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सिविल सेवा सुधार

  • 29 Aug 2022
  • 13 min read

प्रिलिम्स के लिये:

मिशन कर्मयोगी, नागरिक चार्टर, ई-गवर्नेंस पर राष्ट्रीय सम्मेलन।

मेन्स के लिये:

सिविल सेवा में सुधार की आवश्यकता।

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के सबसे सम्मानित पुलिस अधिकारियों में से एक ने सरकार के अग्निपथ और सैन्य अधिकारियों के लिये अल्प-कालीन सेवा नियुक्ति (Short Service Commission) की तर्ज पर "नीतिपथ" योजना शुरू करने के मामले पर प्रकाश डाला है।

योजना की रूपरेखा:

  • परिचय:
    • अधिकारियों को 10, 25 और 30 साल की सेवा के बाद सेवा निवृत्त किया जा सकता है।
    • यह पुलिस सेवा में शीर्ष-संरचना में सुधार लाएगा और सार्वजनिक सेवा तथा निष्पादन की संस्कृति का निर्माण करेगा।
    • सरकार शीर्ष स्तर के पदों की संख्या से बाधित हुए बिना प्रवेश स्तर पर चार गुना अधिक उम्मीदवारों की भर्ती कर सकती है।
    • अखिल भारतीय सेवा में नियुक्त 600-1,000 उम्मीदवारों के स्थान पर, इससे प्रत्येक वर्ष लगभग 4,000 से अधिक पुलिस अधिकारी सेवा में प्रवेश कर सकते हैं।
      • चौथे वर्ष के प्रदर्शन समीक्षा के पश्चात उनमें से केवल 25% को ही सेवा पर रखा जाएगा।
  • संभावित लाभ:
    • इससे जूनियर स्तर पर बहुत सारे युवा और ऊर्जावान अधिकारी प्रवेश करेंगे, उन्हें प्रदर्शन करने हेतु मजबूत प्रोत्साहन मिलेगा और उन्हें प्रशासन में कार्य करने का अनुभव प्राप्त होगा।
      • शीर्ष 4,000 अखिल भारतीय रैंक धारकों की औसत गुणवत्ता शीर्ष 1,000 से स्पष्ट रूप से अलग न हो इसलिये चार वर्ष की समीक्षा अवधि सरकार को केवल परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों की तुलना में बेहतर पुलिस अधिकारियों को चयनित करने की सुविधा प्रदान करेगी।
    • चार वर्ष बाद सरकारी सेवा छोड़ने वालों के लिये आर्थिक संभावनाएँ भी विद्यमान हो और इस बात की संभावना भी है कि कई लोग स्वेच्छा से उच्च अध्ययन या निजी रोज़गार को छोड़ने और चुनने के विकल्प चयन करेंगे। ऐसे युवाओं के प्रशिक्षित और अनुभवी प्रबंधकीय संवर्ग के जुड़ने से अर्थव्यवस्था को व्यापक स्तर पर  लाभ होगा।
    • प्रत्येक पाँच वर्ष में प्रदर्शन समीक्षा और निकास व्यवस्था स्थापित करने से भारत की प्रशासनिक प्रणाली के संरचनात्मक सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
    • इसके अंतर्गत एक लेटरल एंट्री योजना उन लोगों के पुन: प्रवेश को समायोजित कर सकती है जिन्हें जूनियर स्तर पर शुरू में निकाल दिया गया हो लेकिन उन्होंने आगे पुनः सुधार किया हो।

सुधार की संभावना लिये क्षेत्र:

  • ICS का IAS में रूपांतरण:
    • स्वतंत्रता के बाद ICS के IAS में रूपांतरण ने प्रणाली में मूलतः स्वदेशी तत्त्व के समावेश का अभाव रहा।
    • इसका कारण यह था कि IAS को हमारे अपने और अनिवार्य रूप से लोक प्रशासन के भारतीय दर्शन से जोड़ने के लिये कोई ठोस प्रयास नहीं किया गया था।
    • परिणामस्वरूप, ICS का IAS में परिवर्तन केवल संक्षिप्त रूप के बदलाव में ही समाप्त हो गया।
    • आर्य चाणक्य, राजेंद्र चोल, विजयनगर प्रसिद्धि के हरिहर और बुक्का, छत्रपति शिवाजी महाराज या सयाजीराव गायकवाड़ जैसे महान भारतीय प्रशासकों की पसंद के शासन दर्शन को स्वतंत्रता के बाद भी बड़े पैमाने पर नज़रंदाज़ किया जाता रहा।
  • सुरक्षा के अनावश्यक और अत्यधिक तत्त्व:
    • शुरुआत सिविल सेवा कर्मियों के अत्यधिक सुरक्षा तत्त्वों का पुनर्वलोकन कर की जा सकती है।
    • सिविल सेवकों के प्रतिष्ठित क्लब में प्रवेश करने के बाद कोई भी दुनिया की ज़मीनी सच्चाई से दूर हो जाता है और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वह कभी अपने भीतर भी नहीं देखता है।
    • यह सुरक्षा कवच उन्हें लोगों की अपेक्षाओं के प्रति असंवेदनशील और असंबद्ध बनाता है; श्रेष्ठताबोध तथा अहंकार का मादक कॉकटेल उनकी सोच को प्रभावित करता है; एवं इससे भी अधिक चिंता की बात यह है कि यह सुरक्षा कवर उन्हें अपने राजनैतिक अधिकारियों के मुकाबले सत्ता में स्थायित्त्व का एहसास कराता है।
    • कई सिविल सेवा अधिकारियों का व्यवहार पारदर्शिता और जवाबदेही के प्रति उनकी पूर्ण उपेक्षा को दर्शाता है।
  • विशेषज्ञता का अभाव:
    • प्रशासनिक अधिकारियों से ऐसे कई मुद्दों को संभालने की अपेक्षा की जाती है जिनके लिये विशेष जानकारी की आवश्यकता होती है।
      • किस प्रकार आज के एक सचिव (इस्पात और खान) से कल सचिव (संस्कृति) के रूप में कार्यभार संभालने की अपेक्षा की जा सकती है?
    • जबकि सामान्यवादियों का भी अपना महत्त्व है, आज के समय में IAS अधिकारियों को कम से कम चार-पाँच महत्त्वपूर्ण समूहों जैसे शिक्षा-संस्कृति, वित्त, प्राकृतिक संसाधनों के साथ बुनियादी विकास और सामाजिक मंत्रालयों जैसे सामाजिक न्याय, श्रम, महिला एवं बाल, आदि में अलग करना व्यावहारिक होगा।
    • यह ज्ञान में अधिक से अधिक विविधिता लाएगा और अधिकारियों को अधिक प्रबुद्ध और व्यावहारिक निर्णय लेने के लिये सशक्त करेगा।
  • व्यवस्थित तंत्र की अनुपस्थिति:
    • उद्देश्य और प्रेरणा की भावना के पुन: समावेश के माध्यम से समय-समय पर डी-थिक-स्किनिंग सुनिश्चित करने के लिये अंतर्निहित तंत्र की भी आवश्यकता है।
    • बहुत ही कम समय में आदर्शवाद से युक्त कल के संघर्ष करने वाले आज 'प्रतिष्ठान' के अंग बन जाते हैं।
    • इससे बचने के लिये समय-समय पर अनुभव-आधारित और व्यावहारिक-ज्ञान केंद्रित नवीन परीक्षाओं को आयोजित करने से मदद मिल सकती है।

