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नीतिशास्त्र

‘नागरिक घोषणापत्र एवं जन सेवा प्रदायगी’

  • 01 Aug 2020
  • 9 min read

सरकार द्वारा अपने देश के नागरिकों को विभिन्न प्रकार की सेवाएँ (Services) उपलब्ध कराई जाती हैं जिन्हें जन सेवाएँ (Public Services) कहते हैं।

  • इन जन सेवाओं को जनता को उपलब्ध कराना ही जन (नागरिक) सेवा प्रदायगी (Public Services Delivery) कहा जाता है।
  • वस्तुत: सरकारी सार्वजनिक सेवाओं को स्थानीय सरकार, राज्य सरकार या केंद्र सरकार द्वारा जनता तक पहुँचाया जाता है। उदाहरण के लिये सीवेज एवं कचरा निपटान, सड़क की सफाई, सार्वजनिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, दूरसंचार सेवाएँ आदि।
  • नागरिक सेवाओं को गुणवत्ता के साथ-साथ समय पर जनता तक पहुँचाना आवश्यक है तभी शासन एवं प्रशासन की सार्थकता सिद्ध हो सकती  है।
  • परंतु वर्तमान में शासन एवं प्रशासन में विभिन्न परिवर्तनों एवं बढ़ती जटिलताओं के कारण नागरिक सेवाओं की नागरिकों तक गुणवत्तापूर्ण एवं समय पर पहुँच सुनिश्चित करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है।
  • वस्तुत: 1990 के दशक में उदारीकरण, निजीकरण एवं वैश्वीकरण (LPG) की परिघटनाओं के विकास के साथ वैश्विक एवं राष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर शासन और प्रशासन में संरचनात्मक एवं प्रकार्यात्मक बदलाव आने शुरू हुए।
  • 1980 के दशक में सतत विकास एवं 1990 के दशक में मानव विकास की अवधारणा ने जन्म लिया जिससे सुशासन की अवधारणा पर बल देना आवश्यक हो गया।
  • समय के साथ सामाजिक आर्थिक विकास को न्यायपूर्ण एवं मानवीय बनाने के उद्देश्य से नागरिक घोषणापत्रों की नवीन अवधारणा का विकास हुआ।
  • जन अधिकारों की सुरक्षा, नागरिकों को मूलभूत सेवाओं की समय पर प्रदायगी, उपभोक्ता अधिकार संरक्षण जैसे लक्ष्य न केवल नागरिक अधिकार सशक्तीकरण के लिये बल्कि राज्य एवं सिविल सोसायटी की मजबूती के लिये भी आवश्यक समझे जाने लगे। इसी संदर्भ में नागरिक घोषणापत्रों की आवश्यकता महसूस की गई।
  • ध्यातव्य है कि नागरिक घोषणापत्र का संबंध सुशासन की स्थापना से है एवं सुशासन की एक शर्त के रूप में नागरिक सेवाओं की समय पर गुणवत्तापूर्ण प्रदायगी आवश्यक है।

क्या है नागरिक घोषणापत्र ( Citizen Charter)?

  • नागरिक घोषणापत्र एक ऐसा लिखित दस्तावेज है जिसमें संगठन की अपनी सेवाओं के मानक, संगठन संबंधी सूचनाओं, पसंद और परामर्श, सेवाओं तक भेदभावरहित पहुँच, शिकायत निवारण एवं शिष्टाचार आदि के संबंध में अपने नागरिकों के प्रति प्रतिबद्धताओं का व्यवस्थित विवरण होता है ।
  • नागरिक घोषणापत्र में सार्वजनिक सेवाओं का नागरिक केंद्रित होना सुनिश्चित किया जाता है।
  • नागरिक घोषणपत्र सुशासन के तीन महत्त्वपूर्ण घटकों यथा- पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं जवाबदेहिता को लागू करने तथा सरकार एवं नागरिकों के मध्य अंतराल को कम करने के लिये एक महत्त्वपूर्ण साधन है।

