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अंतर्राष्ट्रीय संबंध

बिम्सटेक

  • 19 Jul 2023
  • 11 min read

प्रिलिम्स के लिये:

बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेक), भारत-प्रशांत क्षेत्र, हिंद महासागर, दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ

मेन्स के लिये:

क्षेत्रीय सहयोग के लिये बिम्सटेक का महत्व

चर्चा में क्यों?

हाल ही में बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल (बिम्सटेक) की पहली विदेश मंत्रियों की बैठक बैंकॉक में शुरू हुई। 

  • इस बैठक में भोजन, स्वास्थ्य और ऊर्जा सुरक्षा सहित अन्य सामूहिक चुनौतियों के क्षेत्रों पर चर्चा की गई।

बिम्सटेक: 

  • परिचय: 
    • बिम्सटेक सात सदस्य देशों का एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें दक्षिण एशिया के पाँच देश- बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश-  म्याँमार एवं थाईलैंड शामिल हैं।
    • यह उप-क्षेत्रीय संगठन 6 जून, 1997 को बैंकाक घोषणा के माध्यम से अस्तित्त्व में आया।
    • BIMSTEC का सचिवालय बांग्लादेश के ढाका में है। 
  • संस्थागत तंत्र: 
    • बिम्सटेक शिखर सम्मेलन
    • मंत्रिस्तरीय बैठक
    • वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक
    • बिम्सटेक कार्य समूह
    • व्यापार मंच एवं आर्थिक मंच
  • सहयोग: 
    • बिम्सटेक के अंर्तगत सहयोग प्रारंभ में वर्ष 1997 में 6 क्षेत्रों (व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन और मत्स्य पालन) पर केंद्रित था तथा बाद में वर्ष 2008 में अन्य क्षेत्रों में विस्तारित हुआ।
    • प्रत्येक सदस्य देश ने पुनर्गठन के बाद वर्ष 2021 में विशिष्ट क्षेत्रों का नेतृत्व ग्रहण किया।
    • भारत आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय अपराध, आपदा प्रबंधन तथा ऊर्जा सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा पर भी ध्यान केंद्रित करता है।

बिम्सटेक का महत्त्व: 

  • वैश्विक स्तर पर महत्त्व: 
    • विश्व की लगभग 22% आबादी बंगाल की खाड़ी के आसपास के सात देशों में रहती है जिनकी संयुक्त GDP 2.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के करीब है।
    • वर्ष 2012 से 2016 तक सभी सात देशों की औसत वार्षिक वृद्धि दर 3.4% और 7.5% के बीच बनी रही।
    • प्रत्येक वर्ष विश्व के एक-चौथाई माल का व्यापार खाड़ी के माध्यम से किया जाता है।
  • क्षेत्रीय रणनीतिक प्रोत्साहन: 
    • बिम्सटेक (BIMSTEC) के विकास हेतु बिम्सटेक देशों के पास रणनीतिक प्रोत्साहन प्राप्त है।
    • उदाहरण के लिये बांग्लादेश बिम्सटेक को बंगाल की खाड़ी पर एक लघु देश न मानकर अपनी स्थिति को सुदृढ़ करने के लिये एक मंच के रूप में देखता है।
    • श्रीलंका इसे दक्षिण-पूर्व एशिया से जुड़ने तथा हिंद-प्रशांत क्षेत्र का व्यापक केंद्र बनने के अवसर के रूप में देखता है।
    • नेपाल और भूटान का लक्ष्य अपनी स्थलरुद्ध भौगोलिक स्थिति पर नियंत्रण प्राप्त करने के लिये बंगाल की खाड़ी क्षेत्र से जुड़ना है।
    • म्याँमार एवं थाईलैंड भारत और बिम्सटेक के साथ गहरे संबंधों को भारत के बढ़ते उपभोक्ता बाज़ार तक पहुँचने, क्षेत्र में चीन के प्रभाव को संतुलित करने तथा दक्षिण-पूर्व एशिया में चीन की उपस्थिति के विकल्प के तौर पर विकसित करने के साधन के रूप में देखते हैं।
    • यह आर्थिक एकीकरण, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग और शांति एवं विकास हेतु साझा मूल्यों का लाभ उठाने की अनुमति प्रदान करता है।
  • भारत के लिये महत्त्व: 
    • बिम्सटेक न केवल दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ता है बल्कि महान हिमालय और बंगाल की खाड़ी की पारिस्थितिकी को भी शामिल करता है।
    • भारत बिम्सटेक को "नेबरहुड फर्स्ट" और "एक्ट ईस्ट" के अपने विदेश नीति उद्देश्यों को प्राथमिकता देने के लिये एक सहज मंच के रूप में देखता है।
      • बिम्सटेक का महत्त्व तब सामने आया जब इसके कुछ सदस्य देशों ने इस्लामाबाद में दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (South Asian Association for Regional Cooperation- SAARC) शिखर सम्मेलन के बहिष्कार के भारत के आह्वान का समर्थन किया, जिसके कारण इसे बाद में स्थगित करना पड़ा था। 
      • इस कदम से भारत ने पाकिस्तान को इससे बाहर रखने में सफलता हासिल की थी।
  • चीन की आक्रामकता : 
    • हिंद महासागर तक अपने पहुँच के मार्ग को बनाए रखने में तेज़ी से मुखर हो रहे चीन के लिये बंगाल की खाड़ी का काफी महत्त्व है।
      • भूटान और भारत को छोड़कर, चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के माध्यम से दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में बुनियादी ढाँचे के वित्तपोषण तथा निर्माण के लिये एक वृहत अभियान शुरू किया है, जिस कारण बिम्सटेक भारत और चीन के बीच प्रभुत्त्व के संघर्ष के लिये एक नया मोर्चा बन गया है।
    • बिम्सटेक की सहायता से भारत, चीनी निवेश का मुकाबला करने के लिये एक रचनात्मक एजेंडे का निर्माण कर सकता है और/या फिर मान्यता प्राप्त अंतर्राष्ट्रीय मानदंडों के आधार पर कनेक्टिविटी परियोजनाओं के लिये सर्वोत्तम प्रथाओं का पालन कर सकता है। 
      • चीनी परियोजनाओं को व्यापक रूप से इन मानदंडों का उल्लंघन करते हुए पाया जाता है।
  • शांति और नौवहन की स्वतंत्रता को सुरक्षित रखना:
    • दक्षिण चीन सागर में चीन के रवैये के विपरीत बंगाल की खाड़ी को खुले और शांतिपूर्ण क्षेत्र के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है।
    • यह नौवहन की स्वतंत्रता को संरक्षित करने और मौजूदा समुद्री कानून को क्षेत्रीय स्तर पर लागू करने वाले आचार संहिता का विकास कर सकता है।
    • इसके अतिरिक्त बिम्सटेक बंगाल की खाड़ी क्षेत्र की शांति जैसी पहल स्थापित करके इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्यीकरण को रोक सकता है जिसका उद्देश्य अतिरिक्त क्षेत्रीय शक्तियों की आक्रामक कार्रवाइयों पर लगाम लगाना है।