संबंधित पहल

  • मिशन कर्मयोगी:
    • यह राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता विकास कार्यक्रम (National Programme for Civil Services Capacity Building- NPCSCB) है। यह कुशल सार्वजनिक सेवा वितरण के लिये व्यक्तिगत, संस्थागत और प्रक्रिया स्तरों पर क्षमता निर्माण तंत्र में व्यापक सुधार है।
  • लेटरल एंट्री:
    • लेटरल एंट्री का अर्थ है जब निजी क्षेत्र के कर्मियों का चयन सरकारी प्रशासनिक पद पर सीमित अंतराल के लिये किया जाता है।
    • यह महत्त्वपूर्ण है क्योंकि समकालीन समय में प्रशासनिक मामलों के शीर्ष पर अत्यधिक कुशल और प्रेरित व्यक्तियों की आवश्यकता होती है, जिसके बिना सार्वजनिक सेवा वितरण तंत्र सुचारू रूप से कार्य नहीं करता है।
  • ई-समीक्षा:
    • यह महत्त्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों/परियोजनाओं के कार्यान्वयन के संबंध में शीर्ष स्तर पर सरकार द्वारा लिये गए निर्णयों के आधार पर निगरानी और अनुवर्ती कार्रवाई के लिये एक वास्तविक समय ऑनलाइन प्रणाली है।
  • सिटीज़न चार्टर:
    • सरकार ने सभी मंत्रालयों/विभागों के लिये सिटीज़न चार्टर अनिवार्य कर दिया है जिन्हें नियमित आधार पर अपडेट करने के साथ ही समीक्षा भी की जाती है।
  • ई-गवर्नेंस पर राष्ट्रीय सम्मेलन:
    • यह सरकार को ई-गवर्नेंस पहल से संबंधित अनुभवों का आदान-प्रदान करने के लिये उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के विशेषज्ञों, बुद्धिजीवियों के साथ जुड़ने के लिये एक मंच प्रदान करता है।
  • केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (CPGRAMS):
    • यह लोक शिकायत निदेशालय (DPG) तथा प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) के सहयोग से राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय ) द्वारा विकसित एक ऑनलाइन वेब-सक्षम प्रणाली है।
    • CPGRAMS किसी भी भौगोलिक स्थान से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा प्रदान करता है। यह नागरिक को संबंधित विभागों के साथ की जा रही शिकायत को ऑनलाइन ट्रैक करने में सक्षम बनाता है और DARPG को शिकायत की निगरानी करने में भी सक्षम बनाता है।
  • राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सेवा वितरण मूल्यांकन:
    • इसका उद्देश्य ई-गवर्नेंस सेवा वितरण की दक्षता पर राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों और केंद्रीय मंत्रालयों का आकलन करना है।

आगे की राह

  • बाह्य उत्तरदायी तंत्र पर ध्यान देना:
    • सार्वजनिक मामलों का प्रबंधन करने वाली राज्य संस्था के सामने आने वाली नई चुनौतियों के लिये सुधार एक स्पष्ट प्रतिक्रिया है; इस तरह के प्रयास के मूल में बदले हुए परिदृश्य में प्रशासनिक क्षमता को बढ़ाना निहित है।
    • चूँकि सिविल सेवक राजनीतिक अधिकारियों (Political Executives) के प्रति जवाबदेह होते हैं और इसके परिणामस्वरूप सिविल सेवाओं का राजनीतिकरण होता है, इसलिये नागरिक चार्टर, सामाजिक लेखापरीक्षा तथा सिविल सेवकों के बीच परिणाम अभिविन्यास को प्रोत्साहित करने जैसे बाहरी जवाबदेही तंत्र पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिये।
  • शासकीय अंतराल को भरना:
    • दुनिया भर में हर जगह सरकार की क्षमता सामाजिक-आर्थिक विकास से पिछड़ रही है।
    • यह शासकीय अंतराल भारत में अधिक है तथा व्यापक होता जा रहा है। इसे भरने के लिये उपयुक्त प्रशिक्षण और प्रोत्साहन के साथ पर्याप्त संख्या में प्रतिभा की आवश्यकता है।
    • India@100 के सफल परिदृश्य में देश को और बेहतर तरीके से कार्य करना चाहिये जिसमे नीति पथ महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है ।

UPSC सिविल सेवा परीक्षा विगत वर्ष के प्रश्न:

प्रश्न. "आर्थिक प्रदर्शन संस्थागत गुणवत्ता एक निर्णायक चालक है"। इस संदर्भ में लोकतंत्र को सुदृढ़ करने के लिये सिविल सेवा में सुधारों के सुझाव दीजिये। (2020)

स्रोत: लाइवमिंट

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