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जैविक अनुसंधान नियामक अनुमोदन पोर्टल

  • 23 May 2022
  • 10 min read

प्रिलिम्स  के लिये:

सरकारी नीतियांँ और हस्तक्षेप, पोर्टल बायोआरआरएपी, जीडीपी।

मेन्स के लिये:

शासन, सरकारी नीतियांँ और हस्तक्षेप, सकल घरेलू उत्पाद (GDP), रोज़गार, जैविक क्षेत्र में भारत की स्थिति , भारत में स्टार्टअप विकास परिदृश्य।

चर्चा में क्यों? 

"एक राष्ट्र, एक पोर्टल" की भावना को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने हाल ही में बायोटेक शोधकर्त्ताओं और स्टार्टअप के लिये एक एकल राष्ट्रीय पोर्टल यानी जैविक अनुसंधान नियामक अनुमोदन पोर्टल (BioRRAP) लॉन्च किया।

  • जैव प्रौद्योगिकी भारत में युवाओं के लिये एक अकादमिक और आजीविका के साधन के रूप में तेज़ी से उभरी है।

भारत में स्टार्टअप विकास परिदृश्य: 

  • भारत स्टार्टअप्स के लिये एक ‘हॉटस्पॉट’ है। अकेले वर्ष 2021 में ही भारतीय स्टार्टअप्स ने 23 बिलियन डॉलर से अधिक की राशि जुटाई, ये 1,000 से अधिक सौदों में शामिल हुए और 33 स्टार्टअप कंपनियों का प्रतिष्ठित ‘यूनिकॉर्न क्लब’ में भी प्रवेश हुआ। वर्ष 2022 में अब तक 13 अन्य स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो चुके हैं। 
    • संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन के बाद भारत विश्व के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप पारितंत्र के रूप में उभरा है।
      • वर्तमान में भारत में स्टार्टअप्स की संख्या में तेज़ी से वृद्धि हो रही है। ‘बैन एंड कंपनी’ द्वारा प्रकाशित ‘इंडिया वेंचर कैपिटल रिपोर्ट 2021’ के अनुसार, संचयी स्टार्टअप की संख्या वर्ष 2012 के बाद से 17% चक्रवृद्धि वार्षिक विकास दर (CAGR) से बढ़ी है और 1,12,000 की संख्या को पार कर गई है।
  • वर्ष 2021 तक भारत का बायोटेक उद्योग का वार्षिक राजस्व लगभग 12 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है।

जैविक अनुसंधान नियामक अनुमोदन पोर्टल का महत्त्व: 

  • शोधकर्त्ताओं के लिये एक प्रवेश द्वार: यह पोर्टल एक गेटवे के रूप में काम करेगा और शोधकर्त्ता को नियामक मंज़ूरी के लिये अपने आवेदनों के अनुमोदन चरणों को देखने और विशेष शोधकर्त्ता/ संगठन द्वारा किये जा रहे सभी शोध कार्यों के बारे में प्रारंभिक जानकारी प्राप्त करने में भी मदद करेगा।
  • पारदर्शिता और जवाबदेही: यह पोर्टल अंतर-विभागीय तालमेल को मज़बूत करेगा और जैविक अनुसंधान के विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करने तथा उनके लिये अनुमति प्रदान करने वाली एजेंसियों के कामकाज में जवाबदेही, पारदर्शिता तथा प्रभावकारिता का समावेश करेगा।
  • BioRRAP ID: ऐसे जैविक शोधों को अधिक विश्वसनीयता और मान्यता प्रदान करने के लिये भारत सरकार ने एक वेब प्रणाली विकसित की है, जिसके तहत प्रत्येक अनुसंधान, जिसमें नियामक निरीक्षण की आवश्यकता होती है, की पहचान BioRRAP ID नामक एक विशिष्ट आईडी द्वारा की जाएगी।
    • इस आईडी का उपयोग करके संबंधित नियामक एजेंसियों को आवेदन जमा करने की प्रक्रिया शुरू करनी होती है। 
  • ईज़ ऑफ डूइंग रिसर्च: DBT (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) का यह अनूठा पोर्टल देश में ईज़ ऑफ डूइंग साइंस एंड साइंटिफिक रिसर्च और ईज़ ऑफ स्टार्टअप्स की दिशा में एक कदम है। 
    • विभिन्न नियामक एजेंसियों के पास अनुमोदन के लिये प्रस्तुत आवेदनों को आपस में लिंक करने की भी आवश्यकता है ताकि आवेदन की स्थिति एक ही स्थान पर देखी जा सके।
  • सूचना एकत्र करने हेतु: यह पोर्टल न केवल वैज्ञानिक क्षमता और विशेषज्ञता को समझने में मदद करेगा, बल्कि वैज्ञानिक अनुसंधान के लाभों को प्राप्त करने के लिये सक्षम नीतियों के निर्माण में भी मदद करेगा।