बिमस्टेक की सार्क से भिन्नता 

सार्क 

बिमस्टेक 

1. दक्षिण एशिया पर नज़र रखने वाला एक क्षेत्रीय संगठन

2. शीतयुद्ध काल के दौरान वर्ष 1985 में स्थापित।

3. सदस्य देशों को अविश्वास और संदेह का खामियाजा भुगतना पड़ता है।

4. क्षेत्रीय राजनीति से पीड़ित।

5. असममित शक्ति संतुलन।

6. अंतर-क्षेत्रीय व्यापार केवल 5 प्रतिशत।

1.दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने वाला अंतर्क्षेत्रीय संगठन।

2. शीत युद्ध के बाद वर्ष 1997 में स्थापित।

3. सदस्य यथोचित मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखते हैं।

4. मुख्य उद्देश्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग में सुधार करना है।

5. ब्लॉक में थाईलैंड और भारत की उपस्थिति के साथ शक्ति संतुलन।

6. एक दशक में अंतर-क्षेत्रीय व्यापार लगभग 6 प्रतिशत बढ़ गया है।

आगे की राह 

  • बिमस्टेक सदस्य देशों को व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, मत्स्य पालन, सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी, आपदा प्रबंधन और ऊर्जा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को मज़बूत करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिये।
  • संगठन को वर्तमान समझौतों को लागू करने और सहयोग के लिये नए रास्ते तलाशने की दिशा में कार्य करना चाहिये।
  • बिमस्टेक को व्यापार सुविधा बढ़ाने, बाधाओं को कम करने और सदस्य देशों के बीच आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य करना चाहिये।
  • संगठन को क्षेत्रीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिये मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के अवसर तलाशने चाहिये।

  UPSC सिविल सेवा परीक्षा, विगत वर्ष के प्रश्न  

प्रश्न. आपके विचार में क्या बिमस्टेक (BIMSTEC) सार्क (SAARC ) की तरह एक समानांतर संगठन है? इन दोनों के बीच क्या समानताएँ और असमानताएँ हैं? इस नए संगठन के बनाए जाने से भारतीय विदेश नीति के उद्देश्य कैसे प्राप्त हुए हैं? (2022) 

स्रोत : इंडियन एक्सप्रेस

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