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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिये विशेष आर्थिक पैकेज

  • 15 Oct 2020
  • 7 min read

प्रिलिम्स के लिये

दीनदयाल अंत्‍योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

मेन्स के लिये

विशेष आर्थिक पैकेज का महत्त्व और इसकी आवश्यकता

चर्चा में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के लिये 520 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज को मंज़ूरी दी है।

प्रमुख बिंदु

  • ध्यातव्य है कि 520 करोड़ रुपए के इस विशेष पैकेज को दीनदयाल अंत्‍योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत मंज़ूरी प्रदान की गई है।
  • इस विशेष पैकेज को कुल पाँच वर्ष (वित्तीय वर्ष 2023-24 तक) के लिये मंज़ूरी दी गई है।
  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दीनदयाल अंत्‍योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के मापदंडों में बदलाव को भी मंज़ूरी दी है।
    • कारण: मिशन के तहत कई तकनीकी कारकों के चलते पूर्ववर्ती जम्मू-कश्मीर राज्य की कई महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था, अतः सभी ज़रूरतमंदों तक योजना का लाभ पहुँचाने के लिये इसके मापदडों में बदलाव करना आवश्यक था।

महत्त्व

  • इससे इन केंद्रशासित प्रदेशों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) की ज़रूरत के आधार पर इस मिशन के तहत पर्याप्‍त धन सुनिश्चित किया जा सकेगा 
  • यह विशेष पैकेज समयबद्ध तरीके से केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में सभी केंद्र प्रायोजित योजनाओं को सार्वभौमिक बनाने के भारत सरकार के उद्देश्‍य के भी अनुरूप है।
  • अब विशेष पैकेज के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की तकरीबन दो-तिहाई ग्रामीण महिलाओं को कवर किया जाएगा और अगले पाँच वर्ष तक 520 करोड़ रुपए के इस विशेष पैकेज का लाभ तकरीबन 10.58 लाख महिलाओं को मिल सकेगा।
    • ध्यातव्य है कि सरकार ने देश भर की तकरीबन 10 करोड़ महिलाओं तक इस योजना का लाभ पहुँचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें से 10 लाख महिलाएँ जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से होंगी।

आवश्यकता

  • जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करते हुए भारत सरकार ने तर्क दिया था कि इस निर्णय के माध्यम से भारत के अन्य क्षेत्रों में लागू किये गए कानून और कल्याण योजनाओं को जम्मू-कश्मीर में भी लागू किया जा सकेगा, जिससे इस क्षेत्र का विकास भी सुनिश्चित होगा।
  • इससे जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के आम लोगों के जीवन एवं उनकी आजीविका में सुधार होगा तथा यह सुनिश्चित होगा कि आम लोग आतंकवादी समूहों में शामिल न हों।
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की अर्थव्यवस्था को बदलने के लिये सड़कों, पुलों, कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं तथा विशेष औद्योगिक क्षेत्रों जैसी अवसंरचना परियोजनाओं में तेज़ी लाई जा रही है और इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

पृष्ठभूमि

  • दीनदयाल अंत्‍योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) को पूर्ववर्ती राज्‍य जम्मू-कश्मीर में ‘उम्‍मीद’ (Umeed) कार्यक्रम के रूप में लागू किया गया था।
  • इस मिशन के तहत वित्त का आवंटन राज्यों के बीच पारस्परिक गरीबी के अनुपात में किया जाता है, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर को इस मिशन के तहत कुल राशि का 1 प्रतिशत से भी कम हिस्सा मिल पाता था।
  • इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इस मिशन के तहत वित्त वर्ष 2013-14 से वित्त वर्ष 2017-18 तक पाँच वर्ष की निश्चित समयसीमा में जम्मू-कश्मीर के लिये पर्याप्‍त वित्तपोषण सहायता सुनिश्चित करने और राज्‍य की गरीब ग्रामीण आबादी (जो कुल ग्रामीण आबादी की लगभग दो-तिहाई है) को पर्याप्‍त कवरेज प्रदान करने हेतु भारत सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्‍य के लिये एक अन्य विशेष पैकेज को मंज़ूरी दी थी।
  • यद्यपि विभिन्न कारकों और राज्‍य की अशांत स्थिति के कारण इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका था, किंतु एक स्वतंत्र संस्था द्वारा किये गए इस विशेष पैकेज के मूल्यांकन में मिशन के कार्यान्‍वयन से संबंधित अनेक अच्छे परिणाम सामने आए, जिनमें आय स्‍तर में बढ़ोतरी, महिलाओं के लिये नए आजीविका अवसरों का सृजन, अधिक बचत और अधिक निवेश आदि शामिल हैं। 

दीनदयाल अंत्‍योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) 

  • दीनदयाल अंत्‍योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) एक केंद्रीय प्रायोजित योजना है, जिसकी शुरुआत जून 2011 में हुई थी
  • इस योजना का उद्देश्‍य पूरे देश में कौशल विकास एवं अन्य उपायों के माध्यम से आजीविका के अवसरों में वृद्धि कर ग्रामीण गरीबी का उन्मूलन करना है। 
  • इस योजना के तहत भारत के 10 करोड़ गरीब परिवारों की कम-से-कम एक महिला को स्वयं सहायता समूह (SHG) से जोड़कर, उन्हें प्रशिक्षण देकर और लघु आजीविका योजनाओं में सहायता प्रदान कर उनके जीवन स्तर में परिवर्तन का प्रयास किया जा रहा है। 
    • ध्यातव्य है कि भारत में 63 लाख स्वयं सहायता समूहों में 7 करोड़ महिला सदस्य हैं।

स्रोत: द हिंदू

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