हिंदी साहित्य: पेन ड्राइव कोर्स
ध्यान दें:

डेली अपडेट्स

कृषि

जलवायु परिवर्तन और कृषि

  • 07 Feb 2020
  • 5 min read

प्रीलिम्स के लिये:

जलवायु परिवर्तन

मेन्स के लिये:

जलवायु परिवर्तन और कृषि

चर्चा में क्यों?

हाल ही में किये गए एक अध्ययन में पाया गया कि उच्च तापमान और सूखे जैसी परिस्थितियों ने मिट्टी में रोगजनक कवक पाइथियम को पनपने में सबसे अधिक योगदान दिया है।

मुख्य बिंदु:

  • अनुसंधान ने इस वैज्ञानिक प्रमाणिकता को बढ़ाया है कि जलवायु परिवर्तन दुनिया भर में कृषि उत्पादकता को बुरी तरह से प्रभावित कर रहा है।
  • इन निष्कर्षों को एप्लाइड सॉइल इकोलॉजी के अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित किया गया था।

क्या था प्रयोग का तरीका?

  • वैज्ञानिकों की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने मिट्टी के विभिन्न प्रकारों की प्रतिरोध क्षमता का आकलन करने के लिये यूरोप में विभिन्न जलवायु स्थानों से ली गई मिट्टी का उपयोग किया जहाँ ये नमूने शीत (COOL) एवं तर (WET) स्कॉटलैंड, समशीतोष्ण पूर्वोत्तर जर्मनी और शुष्क एवं गर्म पूर्वी हंगरी से एकत्र किये गए थे।
  • जलवायु-नियंत्रित कक्षों में सूखे जैसी परिस्थितियों यथा; अत्यधिक गर्म (40 डिग्री सेल्सियस) और शुष्क (केवल आधी नमी की उपलब्धता) वातावरण वाली मिट्टी में मटर की बुवाई करके कृषि उत्पादकता का परीक्षण किया गया।

अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष:

  • आमतौर पर मिट्टी में सूक्ष्म जीव उपस्थित रहते हैं जो पौधों के लिये ढाल के रूप में कार्य करते हैं और कवक से उनकी रक्षा करते हैं। हालाँकि उच्च तापवृद्धि ने पौधों की रक्षा के लिये इन सूक्ष्म जीवों की क्षमता को कम कर दिया।
  • इसने पहले से ही आक्रामक पायथियम (Pythium Ultimum) को और भी व्यापक बना दिया।

Pythium Ultimum: एक पादप रोगजनक है। यह मक्का, सोयाबीन, आलू, गेहूँ, देवदार और कई सजावटी प्रजातियों सहित अन्य सैकड़ों पौधों में युवा रोपों का पतन और मृत्यु (Damping off) तथा जड़-सड़न रोगों (Root Rot Diseases) का कारण बनता है।

  • जो मिट्टी शुष्कता और गर्मी की अत्यधिक प्रतिरोधी होती है, चरम स्थितियों के कारण ठीक नहीं हो पाती है। यहाँ समय आयाम महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जलवायु-स्मार्ट कृषि (CSA):

  • यह एक दृष्टिकोण है, जो बदलती हुई जलवायु में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिये कृषि प्रणालियों को परिवर्तित और पुनर्जीवित करने के लिये आवश्यक क्रियाओं को निर्देशित करने में मदद करता है। CSA के निम्न तीन मुख्य उद्देश्य हैं:
    1. कृषि उत्पादकता और आय में लगातार वृद्धि प्राप्त करना
    2. जलवायु परिवर्तन के प्रति लोचशीलता का निर्माण करना
    3. ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करना या हटाना।
  • CSA स्थानीय से लेकर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कार्य करता है तथा विभिन्न हितधारकों को उनकी स्थानीय स्थितियों के अनुकूल कृषि रणनीतियों की पहचान करने में मदद करता है।
  • CSA, FAO के रणनीतिक उद्देश्यों के तहत संसाधन जुटाने के लिये 11 कॉर्पोरेट क्षेत्रों में से एक है। यह सतत् खाद्य और कृषि के लिये FAO के दृष्टिकोण के अनुरूप है तथा कृषि, वानिकी एवं मत्स्य पालन को अधिक उत्पादक व अधिक टिकाऊ बनाने के लिए FAO के लक्ष्य का समर्थन करता है।

आगे की राह:

  • बढ़ते जलवायु परिवर्तन ने भारतीय मौसम आधारित फसलों की सुभेद्यता को और तीव्र कर दिया है जहाँ नवीन तथा परंपरागत कृषि प्रणालियों यथा- जैविक कृषि, ज़ीरो बज़ट नेचुरल फार्मिंग, परमाकल्चर, प्राकृतिक कृषि आदि को अपनाया जाना चाहिये।

स्रोत: Down to Earth report,FAO

एसएमएस अलर्ट
Share Page