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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

चीन तिब्बत में बना रहा नया बाँध

  • 24 Jan 2023
  • 6 min read

प्रिलिम्स के लिये:

वास्तविक नियंत्रण रेखा, माब्जा ज़ांगबो नदी, गंगा नदी, ब्रह्मपुत्र नदी।

मेन्स के लिये:

तिब्बत में चीन द्वारा बनाए जा रहे नए बाँध के निर्माण पर चिंता।

चर्चा में क्यों?

भारत, नेपाल और तिब्बत के ट्राई-जंक्शन (Tri-Junction) के करीब चीन द्वारा तिब्बत में माब्जा ज़ांगबो नदी पर नए बाँध का निर्माण, साथ ही LAC (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के पूर्वी और पश्चिमी क्षेत्रों में सैन्य तैनाती तथा दोहरे उपयोग वाले अवसंरचना के निर्माण में वृद्धि चिंता का विषय बना हुआ है।

पृष्ठभूमि: 

  • चीन द्वारा यह कदम वर्ष 2021 में यारलुंग ज़ांगबो के निचले क्षेत्र में 70 गीगावाट बिजली उत्पादन के लिये एक बड़े बाँध के निर्माण की योजना की घोषणा के बाद उठाया गया है। यह देश के थ्री गोर्जेज़ बाँध (Three Gorges Dam) द्वारा उत्पादित विद्युत क्षमता से तीन गुना ज़्यादा है, साथ ही स्थापित क्षमता के मामले में सबसे बड़ा जलविद्युत संयंत्र है।
    • ब्रह्मपुत्र, जिसे चीन में यारलुंग त्संग्पो के नाम से जाना जाता है, मानसरोवर झील से निकलने वाली इस नदी की कुल लंबाई 2,880 किमी. है और इसका वितरण तिब्बत में 1,700 किमी., अरुणाचल प्रदेश और असम में 920 किमी. तथा बांग्लादेश में 260 किमी. है। यह मीठे जल के स्रोत का लगभग 30% और भारत की जलविद्युत क्षमता का 40% हिस्सा है।

बाँध की अवस्थिति:

  • यह नया बाँध ट्राई-जंक्शन(Tri-Junction) से लगभग 16 किमी. उत्तर में स्थित है और उत्तराखंड के कालापानी क्षेत्र के नज़दीक है। 
  • यह बाँध गंगा की एक सहायक नदी मब्ज़ा ज़ांगबो पर बना है।
  • तिब्बत के बुरांग काउंटी में नदी के उत्तरी किनारे पर बाँध निर्माण की गतिविधि मई 2021 से देखी गई है। 
  • मब्ज़ा ज़ांगबो नदी भारत में गंगा नदी में मिलने से पहले नेपाल के घाघरा या करनाली नदी में मिलती है।

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चिंताएँ:

  • जल पर प्रभुत्त्व: 
    • चीन एक जलाशय के साथ एक तटबंध प्रकार का बाँध बना रहा है जो भविष्य में इस क्षेत्र के जल पर चीन के नियंत्रण को लेकर चिंता बढ़ाता है।
  • सैन्य प्रतिष्ठान की संभावना:
    • जल का उपयोग करने के अलावा ट्राई-जंक्शन के पास चीन द्वारा एक सैन्य प्रतिष्ठान बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि चीन ने पहले भी अरुणाचल प्रदेश के पास यारलुंग ज़ांगबो नदी क्षेत्र में सैन्य प्रतिष्ठान विकसित किया था।
  • जल की कमी:
    • चीन इस बाँध का उपयोग न केवल मार्ग परिवर्तन के लिये कर सकता है, बल्कि जल के संग्रहण हेतु भी कर सकता है जिससे मब्ज़ा ज़ांगबो नदी पर निर्भर क्षेत्रों में जल की कमी हो सकती है और नेपाल में घाघरा एवं करनाली जैसी नदियों में भी जल स्तर घट सकता है।
  • चीन द्वारा विवादित क्षेत्र पर दावों को मज़बूत करना: 
    • सीमा के करीब बाँधों का निर्माण कर चीन विवादित क्षेत्रों पर अपना दावा मज़बूत कर सकता है। 

चीन हाइड्रो आधिपत्य का लक्ष्य: 

  • चीन ने सिंधु, ब्रह्मपुत्र और मेकांग पर नदियों के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिये बड़ी संख्या में बाँध और तटबंध बनाए हैं।
  • तिब्बत पर कब्ज़े के साथ चीन ने 18 देशों से होकर बहने वाली नदियों के उद्गम बिंदुओं पर नियंत्रण कर लिया है। 
  • चीन ने हज़ारों बाँधों का निर्माण किया है, जो अचानक पानी छोड़े जाने पर बाढ़ या पानी को रोके जाने पर सूखे की स्थिति उत्पन्न कर सकते हैं, साथ ही नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर सकते हैं जिससे सामान्य जन-जीवन बाधित हो सकता है।
  • चीन की ब्रह्मपुत्र नदी पर चार बाँध बनाने की योजना है, जिससे ब्रह्मपुत्र नदी का प्रवाह प्रभावित होगा। भारत ने चीन के समक्ष इस बाँध निर्माण पर आपत्ति दर्ज कराई है।
  • चीन ने बांग्लादेश के साथ हाइड्रोग्राफिक डेटा साझा करते हुए इसे भारत के साथ साझा करने से मना कर दिया, इसके परिणामस्वरूप असम में बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर विनाश हुआ, जिसके लिये भारत तैयार नहीं था।
  • चीन पहले ही मेकांग नदी पर 11 विशाल बाँध बना चुका है, जो दक्षिण-पूर्व-एशियाई देशों के लिये चिंता का विषय है।

  यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. "चीन अपने आर्थिक संबंधों और सकारात्मक व्यापार अधिशेष का उपयोग एशिया में संभाव्य सैनिक शक्ति हैसियत को विकसित करने के लिये उपकरणों के रूप में इस्तेमाल कर रहा है"। इस कथन के प्रकाश में उसके पड़ोसी के रूप में भारत पर इसके प्रभाव पर चर्चा कीजिये। (2017)

स्रोत: द हिंदू

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