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सामाजिक न्याय

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर कैग की रिपोर्ट

  • 13 Dec 2019
  • 8 min read

प्रीलिम्स के लिये:

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना

मेन्स के लिये:

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना पर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट

चर्चा में क्यों?

हाल ही में भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (The Comptroller and Auditor General of India-CAG) द्वारा प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (Pradhan Mantri Ujjwala Yojana-PMUY) से संबंधित एक रिपोर्ट संसद में पेश की गई है।

रिपोर्ट से संबंधित मुख्य बिंदु:

  • इस रिपोर्ट में CAG द्वारा PMUY के तहत प्रदान किये जाने वाले घरेलू सिलेंडर के व्यावसायिक उपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की गई है क्योंकि CAG द्वारा किये गए ऑडिट (Audit) में 1.98 लाख लाभार्थियों को औसतन 12 से अधिक सिलेंडरों की वार्षिक खपत करते पाया गया।
  • CAG ने कहा कि इस तरह के लाभार्थियों द्वारा खपत का यह स्तर उनकी बीपीएल (Below Poverty Line-BPL) स्थिति की तुलना में अत्यधिक था।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि इस योजना के तहत 13.96 लाख उपभोक्ताओं द्वारा एक महीने में 3 से 41 बार तक LPG सिलेंडर रिफिल कराए जा रहे हैं, वहीं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के आँकड़ों के मुताबिक, 3.44 लाख ऐसे उपभोक्ताओं का मामला भी सामने आया है जो एक दिन में 2 से 20 LPG सिलेंडर रिफिल करा रहे हैं, जबकि इनके कनेक्शन की वैधता केवल एक सिलेंडर तक सीमित है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च, 2019 तक ऑयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा 7.19 करोड़ कनेक्शन जारी किये गए जो कि मार्च 2020 तक तय किये गए 8 करोड़ कनेक्शन के लक्ष्य का लगभग 90 फीसदी था।
  • रिपोर्ट के अनुसार, PMUY योजना के तहत लाभार्थियों की पहचान में शिथिलता बरती गई तथा 9978 LPG कनेक्शन सामाजिक, आर्थिक एवं जाति आधारित जनगणना ( Socio-Economic and Caste Census-SECC) की संक्षिप्त घरेलू सूची, अस्थायी पहचान संख्या (Abridged Household List Temporary Identification Numbers-AHL TINs) में पंजीकृत न होने के बावजूद भी प्रदान किये गए।

पुरुषों को भी दिया गया लाभ:

  • यह योजना BPL परिवार की महिलाओं के लिये प्रारंभ की गई थी परंतु IOCL सॉफ्टवेयर में इनपुट सत्यापन जाँच की कमी के कारण पुरुषों को भी 1.88 लाख कनेक्शन जारी किये गए।

नाबालिगों को भी कनेक्शन:

  • सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों को 80 हज़ार कनेक्शन जारी करने की अनुमति दी गई, वहीं 8.59 लाख कनेक्शन उन लाभार्थियों को जारी किये गए जो SECC-2011 के आँकड़ों के अनुसार नाबालिग थे। यह प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के दिशा-निर्देशों तथा एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर, 2000 (LPG Control Order, 2000) का उल्‍लंघन है।

रिपोर्ट से संबंधित अन्य तथ्य:

  • 12.46 लाख लाभार्थी ऐसे भी पाए गए जिनके नाम SECC-2011 तथा PMUY के आँकडों में समान नहीं थे।
  • लगभग 12,465 मामलों में डुप्लीकेट कनेक्शन की समस्या सामने आई।
  • इनपुट सत्यापन जाँच में कमी के कारण लगभग 42,187 ऐसे कनेक्शन जारी किये गए जिनका विवरण SECC-2011 में अनुपस्थित था।
  • इस रिपोर्ट के अनुसार, 4.35 लाख कनेक्शन ऐसे भी थे जिन्हें जारी होने में निर्धारित 7 दिन की समय-सीमा से अधिक लगभग 365 दिन से अधिक का समय लगा।
  • लाभार्थियों में 5 किलोग्राम के सिलेंडर का वितरण न करते हुए इसके उपयोग को प्रोत्साहन नहीं दिया गया।
  • LPG गैस के निरंतर उपयोग को प्रोत्साहित करना एक बड़ी चुनौती भी है क्योंकि लाभार्थियों के एक वर्ग के वार्षिक औसत रिफिल खपत में गिरावट आई है।
  • इस योजना के तहत जिन 1.93 करोड़ उपभोक्ताओं को कनेक्शन दिया गया था, उनमें से एक उपभोक्ता वार्षिक रूप से केवल 3.66 LPG ही रिफिल करवा पाता है।
  • वहीं 31 दिसंबर, 2018 तक 3.18 करोड़ उज्ज्वला उपभोक्ताओं के आधार पर देखा जाए तो प्रति उपभोक्ता सिर्फ 3.21 रिफिल का प्रयोग ही कर रहा है। इसका अर्थ यह है कि लोगों को इस योजना के तहत LPG कनेक्शन तो मिल गया है परंतु वे उसे रिफिल नहीं करवा पा रहे हैं।

PMUY के संबंध में CAG की अनुशंसाएँ:

  • प्रत्येक लाभार्थी परिवार के सभी वयस्क सदस्यों की आधार संख्या का विवरण रखा जाना चाहिये ताकि फर्जी तथा दोहरे कनेक्शन जारी करने से बचा जा सके।
  • योजना के कार्यान्वयन के आकलन के लिये किसी भी तीसरे पक्ष से समय-समय पर इसका ऑडिट करवाया जा सकता है।
  • अयोग्य लाभार्थियों को LPG कनेक्शन जारी करने पर रोक लगाने के लिये वितरकों द्वारा सॉफ्टवेयर में उचित इनपुट नियंत्रण, डेटा सत्यापन और अनिवार्य योग्यताओं के सही ब्यौरे की जाँच की जाने चाहिये।
  • सही जानकारी सुनिश्चित करने और PMUY के लाभार्थियों की वास्तविकता को प्रमाणित करने के लिये ई-केवाईसी शुरू करने की आवश्यकता है।
  • नाबालिग लाभार्थियों को जारी किये गए कनेक्शन परिवार के वयस्क सदस्य के नाम पर स्थानांतरित किये जा सकते हैं।
  • PMUY के लाभार्थियों द्वारा LPG के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिये सुरक्षा अभियान आयोजित किये जाने की आवश्यकता है।
  • निम्न उपभोग श्रेणी या बिलकुल उपभोग न करने के मामले में PMUY के लाभार्थियों को निरंतर LPG उपयोग के लिये प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है।
  • उच्च खपत के मामलों पर अंकुश लगाने के लिये इसकी नियमित रूप से समीक्षा की जानी चाहिये।
  • संपूर्ण LPG डेटाबेस के साथ-साथ अयोग्य लाभार्थियों की पहचान कर उन्हें प्रतिबंधित करने के लिये भौतिक रिकॉर्ड की जाँच करने की आवश्यकता है।
  • नियमित निरीक्षण के अभाव में जोखिम के खतरों से बचने के लिये अनिवार्य निरीक्षण की लागत को सब्सिडी के रूप में देने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है।

स्रोत- द हिंदू, बिज़नेस लाइन, टाइम्स ऑफ इंडिया

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