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शासन व्यवस्था

व्यवहार परिवर्तन में कानून की भूमिका

  • 27 Sep 2019
  • 7 min read

भूमिका

कानून प्रणाली समाज में लोगों के अधिकारों को मान्यता प्रदान करने और कर्त्तव्यों के निर्धारण में महत्त्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है।

  • कानून नागरिकों के लिये आचरण के आदर्श स्थापित करता है।
  • कानून के अनुपालन का समाज के अन्य क्षेत्रों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। हालाँकि नागरिकों के व्यवहार में परिवर्तन लाने में कानून की प्रभावकारिता अभी भी बहस का विषय है।

ऐसे उदाहरण जहाँ व्यवहार में परिवर्तन लाने में कानून सफल रहे

  • सार्वजनिक व्यवहार को प्रभावित करने के मामले में कानूनों के सफल होने की अधिक संभावना है। जैसे धूम्रपान को नियंत्रित करने के लिये स्वास्थ्य चेतावनी सहित कई उपायों का उपयोग किया जाता हैं।
  • लेकिन एक कारक जिसने धूम्रपान में निरंतर गिरावट लाने में योगदान किया है, वह है सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पर प्रतिबंध।
  • मनुष्य किसी व्यवहार की अपेक्षित लागत के आधार पर भी एक निषिद्ध गतिविधि में संलग्न होने के बारे में निर्णय लेते हैं।
  • यदि सज़ा की गंभीरता और संभावना किसी गतिविधि से प्राप्त होने वाले लाभ या आनंद से अधिक है, तो व्यक्ति उस व्यवहार से बचना चाहेगा।
  • जैसे संशोधित मोटर वाहन अधिनियम, 2019 ने जुर्माने को अप्रत्याशित रूप से बढ़ा कर लोगों को यातायात नियमों का पालन करने के लिये बाध्य किया है।

ऐसे उदाहरण जहाँ व्यवहार में परिवर्तन लाने में कानून सफल नहीं रहे

  • लिंग समानता के लिये केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं होगा, खासकर जब धार्मिक मुद्दों की बात हो।
  • ट्रिपल तलाक़ को प्रतिबंधित करने वाले कानून को पारित करने के बाद भी पति द्वारा मुस्लिम महिलाओं पर किये जाने वाले अत्याचारों का अंत नहीं हुआ है।
  • इसके अलावा संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह भी होते हैं जिन्हें कानून द्वारा विनियमित नहीं किया जा सकता है।
  • संज्ञानात्मक पूर्वाग्रह विचार, तर्क-शक्ति या चीज़ों को याद रखने की प्रक्रियाओं संबंधी त्रुटियाँ हैं जो किसी की पसंद और निर्णय को प्रभावित करती हैं। मस्तिष्क अपने दिन-प्रतिदिन के मामलों के बारे में निर्णय लेने के लिये इन पूर्वाग्रहों का प्रयोग करता है।
  • जैसे अमेरिका से लेकर गुजरात और केरल जैसे भारतीय राज्यों में शराबबंदी लागू कर नागरिकों को शराब पीने से रोकने के प्रयासों में ख़ास सफलता नहीं मिली है।
  • समाज में गहराई तक जड़ जमाए बैठे नस्ल, लिंग, संबंधी पूर्वाग्रहों को मिटाने के लिये कानून बनाना लगभग असंभव है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने IPC की धारा 377 को रद्द करते हुए समलैंगिकता को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया है। लेकिन फिर भी LGBTQ+ समुदाय को अभी समाज में स्वीकृति नहीं मिली है।

अन्य मामले जहाँ कानून सामाजिक परिवर्तन लाने में विफल रहा है

  • धारा 370 का निरसन, कश्मीर के लोगों को भारत के बाकी हिस्सों से भावनात्मक रूप से एकीकृत करने में विफल रहा है।
  • राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण की समस्या का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के दौरान पटाखों पर प्रतिबंध लागू किया। इसके बावजूद दिवाली के बाद की सुबह दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में काफी वृद्धि देखी गई थी।

व्यवहार परिवर्तन हेतु वैकल्पिक रणनीतियाँ

नज़ सिद्धांत: यह व्यवहारात्मक विज्ञान की संकल्पना है जिसमें बिना दबाव के तथा सकारात्मक दिशा-निर्देशों और परोक्ष सुझावों द्वारा लोगों को वांछनीय और लाभकारी व्यवहार अपनाने हेतु प्रेरित किया जाता है।

  • इस सिद्धांत का उपयोग भारत में कर अनुपालन बढ़ाने या गरीब परिवारों आदि में ड्रॉप आउट दर को कम करने में किया जा सकता है।

ICE मॉडल: सूचना, शिक्षा और संचार (Information, Education and Communication-ICE) ऐसा उपाय है जो एक निर्धारित समयावधि में किसी विशिष्ट समस्या के बारे में लक्षित समूह के व्यवहार को बदलने या सुदृढ़ करने का प्रयास करता है।

  • अमेरिका में पिछले 30 वर्षों में LGBTQ+ समुदाय के प्रति दृष्टिकोण में व्यापक परिवर्तन हुआ है। यह नाटकीय बदलाव किसी कानून के कारण नहीं हुआ, बल्कि बहस और विचार-विमर्श के कारण समाज में विकसित हुई परानुभूति (Empathy) का परिणाम है।

छात्रों की भूमिका: समाज में सांस्कृतिक परिवर्तन लाने के लिये छात्र परिवर्तन के वाहक की भूमिका निभा सकते हैं।

  • स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिये स्वच्छाग्रही बनने में छात्रों द्वारा निभाई गई भूमिका इसका सफल उदाहरण है।

नेतृत्व की भूमिका: समाज के शीर्ष नेतृत्व द्वारा की गई अपील भी समाज के बड़े भाग को प्रभावित करती है।

  • स्वच्छ भारत मिशन और बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना की सफलता में भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा जनता से की गई अपील को इसकी मिसाल माना जा सकता है।

नागरिक समाज की भूमिका: नागरिक समाज लोगों और सरकार के बीच एक सेतु का काम कर सकता है।

  • उदाहरण के लिये नागरिक समाज कश्मीर समस्या के समाधान में सहयोगी की भूमिका निभा सकता है।

निष्कर्ष

  • मानव गतिविधि और व्यवहार से संचालित समस्या के समाधान के लिये सरकार और न्यायालयों से परे दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
  • अच्छे और प्रभावी नियमों की भी अपनी भूमिका होती है, लेकिन सांस्कृतिक और व्यावहारिक बदलाव सबसे महत्त्वपूर्ण तत्त्व है।
  • इस संदर्भ में महात्मा गांधी की यह उक्ति ध्यान में रखी जानी चाहिये कि जो परिवर्तन आप दूसरों में देखना चाहते हैं, वह परिवर्तन आप खुद में लाइये।

स्रोत : लाइवमिंट

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