जैविक अनुसंधान क्षेत्र में भारत की स्थिति: 

  • भारत विश्व स्तर पर जैव प्रौद्योगिकी के लिये शीर्ष 12 गंतव्यों में से एक है और एशिया प्रशांत क्षेत्र में तीसरा सबसे बड़ा जैव प्रौद्योगिकी गंतव्य है।
    • वर्तमान में भारतीय उद्योग में 2,700 से अधिक बायोटेक स्टार्टअप शामिल हैं और 2,500 से अधिक बायोटेक कंपनियाँ मौज़ूद हैं।
  • जैव प्रौद्योगिकी के अलावा जैव विविधता से संबंधित जैविक कार्य, वनस्पति एवं जीवों के संरक्षण और संरक्षण के नवीनतम तरीके, वन एवं वन्यजीव, जैव-सर्वेक्षण तथा जैविक संसाधनों का जैव-उपयोग भी जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण भारत में गति प्राप्त कर रहे हैं।
    • भारत में विभिन्न सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के अनुदान के कारण विभिन्न जैविक क्षेत्रों में अनुसंधान का लगातार विस्तार हो रहा है।
  • भारत का लक्ष्य वर्ष 2025 तक ग्लोबल बायो-मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में मान्यता प्राप्त करना है तब यह दुनिया के शीर्ष 5 देशों में शामिल हो जाएगा।
    • वैश्विक जैव प्रौद्योगिकी बाज़ार में भारतीय जैव प्रौद्योगिकी उद्योग का योगदान वर्ष 2025 तक बढ़कर 19% हो जाने की उम्मीद है, जो वर्ष 2017 में 3% था। 
    • राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में जैव अर्थव्यवस्था का योगदान भी पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा है।
      • जबकि जैव-अर्थव्यवस्था ने वर्ष 2017 में सकल घरेलू उत्पाद में 1.7% का योगदान दिया, यह हिस्सा वर्ष 2020 में बढ़कर 2.7% हो गया है।
      • भारतीय जैव-अर्थव्यवस्था वर्ष 2019 के 62.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2020 में 12.3% की वृद्धि दर के साथ 70.2 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो गई। 
    • भारत 2047 के शताब्दी वर्ष में 25 साल की जैव-अर्थव्यवस्था की यात्रा के बाद नई ऊंँचाइयों को छुएगा।

जैव अर्थव्यवस्था: 

  • जैव-अर्थव्यवस्था की अवधारणा संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय संघ (EU) तथा ऑस्ट्रेलिया द्वारा जैव-संसाधनों का उपयोग करके अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिये शुरू की गई थी।
  • 'जैव-अर्थव्यवस्था' शब्द अक्षय जैविक संसाधनों के उत्पादन और इन संसाधनों एवं अपशिष्ट धाराओं के संरक्षण को मूल्यवर्द्धित उत्पादों, जैसे- भोजन,  जैव-आधारित उत्पादों और जैव-ऊर्जा के रूप में संदर्भित करता है

यूपीएससी विगत वर्ष के प्रश्न (PYQs): 

प्रश्न. जोखिम पूंजी से क्या तात्पर्य है? (2014)

(a) उद्योगों को उपलब्ध कराई गई अल्पकालीन पूंजी
(b) नए उद्यमियों को उपलब्ध कराई गई दीर्घकालीन प्रारम्भिक पूंजी
(c) उद्योगों को हानि उठाते समय उपलब्ध कराई गई निधियाँ
(d) उद्योगों के प्रतिस्थापन एवं नवीकरण के लिये उपलब्ध कराई गई निधियाँ

उत्तर: B

  • जोखिम पूंजी एक नए या बढ़ते व्यवसाय को निधि प्रदान करती है। आमतौर पर यह जोखिम पूंजी उद्योगों द्वारा प्रदान की जाती है, जो उच्च जोखिम वाले वित्तीय पोर्टफोलियो से संबंधित होती है।
  • जोखिम पूंजी वाले उद्योग किसी भी स्टार्टअप में इक्विटी के बदले स्टार्टअप कंपनी को निधि प्रदान करते हैं।
  • जो निवेशक पूंजी का निवेश करते हैं उन्हें जोखिम पूंजीवादी (VC) कहा जाता है। उद्यम पूंजी निवेश को जोखिम पूंजी या बीमारू जोखिम पूंजी के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इसमें उद्यम के  सफल न होने पर हानि का जोखिम भी शामिल होता है और साथ ही साथ निवेश के प्रतिफल की प्राप्ति में मध्यम से लंबी अवधि का समय भी लग सकता है।

अतः विकल्प B सही है।

 स्रोत: पी.आई.बी.

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