधित मौतों को रोकने के अलावा ज़ूनोटिक रोगों के जोखिम को काफी हद तक कम करेगा।
    • इस प्रकार के स्वास्थ्य-केंद्रित बदलाव संचारी और गैर-संचारी रोगों के बोझ में कमी लाएंगे, स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं के तनाव को कम करेंगे जिससे अधिक मज़बूत स्वास्थ्य प्रणालियों का निर्माण किया जा सकेगा।
  • वैश्विक समन्वय:
    • सरकारों, समुदायों, नागरिक समाज, व्यवसायों और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यकर्त्ताओं के बीच वैश्विक समन्वय, वित्तपोषण, पारदर्शिता तथा सहयोग की आवश्यकता है ताकि उन कमज़ोरियों को दूर किया जा सके जिनसे विश्व में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।

 UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न: 

प्रश्न. 'जलवायु परिवर्तन' एक वैश्विक समस्या है। भारत जलवायु परिवर्तन से कैसे प्रभावित होगा? भारत के हिमालयी और तटीय राज्य जलवायु परिवर्तन से कैसे प्रभावित होंगे? (वर्ष 2017)

स्रोत: द हिंदू

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