भारत में नागरिक घोषणापत्र

  • गौरतलब है कि ब्रिटेन में लोक सेवाओं में दक्षता लाने के लिये 1991 में नागरिक घोषणापत्र लागू किया गया।
  • भारत में 1997 में भारतीय प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन आयोजित किया गया।
  • इस सम्मेलन में प्रभावी एवं जिम्मेदार प्रशासन हेतु एजेंडा पर सिफारिश की गई कि सभी लोक संगठनों के लिये नागरिक घोषणापत्र लाने के प्रयास किये जाएँ।
  • इसके तहत चिन्हित मंत्रालयों एवं विभागों में नागरिक घोषणापत्र के निर्माण की निगरानी हेतु एक समिति का गठन किया गया।
  • 2004 में प्रशासनिक सुधार एवं शिकायत निवारण विभाग ने नागरिक घोषणापत्र पर एक प्रपत्र प्रस्तुत किया जिसमें आदर्श नागरिक घोषणापत्र के मार्गदर्शक सिद्धांत बताए गए।
  • इसके अनुसार घोषणापत्र में निम्नलिखित बिंदु सम्मिलित होने चाहिये:
    • विज़न एवं मिशन का विवरण।
    • संगठन द्वारा संपादित कार्यों का विवरण।
    • संगठन से जुड़े ग्राहक समूहों का विवरण।
    • ग्राहकों को प्रदत्त सेवाओं का विवरण।
    • जन शिकायत निवारण से संबंधित जानकारी।
    • चार्टर का सरल होना आवश्यक।

सेवा प्रदायगी में नागरिक घोषणापत्र की भूमिका

  • सेवा प्रदायगी को बेहतर करना अर्थात् सार्वजनिक सेवाओं की समय पर गुणवत्तापूर्ण उपलब्धता सुनिश्चित करने में सहायक होता है।
  • नागरिकों के प्रति अधिकारियों की ज़‌िम्मेदारी एवं जबावदेही को सुनिश्चित करता है।
  • पारदर्शिता, उत्तरदायित्व एवं जबावदेही को सुनिश्चित कर प्रशासन में जनता की भागीदारी बढ़ाने में सहायक होता है ।
  • नागरिकों को जन सेवाओं की प्राप्ति संबंधी अधिकारों के प्रति जागरूक करने में सहायक होता है।
  • यह सुनिश्चित करता है कि शिकायत के संबंध में कहाँ संपर्क करना है।
  • कर्मचारियों में अपने कार्य के प्रति सकारात्मक दबाव एवं प्रतिबद्धता सुनिश्चित करने में सहायक होता है  जिसका सीधा लाभ नागरिकों को प्राप्त होता है।
  • नागरिकों एवं प्रशासन के मध्य अंतराल को कम करने में सहायक होता है।

नागरिक घोषणापत्र को प्रभावी बनाने के उपाय

  • आदर्श नागरिक घोषणापत्र संहिता का पालन किया जाए।
  • नागरिक घोषणापत्र बनाते समय शोध और अनुसंधान पर विशेष बल दिया जाना चाहिये।
  • नागरिक घोषणापत्र के निर्माण की प्रक्रिया को पारदर्शी व परामर्शी बनाने के लिये नागरिक समाज एवं मीडिया की प्रभावी भूमिका को सुनिश्चित किया जाना चाहिये।
  • नागरिक घोषणापत्र का समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन किया जाना चाहिये।
  • जन प्रतिक्रियाओं के आधार पर नागरिक घोषणापत्र में सुधार किया जाना चाहिये।
  • नागरिक घोषणापत्र को वैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिये।
  • ग्राहकों की अपेक्षाओं का उल्लेख किया जाना चाहिये।

नागरिक घोषणापत्र का मूल्यांकन

वर्ष 2002-03 में प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत निवारण विभाग ने एक निजी एजेंसी द्वारा तथा वर्ष 2008 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा विभागीय नागरिक घोषणापत्रों का मूल्यांकन  और निम्नलिखित कमियों का उल्लेख किया गया-

  • अधिकांश नागरिक घोषणापत्रों का प्रारूप ठीक नहीं होता तथा उसमें महत्त्वपूर्ण सूचनाओं का अभाव होता है।
  • अधिकांश घोषणापत्रों के निर्माण में पारदर्शिता एवं परामर्शी प्रक्रिया का अभाव होता है।
  • नागरिक घोषणापत्रों में नवोन्मेष एवं अद्यतन जानकारियों का अभाव होता  है।
  • समय-समय पर पुनर्मूल्यांकन नहीं किया जाता।
  • जागरूकता एवं जागरूकता प्रसार के प्रयास का अभाव पाया गया।
  • लोक संगठनों में नागरिक घोषणापत्र के प्रति रुचि का अभाव देखा गया।
  • निष्कर्षत: नागरिक घोषणापत्र नागरिक सेवाओं को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने तथा सुशासन की स्थापना करने में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण है परंतु इसकी कमियों को दूर किये जाने की आवश्यकता है।
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